मेरठ की रेवड़ी और गजक अब छोटे कारोबार तक सीमित नहीं रहेगी। सरकार ने इस पारंपरिक कारोबार को बढ़ावा देने के लिए ओडीओसी वित्तपोषण सहायता योजना शुरू की है। इसके तहत रेवड़ी-गजक का कारोबार करने वाले लोग नई यूनिट लगा सकते हैं या पहले से चल रही इकाई का विस्तार कर सकते हैं। परियोजना के हिसाब से सरकार 50 लाख रुपए तक की सब्सिडी देगी। योजना से कारोबारियों को मशीनरी लगाने, उत्पादन बढ़ाने और पैकेजिंग को बेहतर करने में मदद मिलेगी। इससे मेरठ की रेवड़ी-गजक को बड़े बाजार तक पहुंचाने का रास्ता भी आसान होगा। योजना का संचालन जिला उद्योग प्रोत्साहन तथा उद्यमिता विकास केंद्र के माध्यम से किया जा रहा है। पढ़ाई की शर्त नहीं, उम्र 18 साल जरूरी योजना का लाभ लेने के लिए किसी विशेष शैक्षणिक योग्यता की जरूरत नहीं है। आवेदक की उम्र कम से कम 18 साल होनी चाहिए। आवेदक या परिवार के किसी सदस्य को योजना का लाभ सिर्फ एक बार मिलेगा। साथ ही आवेदक या परिवार के सदस्य ने पहले किसी दूसरी सरकारी स्वरोजगार योजना का लाभ नहीं लिया होना चाहिए। ऐसे मिलेगी सब्सिडी परियोजना की लागत के अनुसार सब्सिडी तय होगी। 25 लाख रुपए तक की परियोजना पर 25% या अधिकतम 6.25 लाख रुपए मिलेंगे। 25 से 50 लाख रुपए की परियोजना पर 10% या अधिकतम 6.25 लाख रुपए की सब्सिडी होगी। 50 लाख से 1.5 करोड़ रुपए तक की परियोजना पर 20% या अधिकतम 10 लाख रुपए और 1.5 करोड़ रुपए से अधिक की परियोजना पर 10% या अधिकतम 50 लाख रुपए तक की सब्सिडी मिलेगी। सामान्य वर्ग को 10%, अन्य श्रेणियों को 5% लगाना होगा उपायुक्त उद्योग अमरेश कुमार पांडे ने बताया कि सामान्य वर्ग के लाभार्थी को परियोजना लागत का 10% स्वयं लगाना होगा। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, ओबीसी, अल्पसंख्यक, महिला और दिव्यांग लाभार्थियों के लिए यह अंशदान 5% रखा गया है। सरकार की इस पहल से मेरठ के पारंपरिक रेवड़ी-गजक कारोबार को आधुनिक रूप देने, उत्पादन क्षमता बढ़ाने और नए रोजगार पैदा करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

