Shiv Sena BJP Dispute BMC: मुंबई के झोपड़ीधारकों को राहत देने के लिए शुरू की गई SRA अभय योजना को लेकर अब गंभीर आरोप सामने आए हैं। शिवसेना के गुटनेता अमेय घोले ने बुधवार को स्थायी समिति की बैठक में आरोप लगाया कि योजना के तहत पात्रता तय कराने के लिए आम लोगों से कथित तौर पर 5 से 10 लाख रुपये तक की मांग की जा रही है। घोले के मुताबिक, पैसे नहीं दे पाने के कारण झोपड़ीधारकों की पात्रता संबंधी फाइलें आगे नहीं बढ़ रही हैं।
अमेय घोले ने बताया कि अकेले एफ उत्तर वॉर्ड में 300 से 350 फाइलें मंजूरी की प्रतीक्षा में लंबित हैं। उन्होंने संबंधित महानगरपालिका अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
SRA अभय योजना क्यों शुरू की गई थी?
मुंबई में बड़ी संख्या में झोपड़ीधारक अपनी झोपड़ियों की खरीद-बिक्री या हस्तांतरण करते हैं। हालांकि, पुराने नियमों के तहत कई मामलों में नए झोपड़ीधारक का नाम पात्र झोपड़ीधारकों की सूची में शामिल करने का प्रावधान नहीं था। इसके कारण हजारों गरीब परिवार अपने हक के घर से वंचित हो सकते थे।
इसी समस्या को दूर करने और पात्रता सूची में नए झोपड़ीधारकों को शामिल करने के साथ-साथ तकनीकी अड़चनों को दूर करने के लिए उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की ओर से करीब दो साल पहले SRA अभय योजना शुरू की गई थी।
इस प्रक्रिया में पात्रता से जुड़े कुछ मामलों में मुंबई महानगरपालिका की भी भूमिका होती है। आरोप है कि इसी प्रक्रिया में आम झोपड़ीधारकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
‘5 से 10 लाख रुपये लिए जा रहे हैं’
स्थायी समिति की बैठक में अमेय घोले ने आरोप लगाया कि पात्रता के लिए जरूरी प्रक्रिया पूरी करने के नाम पर महानगरपालिका के कुछ अधिकारी और कर्मचारी कथित तौर पर 5 से 10 लाख रुपये तक की रकम मांग रहे हैं।
घोले के मुताबिक, आर्थिक रूप से कमजोर झोपड़ीधारकों के लिए इतनी बड़ी रकम देना संभव नहीं है। इसलिए कई लोगों की फाइलें आगे नहीं बढ़ पा रही हैं और बड़ी संख्या में मामले लंबित होते जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि एफ उत्तर वॉर्ड में 300 से 350 फाइलें इसी तरह लंबित हैं। घोले ने प्रशासन से मामले की गंभीरता से जांच कर संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई करने की मांग की।
कार्रवाई नहीं हुई तो सत्ता छोड़ने की चेतावनी
अमेय घोले ने आरोप लगाया कि वह कई दिनों से इस मामले में ठोस कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, लेकिन महानगरपालिका प्रशासन की ओर से अब तक कोई निर्णायक कदम नहीं उठाया गया है। इससे नाराज होकर उन्होंने स्थायी समिति की बैठक से सभात्याग किया।
इतना ही नहीं, घोले ने सत्तारूढ़ गठबंधन में सहयोगी भाजपा को भी चेतावनी दी कि यदि इस मामले में कार्रवाई नहीं हुई तो जरूरत पड़ने पर वह सत्ता से बाहर निकलने का फैसला लेने से भी पीछे नहीं हटेंगे।
एसआरए अभय योजना का उद्देश्य तकनीकी और पात्रता संबंधी अड़चनों में फंसे झोपड़ीधारकों को राहत देना था। लेकिन अब योजना के क्रियान्वयन में कथित भ्रष्टाचार और फाइलों के लंबित रहने के आरोपों ने प्रशासन के सामने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

