छिंदवाड़ा के सांगाखेड़ा वन परिक्षेत्र की बूढ़ी माई बीट से आगे बढ़ा जंगली हाथी अब ऊंचे टेमरू गांव के करीब पहुंच गया है। कुकरपानी गांव के समीप घने जंगल और पहाड़ी क्षेत्र में पिछले पांच दिनों से उसकी रफ्तार थमी हुई है। यहां बांस का घना जंगल होने से हाथी ज्यादातर समय बांस खाकर ही गुजार रहा है। घने जंगल में मौजूदगी के कारण वन विभाग के लिए हाथी पर लगातार नजर रखना चुनौती बना हुआ है। विभाग और प्रशासन संभावित मूवमेंट वाले इलाकों में सतर्कता बरत रहे हैं। हाथी जिस बीट में मौजूद है या जिस दिशा में उसके बढ़ने की आशंका है, वहां सुरक्षा के मद्देनजर बिजली सप्लाई बंद रखी जा रही है। दो गांवों की बिजली दो दिन से बंद हाथी के आबादी क्षेत्र की ओर बढ़ने की स्थिति में बिजली के तारों से किसी तरह का खतरा न हो, इसके लिए कुकरपानी और ऊंचे टेमरू गांव की बिजली सप्लाई पिछले दो दिनों से बंद है। वन विभाग की टीमें हाथी की गतिविधियों पर लगातार नजर रख रही हैं। छह साल पहले करंट से हुई थी हाथी की मौत करीब छह साल पहले छत्तीसगढ़ से दो नर हाथी भटककर इस क्षेत्र में पहुंचे थे। दोनों हाथी देलाखारी, सांगाखेड़ा और सतपुड़ा नेशनल पार्क के जंगलों तक पहुंचे और बाद में वापस लौट गए थे। इनमें से एक हाथी की बालाघाट के समीप बिजली का करंट लगने से मौत हो गई थी। पुराने हादसे को देखते हुए वन विभाग इस बार बिजली लाइनों को लेकर विशेष सतर्कता बरत रहा है। विभाग की प्राथमिकता हाथी को आबादी क्षेत्र और बिजली लाइनों से दूर रखते हुए उसकी सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना है।

