‘चरित्र निर्माण ही राष्ट्र निर्माण की पहली कड़ी’:डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विवि में दीक्षारंभ कार्यक्रम, नित्यानंद राय ने छात्रों से किया संवाद

‘चरित्र निर्माण ही राष्ट्र निर्माण की पहली कड़ी’:डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विवि में दीक्षारंभ कार्यक्रम, नित्यानंद राय ने छात्रों से किया संवाद

समस्तीपुर के डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने नए छात्रों के साथ दीक्षारंभ कार्यक्रम के दौरान संवाद किया। छात्रों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों का चरित्र निर्माण ही राष्ट्र निर्माण की पहली और सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। उन्होंने कहा कि जब शैक्षणिक डिग्री के साथ-साथ छात्र में संस्कार, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति का भाव विकसित होता है, तभी वह सच्चा शिक्षित कहलाता है। मैं अक्सर देश भर के विश्वविद्यालयों और पुलिस अकादमियों के दीक्षांत समारोहों में जाता रहा हूं, लेकिन किसी ‘दीक्षारंभ’ कार्यक्रम में संबोधन का यह पहला अवसर है। उन्होंने कहा, “पूसा कृषि विवि अनुसंधान की मातृभूमि तो रहा ही है, अब यह दीक्षारंभ की भी जननी बन गया है।” उन्होंने कुलपति डॉ. पी. एस. पांडेय की इस अनूठी और दूरदर्शी पहल की सराहना की। मॉड्यूल विशिष्ट उद्देश्य के साथ तैयार हुआ राय ने कहा कि शिक्षण संस्थानों में सामान्य ओरिएंटेशन प्रोग्राम होते हैं, लेकिन 2022 में डॉ. पांडेय की ओ से शुरू किया गया ‘दीक्षारंभ’ बेहद खास है। इस 21 दिवसीय विस्तृत कार्यक्रम का प्रत्येक मॉड्यूल विशिष्ट उद्देश्य के साथ तैयार किया गया है। इसमें योग, डाइनिंग शिष्टाचार, संचार कौशल, व्यक्तित्व विकास, मिथिला पेंटिंग, गायन, नाटक, वाकपटुता, वाद-विवाद, मॉक पार्लियामेंट और महान हस्तियों के साथ सीधे संवाद को बारीकी से शामिल किया गया है। मंत्री ने रेखांकित किया कि इस कार्यक्रम की सफलता को देखते हुए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने इसे साल 2023 से सभी कृषि विश्वविद्यालयों में और 2025 से देश के सभी सामान्य विश्वविद्यालयों में अनिवार्य कर दिया है। ‘विश्वविद्यालय का उद्देश्य केवल डिग्रियां बांटना नहीं’ समारोह में अतिथियों का स्वागत करते हुए कुलपति डॉ. पी. एस. पांडेय ने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य केवल डिग्रियां बांटना नहीं, बल्कि सक्षम, योग्य और राष्ट्रभक्त युवा तैयार करना है। डॉ. पांडेय ने बताया कि आईसीएआर में सहायक महानिदेशक रहते हुए इजरायल यात्रा के दौरान उन्होंने इस 21 दिवसीय मॉडल की रूपरेखा गढ़ी थी, जिसे कुलपति बनते ही पूसा में लागू किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के सभी अधिष्ठाता, निदेशक, प्राध्यापक और विभिन्न संकायों के 343 नव-प्रवेशित स्नातक छात्र उपस्थित रहे। समस्तीपुर के डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने नए छात्रों के साथ दीक्षारंभ कार्यक्रम के दौरान संवाद किया। छात्रों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों का चरित्र निर्माण ही राष्ट्र निर्माण की पहली और सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। उन्होंने कहा कि जब शैक्षणिक डिग्री के साथ-साथ छात्र में संस्कार, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति का भाव विकसित होता है, तभी वह सच्चा शिक्षित कहलाता है। मैं अक्सर देश भर के विश्वविद्यालयों और पुलिस अकादमियों के दीक्षांत समारोहों में जाता रहा हूं, लेकिन किसी ‘दीक्षारंभ’ कार्यक्रम में संबोधन का यह पहला अवसर है। उन्होंने कहा, “पूसा कृषि विवि अनुसंधान की मातृभूमि तो रहा ही है, अब यह दीक्षारंभ की भी जननी बन गया है।” उन्होंने कुलपति डॉ. पी. एस. पांडेय की इस अनूठी और दूरदर्शी पहल की सराहना की। मॉड्यूल विशिष्ट उद्देश्य के साथ तैयार हुआ राय ने कहा कि शिक्षण संस्थानों में सामान्य ओरिएंटेशन प्रोग्राम होते हैं, लेकिन 2022 में डॉ. पांडेय की ओ से शुरू किया गया ‘दीक्षारंभ’ बेहद खास है। इस 21 दिवसीय विस्तृत कार्यक्रम का प्रत्येक मॉड्यूल विशिष्ट उद्देश्य के साथ तैयार किया गया है। इसमें योग, डाइनिंग शिष्टाचार, संचार कौशल, व्यक्तित्व विकास, मिथिला पेंटिंग, गायन, नाटक, वाकपटुता, वाद-विवाद, मॉक पार्लियामेंट और महान हस्तियों के साथ सीधे संवाद को बारीकी से शामिल किया गया है। मंत्री ने रेखांकित किया कि इस कार्यक्रम की सफलता को देखते हुए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने इसे साल 2023 से सभी कृषि विश्वविद्यालयों में और 2025 से देश के सभी सामान्य विश्वविद्यालयों में अनिवार्य कर दिया है। ‘विश्वविद्यालय का उद्देश्य केवल डिग्रियां बांटना नहीं’ समारोह में अतिथियों का स्वागत करते हुए कुलपति डॉ. पी. एस. पांडेय ने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य केवल डिग्रियां बांटना नहीं, बल्कि सक्षम, योग्य और राष्ट्रभक्त युवा तैयार करना है। डॉ. पांडेय ने बताया कि आईसीएआर में सहायक महानिदेशक रहते हुए इजरायल यात्रा के दौरान उन्होंने इस 21 दिवसीय मॉडल की रूपरेखा गढ़ी थी, जिसे कुलपति बनते ही पूसा में लागू किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के सभी अधिष्ठाता, निदेशक, प्राध्यापक और विभिन्न संकायों के 343 नव-प्रवेशित स्नातक छात्र उपस्थित रहे।  

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