कानपुर के अहिरवा के सुरक्षा विहार में मंगलवार शाम 6:30 बजे विशाल श्री शिव महापुराण कथा का आयोजन हुआ। कथा के सातवें दिन कथा व्यास आदि गुरु प्रशांत प्रभु महाराज ने कुबेर देव की तपस्या और भगवान शिव की महिमा का प्रसंग सुनाया। इसे सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो गए। महाराज श्री ने बताया कि कुबेर देव अपने पिछले जन्म में ब्राह्मण देवदत्त के बेटे गुणनिधि थे। गलत संगत के कारण उन्होंने अपना जीवन खराब कर लिया था। उनके पिता ने उन्हें घर से निकाल दिया था। महाराज श्री ने आगे बताया कि एक बार गुणनिधि आधी रात को अन्न चोरी करने के लिए शिवालय पहुंचा। मंदिर के अंदर अंधेरा था, तो उसने अपने कपड़े का एक टुकड़ा जलाकर रोशनी की। अनजाने में किया गया यह दीपदान भगवान शिव को बहुत पसंद आया। मृत्यु के बाद उसे शिवलोक मिला। राजा ने उसे मौत की सजा दी थी, फिर भी शिव की कृपा से उसका उद्धार हो गया। पिछले जन्म में अनजाने में किए गए दीपदान के पुण्य से उसे कलिंग का राजा बनने का मौका मिला। इसके बाद उसने विशेषसर्वा के बेटे के रूप में जन्म लिया। उसने अपने पिता से शिव भक्ति का मंत्र सीखा। फिर वह काशी जाकर भगवान शिव की कठिन तपस्या करने लगा। उसकी तपस्या से खुश होकर भगवान शिव ने उसे कुबेर का पद दिया। महाराज श्री ने कहा कि भगवान शिव की कृपा कब और किस रूप में मिल जाए, यह कोई नहीं बता सकता। कथा में माता पार्वती की कठिन तपस्या और भगवान शिव की बारात का भी सुंदर वर्णन किया गया। जब महाराज श्री ने “भोलेनाथ की देख जटा, मेरा मन हो गयो लटा-पटा” भजन सुनाया, तो पूरा कथा पंडाल भक्ति में डूब गया। श्रद्धालु जमकर नाचने लगे। इस कथा में महेश वर्मा, रजत पांडे, पंकज पांडे, अभय गुप्ता, अश्विनी कुशवाहा, ब्रजलाल कुशवाहा, कुसुम सिंह, प्रभाकर, उदयवीर सिंह, अंकुश यादव, आनंद पांडे, मनोज कुमार शुक्ला और मनोज पांडेय समेत कई श्रद्धालु मौजूद थे।

