FTA वार्ताओं में payment systems के तालमेल पर जोर दे रहा भारत: Rajesh Agrawal

FTA वार्ताओं में payment systems के तालमेल पर जोर दे रहा भारत: Rajesh Agrawal

मुंबई, नौ सितंबर वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने बुधवार को कहा कि भारत मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) के लिए बातचीत के दौरान अपने व्यापार साझेदारों के साथ भुगतान प्रणालियों के बीच तालमेल और एकरूपता पर चर्चा करता है। यह चर्चा उन देशों के साथ विशेष रूप से की जाती है, जहां प्रवासी भारतीयों की बड़ी आबादी है। उन्होंने वैश्विक फिनटेक सम्मेलन में एक सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि मुक्त व्यापार समझौतों के तहत बातचीत का एक प्रमुख क्षेत्र सेवाओं का व्यापार है।

अग्रवाल ने कहा कि पिछले पांच वर्षों में भारत ने नौ व्यापार समझौतों को अंतिम रूप दिए हैं, जिनमें दुनिया की 60,000 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था शामिल है। ये समझौते भारतीय वस्तुओं और सेवाओं के लिए बड़े अवसर सृजित करते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘हम जिस भी मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत करते हैं, उसमें इस बात पर भी चर्चा होती है कि हम अपनी भुगतान प्रणालियों को किस तरह एक-दूसरे के अनुरूप और परस्पर जुड़ने योग्य बना सकते हैं, खासकर उन देशों में जहां भारतीय प्रवासियों की बड़ी आबादी है।”
उन्होंने कहा कि इन समझौतों के तहत भारत जहां साझेदार देशों के बैंकों को यहां आने की अनुमति दे रहा है, वहीं भारतीय बैंकों के लिए भी उन देशों में काम करने के अवसर तलाश रहा है।

वाणिज्य सचिव ने संबंधित पक्षों से नीतिगत स्तर पर सुझाव मांगे, ताकि घरेलू नवोन्मेष आधारित कंपनियों और उद्यमियों के लिए दुनिया भर में वित्तीय प्रौद्योगिकी से जुड़ी सेवाएं और समाधान उपलब्ध कराने का बेहतर रास्ता तैयार किया जा सके। उन्होंने कहा, ‘‘वित्तीय प्रौद्योगिकी से जुड़ी सेवाओं का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है और यदि भारत इसमें केवल 10 प्रतिशत हिस्सेदारी भी हासिल कर लेता है, तो यह आठ अरब डॉलर से बढ़कर 60-80 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।’’
अग्रवाल के अनुसार, सरकार समझती है कि वित्तीय प्रौद्योगिकी का पूरा तंत्र अलग-अलग हिस्सों में काम नहीं करता। किसी डिजिटल भुगतान उपकरण में एक साथ वित्तीय नियमन, दूरसंचार, दूरसंचार से जुड़ा बुनियादी ढांचा, क्लाउड व्यवस्था, आंकड़ों का प्रवाह, साइबर सुरक्षा, कृत्रिम मेधा में निवेश और पेशेवरों की आवाजाही जैसे कई क्षेत्र शामिल होते हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘मुक्त व्यापार समझौतों के दौरान सरकार इन सभी क्षेत्रों में यथासंभव बाधाओं को दूर करने का प्रयास करती है। हालांकि, नियमों में तालमेल बैठाना और उन्हें सही दिशा में आगे बढ़ाना सबसे कठिन काम है।’’
वाणिज्य सचिव ने वित्तीय प्रौद्योगिकी कंपनियों को सलाह दी कि वे उन देशों के साथ मिलकर काम करें जो वित्तीय समावेश, भुगतान, छोटे कारोबार के लिए वित्त, सार्वजनिक सेवाओं की आपूर्ति और व्यापार वित्त के क्षेत्र में भारत जैसी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। अग्रवाल ने कहा, ‘‘अपने अनुभव के आधार पर मिलकर समान या बेहतर समाधान तैयार करना आगे बढ़ने का रास्ता है।’’
अग्रवाल ने कहा कि सरकार सेवाओं के निर्यात को बढ़ावा देने और उसका विस्तार करने के लिए संस्थागत माध्यम तैयार करने पर काम कर रही है।

इस दिशा में गुजरात की गिफ्ट सिटी स्थित अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में उभर रहा है।

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