Satya Niketan Building Collapse: देश की राजधानी दिल्ली में बीते रविवार को अचानक एक पीजी बिल्डिंग गिर गई थी, जिसमें दबने की वजह से सात लोगों ने दम तोड़ दिया था। वहीं, इस हादसे में कई लोग घायल भी हुए थे। दिल्ली यूनिवर्सिटी के सेकेंड ईयर के B.Com छात्र नितेश चिब भी मलबे के नीचे फंस गए थे। करीब डेढ़ घंटे बाद उन्हें और उनके दोस्त को रेस्क्यू टीम ने मलबे से बाहर निकाला।
नितेश ने हादसे को याद करते हुए बताया कि रविवार दोपहर उन्होंने हॉस्टलडेज पीजी में अपने कमरे में खाना खाया ही था कि कुछ ही देर में पूरी इमारत भरभराकर गिर गई। वह अपने दोस्त के साथ मलबे के नीचे दब गए और करीब डेढ़ घंटे तक वहीं फंसे रहे।
दोस्त ने भेजी लाइव लोकेशन और SOS
नितेश के मुताबिक, उनके दोस्त ने किसी तरह WhatsApp पर अपनी लाइव लोकेशन और SOS मैसेज अपने दोस्तों को भेजे। इसके बाद दोस्तों ने रेस्क्यू टीमों को इसकी जानकारी दी। कुछ समय बाद दोनों को मलबे के नीचे से बाहर निकाला गया। उस वक्त दोनों घायल थे और शरीर से खून निकल रहा था। नितेश ने बताया कि मेरा पूरा शरीर सुन्न पड़ गया था। मुझे कुछ महसूस नहीं हो रहा था। बाद में मुझे एहसास हुआ कि मेरे शरीर से खून निकल रहा है। अस्पताल पहुंचने के कुछ समय बाद मुझे पूरी तरह होश आया।’
बाहर से ठीक दिखती थी बिल्डिंग
छात्र ने बताया कि पीजी में रहने वाले छात्रों ने कभी नहीं सोचा था कि इमारत इतनी कमजोर हो चुकी है कि अचानक ढह सकती है। उनके मुताबिक, बाहर से बिल्डिंग सामान्य दिखाई देती थी और दीवारों में ऐसी कोई दरार भी नजर नहीं आती थी, जिससे किसी बड़े खतरे का अंदाजा लगाया जा सके। उन्होंने बताया कि हादसे से करीब एक सप्ताह पहले से बेसमेंट में कुछ निर्माण कार्य चल रहा था। इसके बाद अचानक पूरी इमारत गिर गई।
‘सरकार को सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन कराना चाहिए’
अस्पताल में इलाज करा रहे नितेश ने सरकार से ऐसी इमारतों की सुरक्षा को लेकर सख्त कदम उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि दिल्ली में पढ़ाई के लिए आने वाले छात्रों के पास पीजी में रहने के अलावा कई बार कोई दूसरा विकल्प नहीं होता। नितेश ने कहा कि सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि पीजी संचालक और भवन मालिक सुरक्षा नियमों का पालन करें और ऐसी इमारतों का नियमित निरीक्षण किया जाए।
सात लोगों की गई जान
सत्य निकेतन में पीजी बिल्डिंग गिरने की घटना में सात लोगों की मौत हुई, जिनमें पांच छात्र शामिल थे। हादसे के बाद रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया और कई लोगों को मलबे से बाहर निकाला गया। मामले में दर्ज FIR के अनुसार, भवन मालिकों को कथित तौर पर पता था कि पुरानी इमारत की नींव अतिरिक्त भार सहने की स्थिति में नहीं थी। इसके बावजूद इमारत के ऊपर अतिरिक्त मंजिलों का निर्माण कराया गया।
FIR में आरोप है कि हरिराम बंसल उर्फ गुप्ता और उनके भाई ने किराये से ज्यादा कमाई के उद्देश्य से पुराने ढांचे के ऊपर चार अतिरिक्त मंजिलें बनाईं। जांच के मुताबिक, इन अतिरिक्त मंजिलों और निर्माण से इमारत पर काफी भार बढ़ गया, जिससे उसकी संरचनात्मक मजबूती और भार वहन क्षमता प्रभावित हुई।

