पश्चिम अफ्रीका में 3 महीने से फंसा मुजफ्फरपुर का मजदूर:पत्नी से कहा- 60 की जगह 30 हजार दे रहे सैलरी; इनकार पर पासपोर्ट वीजा जब्त

पश्चिम अफ्रीका में 3 महीने से फंसा मुजफ्फरपुर का मजदूर:पत्नी से कहा- 60 की जगह 30 हजार दे रहे सैलरी; इनकार पर पासपोर्ट वीजा जब्त

पश्चिमी अफ्रीकी देश सेनेगल की राजधानी डकार में काम करने गया कुढ़नी का उमाशंकर कुमार कथित तौर पर कंपनी मालिक के चंगुल में फंस गया है। कुढ़नी थाना क्षेत्र के कोठियां गांव निवासी उमाशंकर का आरोप है कि कंपनी मालिक ने उसका पासपोर्ट और वीजा अपने पास रख लिया है। वेतन नहीं देने और घर वापस लौटने की बात कहने पर मारपीट तथा जेल भेजने की धमकी दी जा रही है। परिजनों के मुताबिक, उमाशंकर से रोजाना करीब 12 घंटे काम कराया जा रहा है। पति की स्थिति से चिंतित पत्नी चांदनी देवी ने केंद्रीय मंत्री सह सांसद डॉ. राजभूषण निषाद और विदेश मंत्रालय को पत्र भेजकर हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने पति को सुरक्षित भारत वापस लाने की गुहार लगाई है। 60 हजार वेतन के वादे पर गया था सेनेगल उमाशंकर के अनुसार, उन्हें सेनेगल की राजधानी डकार स्थित एक हेचरी कंपनी में काम करने के लिए 60 हजार रुपए प्रतिमाह वेतन देने की बात कही गई थी। इसी भरोसे पर वह 17 मई को सेनेगल पहुंचे। वहां पहुंचने के बाद कंपनी मालिक ने कथित तौर पर 30 हजार रुपए प्रतिमाह वेतन का एग्रीमेंट कराया। उमाशंकर का कहना है कि वह 19 मई से हेचरी में काम कर रहे हैं। कंपनी मालिक ने उनका पासपोर्ट और वीजा अपने पास रख लिया है। कई बार घर लौटने की इच्छा जताने के बावजूद उन्हें जाने की अनुमति नहीं दी जा रही है। बीमारी में भी 12 घंटे काम कराने का आरोप उमाशंकर ने दैनिक भास्कर से व्हाट्सएप पर बातचीत में आरोप लगाया कि उनसे प्रतिदिन करीब 12 घंटे काम कराया जा रहा है। स्वास्थ्य खराब होने के बावजूद काम करने का दबाव बनाया जाता है। उनका यह भी आरोप है कि कंपनी की ओर से खाने-पीने की व्यवस्था ठीक नहीं है। उन्होंने बताया कि कंपनी में मोबाइल से बात करने पर भी रोक है। वह किसी तरह छिपकर अपने परिवार से संपर्क कर पा रहे हैं। बातचीत के दौरान उन्होंने खुद को काफी डरा-सहमा बताया और कंपनी से निकलकर भारत लौटने की इच्छा जताई। बेटी की शादी फरवरी में, परिवार परेशान उमाशंकर ने बताया कि उनकी बेटी की शादी अगले साल फरवरी में तय है। वह परिवार के इकलौते कमाऊ सदस्य हैं। ऐसे में उनके विदेश में फंसे होने से परिवार की आर्थिक परेशानी भी बढ़ गई है। पत्नी चांदनी देवी और बेटी किसी अनहोनी की आशंका को लेकर चिंतित हैं। उमाशंकर ने बातचीत में कहा कि वह मौजूदा परिस्थितियों से बेहद परेशान हैं और कभी-कभी आत्महत्या तक के विचार आने की बात कही। उनके इस बयान से परिवार की चिंता और बढ़ गई है। दूतावास से मदद की उम्मीद उमाशंकर के अनुसार, इससे पहले भी भारत के कुछ युवक सेनेगल में फंसे थे, जिन्हें भारतीय दूतावास की मदद से वहां से निकाला गया था। उन्होंने भी दूतावास और भारत सरकार से सहायता की उम्मीद जताई है। पत्नी की ओर से केंद्र सरकार से गुहार लगाए जाने के साथ ही भाजपा नेता मनीष कुमार पप्पू और समाजसेवी शुभम महतो ने भी केंद्रीय मंत्री एवं विदेश मंत्रालय से मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। परिजनों का कहना है कि उमाशंकर के पासपोर्ट और वीजा कंपनी के पास होने के कारण वह अपनी इच्छा से भारत नहीं लौट पा रहे हैं। फिलहाल परिवार की नजर केंद्र सरकार और विदेश मंत्रालय की कार्रवाई पर है। परिजन चाहते हैं कि संबंधित भारतीय मिशन