बाराबंकी के रामनगर क्षेत्र के हेतमापुर गांव में सरयू नदी का कटान तेजी से आबादी की ओर बढ़ रहा है। नदी की धारा खेतों और मकानों को लगातार निगल रही है। पिछले 24 घंटे में 7 और मकान नदी में बह गए। हालात ऐसे हैं कि कई ग्रामीण अपने हाथों से घर तोड़कर सामान निकालने को मजबूर हैं। अब गांव की वर्षों पुरानी एक मस्जिद पर भी कटान का खतरा मंडरा रहा है। सरयू नदी खतरे के निशान से करीब 40 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। ग्रामीणों के मुताबिक, कुछ समय पहले तक नदी गांव से करीब एक किलोमीटर दूर बहती थी। इस बार धारा तेजी से आबादी की तरफ बढ़ी है। नदी किनारे की जमीन कटकर लगातार पानी में समा रही है। ग्रामीण आशिक अली ने बताया कि करीब 20 साल पहले भी गांव में इसी तरह तेज कटान हुआ था। बोले- मजबूत ठोकर होती तो यह दिन नहीं देखना पड़ता कटान से प्रभावित मैकू लाल, लोटन, पलटू, राजू, द्वारिका, कल्लू, मोहम्मद शरीफ, अहमद अली, सफीक, सलीम और अरमान समेत ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते मजबूत ठोकर और स्थायी कटानरोधी इंतजाम किए गए होते तो उन्हें अपने घर खुद तोड़ने की नौबत नहीं आती। ग्रामीणों के मुताबिक, उनकी आंखों के सामने घरों के साथ उपजाऊ जमीन भी नदी में समा रही है। कई परिवार घर का जरूरी सामान निकालकर सुरक्षित जगहों पर जा रहे हैं। JCB और ट्रैक्टर से नदी किनारे डाली जा रहीं ईंट-पत्थर कटान की गंभीर स्थिति को देखते हुए प्रशासन और बाढ़ विभाग ने बचाव कार्य तेज कर दिया है। JCB और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की मदद से नदी किनारे पत्थर और ईंटें डाली जा रही हैं। संवेदनशील स्थानों पर लगातार बचाव सामग्री पहुंचाकर कटान की रफ्तार रोकने का प्रयास किया जा रहा है। 450 मकान और 1200 से ज्यादा मतदाता, मस्जिद बचाना बड़ी चुनौती डीएम ईशान प्रताप सिंह के मुताबिक, जिले के 12 गांव बाढ़ की चपेट में हैं। प्रशासन प्रभावित लोगों की मदद कर रहा है। हेतमापुर में करीब 450 मकान और 1200 से ज्यादा मतदाता हैं। प्रशासन के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती बचे हुए मकानों और गांव की मस्जिद को कटान से बचाने की है। नदी का पानी और कटान जिस तेजी से आबादी की तरफ बढ़ रहा है, उससे ग्रामीणों में दहशत बनी हुई है।

