10 साल से फरार आरोपी Harnek Singh को CBI ने US से प्रत्यर्पण कर दिल्ली एयरपोर्ट से पकड़ा

10 साल से फरार आरोपी Harnek Singh को CBI ने US से प्रत्यर्पण कर दिल्ली एयरपोर्ट से पकड़ा

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने धोखाधड़ी के मामले में एक दशक से भी अधिक समय से फरार एक भगोड़े आरोपी को अमेरिका से भारत वापस लाए जाने के बाद गिरफ्तार कर लिया है। अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। सीबीआई की एक प्रवक्ता ने बताया कि आरोपी हरनेक सिंह को बुधवार को यहां इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचते ही गिरफ्तार कर लिया गया।

प्रवक्ता ने बताया कि आरोपी के खिलाफ ‘इंटरपोल रेड नोटिस’ और ‘लुक-आउट सर्कुलर’ जारी था। उसे हरियाणा के पंचकूला स्थित विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीबीआई मामले) की अदालत में जल्द से जल्द पेश किया जाएगा। सीबीआई प्रवक्ता ने बृहस्पतिवार को एक बयान में बताया कि आरोपी 2013 के एक धोखाधड़ी मामले में वांछित था जिसमें जालसाजों ने भारत में रहकर फोन के जरिए सिंगापुर में रह रहे या काम कर रहे भारतीय नागरिकों को अपना शिकार बनाया था।

उन्होंने बताया कि फोन करने वाले खुद को सिंगापुर आव्रजन अधिकारियों के रूप में पेश करते थे और पीड़ितों से झूठ बोलते थे कि उन्होंने हवाई अड्डे पर अपने आगमन प्रपत्र में गलत जानकारी भरी है। इसके बाद पीड़ितों को आपराधिक कार्रवाई और देश से निकाले जाने का डर दिखाकर उनसे धन ऐंठते थे। सीबीआई ने इस संबंध में 2016 में आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, जालसाजी व फर्जी दस्तावेजों को असली के रूप में इस्तेमाल करने से जुड़ी भारतीय दंड संहिता की धाराओं और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया था।

जांच में सामने आया कि ठगी की रकम हरनेक सिंह द्वारा सह-आरोपी आदित्य भारद्वाज और दीपक जैन के साथ मिलकर संचालित किए जा रहे मुद्रा हस्तांतरण केंद्र के जरिए प्राप्त की गई थी। बयान के मुताबिक, हरनेक सिंह मई 2013 में भारत से भाग गया था और बाद में अवैध तरीके से अमेरिका में दाखिल हो गया, जहां वह 10 साल से अधिक समय तक छिपा रहा। सिंह के फरार रहने के दौरान ही पंचकूला स्थित विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीबीआई) की अदालत में भारद्वाज और जैन के खिलाफ सुनवाई जारी रही, जिसमें दोनों को दोषी ठहराया जा चुका है।

प्रवक्ता ने कहा, ‘‘इसके बाद, अदालत ने 22 अप्रैल 2024 को हरनेक सिंह के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया। सीबीआई ने इंटरपोल के माध्यम से इस मामले की पैरवी की, जिसके परिणामस्वरूप उसके खिलाफ रेड नोटिस और ‘लुक-आउट सर्कुलर’ भी जारी करवाया गया।

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