से संपर्क कर उमाशंकर की स्थिति की जांच कराई जाए और उन्हें सुरक्षित भारत वापस लाने की व्यवस्था की जाए। पश्चिमी अफ्रीकी देश सेनेगल की राजधानी डकार में काम करने गया कुढ़नी का उमाशंकर कुमार कथित तौर पर कंपनी मालिक के चंगुल में फंस गया है। कुढ़नी थाना क्षेत्र के कोठियां गांव निवासी उमाशंकर का आरोप है कि कंपनी मालिक ने उसका पासपोर्ट और वीजा अपने पास रख लिया है। वेतन नहीं देने और घर वापस लौटने की बात कहने पर मारपीट तथा जेल भेजने की धमकी दी जा रही है। परिजनों के मुताबिक, उमाशंकर से रोजाना करीब 12 घंटे काम कराया जा रहा है। पति की स्थिति से चिंतित पत्नी चांदनी देवी ने केंद्रीय मंत्री सह सांसद डॉ. राजभूषण निषाद और विदेश मंत्रालय को पत्र भेजकर हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने पति को सुरक्षित भारत वापस लाने की गुहार लगाई है। 60 हजार वेतन के वादे पर गया था सेनेगल उमाशंकर के अनुसार, उन्हें सेनेगल की राजधानी डकार स्थित एक हेचरी कंपनी में काम करने के लिए 60 हजार रुपए प्रतिमाह वेतन देने की बात कही गई थी। इसी भरोसे पर वह 17 मई को सेनेगल पहुंचे। वहां पहुंचने के बाद कंपनी मालिक ने कथित तौर पर 30 हजार रुपए प्रतिमाह वेतन का एग्रीमेंट कराया। उमाशंकर का कहना है कि वह 19 मई से हेचरी में काम कर रहे हैं। कंपनी मालिक ने उनका पासपोर्ट और वीजा अपने पास रख लिया है। कई बार घर लौटने की इच्छा जताने के बावजूद उन्हें जाने की अनुमति नहीं दी जा रही है। बीमारी में भी 12 घंटे काम कराने का आरोप उमाशंकर ने दैनिक भास्कर से व्हाट्सएप पर बातचीत में आरोप लगाया कि उनसे प्रतिदिन करीब 12 घंटे काम कराया जा रहा है। स्वास्थ्य खराब होने के बावजूद काम करने का दबाव बनाया जाता है। उनका यह भी आरोप है कि कंपनी की ओर से खाने-पीने की व्यवस्था ठीक नहीं है। उन्होंने बताया कि कंपनी में मोबाइल से बात करने पर भी रोक है। वह किसी तरह छिपकर अपने परिवार से संपर्क कर पा रहे हैं। बातचीत के दौरान उन्होंने खुद को काफी डरा-सहमा बताया और कंपनी से निकलकर भारत लौटने की इच्छा जताई। बेटी की शादी फरवरी में, परिवार परेशान उमाशंकर ने बताया कि उनकी बेटी की शादी अगले साल फरवरी में तय है। वह परिवार के इकलौते कमाऊ सदस्य हैं। ऐसे में उनके विदेश में फंसे होने से परिवार की आर्थिक परेशानी भी बढ़ गई है। पत्नी चांदनी देवी और बेटी किसी अनहोनी की आशंका को लेकर चिंतित हैं। उमाशंकर ने बातचीत में कहा कि वह मौजूदा परिस्थितियों से बेहद परेशान हैं और कभी-कभी आत्महत्या तक के विचार आने की बात कही। उनके इस बयान से परिवार की चिंता और बढ़ गई है। दूतावास से मदद की उम्मीद उमाशंकर के अनुसार, इससे पहले भी भारत के कुछ युवक सेनेगल में फंसे थे, जिन्हें भारतीय दूतावास की मदद से वहां से निकाला गया था। उन्होंने भी दूतावास और भारत सरकार से सहायता की उम्मीद जताई है। पत्नी की ओर से केंद्र सरकार से गुहार लगाए जाने के साथ ही भाजपा नेता मनीष कुमार पप्पू और समाजसेवी शुभम महतो ने भी केंद्रीय मंत्री एवं विदेश मंत्रालय से मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। परिजनों का कहना है कि उमाशंकर के पासपोर्ट और वीजा कंपनी के पास होने के कारण वह अपनी इच्छा से भारत नहीं लौट पा रहे हैं। फिलहाल परिवार की नजर केंद्र सरकार और विदेश मंत्रालय की कार्रवाई पर है। परिजन चाहते हैं कि संबंधित भारतीय मिशन से संपर्क कर उमाशंकर की स्थिति की जांच कराई जाए और उन्हें सुरक्षित भारत वापस लाने की व्यवस्था की जाए।  

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