Kids Mobile Addiction: बच्चों को खाना खिलाना हो, रोते हुए चुप कराना हो या कोई काम आसानी से करवाना हो, कई बार माता-पिता उनके हाथ में मोबाइल या टैबलेट दे देते हैं। वहीं छोटे बच्चों को दादा-दादी, नाना-नानी या दूसरे रिश्तेदारों से मिलाने के लिए वीडियो कॉल करने के लिए भी मोबाइल का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में आइए जानते हैं कि छोटे बच्चों के लिए स्क्रीन टाइम को लेकर किन बातों का ध्यान रखना चाहिए और क्या वीडियो कॉल से भी बच्चे पर प्रभाव पड़ सकता है।
स्क्रीन टाइम से विकास पर क्या असर पड़ सकता है?
छोटे बच्चे सिर्फ किताबों या वीडियो से ही नहीं, बल्कि अपने आसपास के लोगों से बातचीत करके भी बहुत कुछ सीखते हैं। वे माता-पिता की बात सुनते हैं, जवाब देते हैं, चेहरे के भाव समझते हैं और खेलते हुए नई चीजें सीखते हैं। क्लीवलैंड क्लिनिक (Cleveland Clinic) के अनुसार, अगर बच्चा लंबे समय तक स्क्रीन देखने में लगा रहता है, तो उसे माता-पिता और दूसरे लोगों के साथ बातचीत और खेलने के लिए कम समय मिल सकता है। इससे बच्चे के भाषा और सामाजिक विकास से जुड़ी जरूरी गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं।
छोटे बच्चों को वीडियो कॉल करानी चाहिए या नहीं?
छोटे बच्चों के वीडियो कॉल और मोबाइल इस्तेमाल को लेकर जागरूक करते हुए इंस्टाग्राम चैनल dr_shilpi_rohtak पर गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. शिल्पी सिंह ने वीडियो शेयर कर बच्चों के आसपास मोबाइल रखने और उसके इस्तेमाल को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी है। डॉ. शिल्पी सिंह के अनुसार, मोबाइल से निकलने वाले रेडिएशन से छोटे बच्चों की आंखों और दिमाग पर असर पड़ सकता है। इसके साथ ही बच्चों को दूध पिलाते समय मोबाइल पर बात करने या लगातार मोबाइल इस्तेमाल करने से भी बचना चाहिए। ऐसा करने से इमोशनल डेवलपमेंट पर असर पड़ सकता है।
सोने से पहले मोबाइल क्यों नहीं देना चाहिए?
सोने से ठीक पहले मोबाइल, टैबलेट या टीवी देखने से बच्चों को सोने में परेशानी हो सकती है। स्क्रीन की रोशनी और स्क्रीन पर चलने वाली गतिविधियां बच्चे को ज्यादा देर तक सक्रिय रख सकती हैं। क्लीवलैंड क्लिनिक (Cleveland Clinic) बच्चों के बेडरूम को स्क्रीन फ्री रखने और सोने से कम से कम एक घंटे पहले स्क्रीन बंद करने की सलाह देता है। इसलिए बच्चे के सोने का समय होने के बाद मोबाइल या टैबलेट देने से बचना बेहतर है।
छोटे बच्चों को कितना स्क्रीन टाइम देना चाहिए?
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, 1 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए स्क्रीन टाइम की सलाह नहीं दी जाती। 2 से 4 साल की उम्र में स्क्रीन टाइम एक घंटे से ज्यादा नहीं होना चाहिए और इससे कम समय बेहतर है। वहीं क्लीवलैंड क्लिनिक (Cleveland Clinic) के अनुसार, 18 महीने से कम उम्र के बच्चों में स्क्रीन टाइम को बहुत कम रखना या न देना बेहतर है। 18 महीने से 5 साल की उम्र में स्क्रीन का इस्तेमाल सीमित रखना चाहिए और उच्च गुणवत्ता वाले कंटेंट को प्राथमिकता देनी चाहिए।
स्क्रीन टाइम कम कैसे करें?
अगर बच्चा हर समय मोबाइल मांगता है, तो अचानक मोबाइल पूरी तरह बंद करने के बजाय धीरे-धीरे स्क्रीन टाइम कम करने की कोशिश करें। इसके लिए बच्चे के साथ किताब पढ़ें, कहानी सुनाएं, गाने गाएं, पहेलियां सुलझाएं और उसे खेलने के लिए प्रोत्साहित करें। मौका मिले तो बच्चे को बाहर खेलने के लिए भी ले जाएं। इससे बच्चे का ध्यान धीरे-धीरे मोबाइल से हटाकर दूसरी गतिविधियों की ओर लगाया जा सकता है।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है।

