MLC चुनाव पर जन सुराज ने उठाए सवाल:प्रदेश अध्यक्ष बोले- चुनाव आयोग खुद तैयार करे मतदाता सूची, राजनीतिक दलों को प्रचार का समय मिलेगा

MLC चुनाव पर जन सुराज ने उठाए सवाल:प्रदेश अध्यक्ष बोले- चुनाव आयोग खुद तैयार करे मतदाता सूची, राजनीतिक दलों को प्रचार का समय मिलेगा

बिहार में प्रस्तावित शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के MLC चुनाव से पहले मतदाता सूची को लेकर जन सुराज ने सवाल खड़ा किया है। जन सुराज पार्टी ने MLC चुनाव की मतदाता सूची तैयार करने की मौजूदा प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए चुनाव आयोग से इसमें बदलाव की मांग की है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती ने कहा कि जिस तरह लोकसभा और विधानसभा चुनाव के लिए मतदाता सूची चुनाव आयोग स्वयं तैयार करता है, उसी तरह शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के MLC चुनाव की मतदाता सूची भी आयोग को ही तैयार करनी चाहिए। चार शिक्षक और चार स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में होने हैं चुनाव पाटलिपुत्रा कॉलोनी स्थित जन सुराज पार्टी कार्यालय में प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती ने यह मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि बिहार में चार स्नातक और चार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के लिए आने वाले एक-दो महीनों में MLC चुनाव प्रस्तावित हैं। उन्होंने कहा कि इन निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाता सूची तैयार करने की मौजूदा व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने बताया कि चुनाव प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची से संबंधित एक निर्धारित समयसीमा तय की गई थी। इसके आधार पर 15 नवंबर 2025 तक आवेदन एवं मतदाता सूची से जुड़ी प्रक्रिया पूरी की जानी थी। इसके बाद 31 दिसंबर 2025 तक मतदाता सूची की घोषणा की गई। MLC चुनाव की सूची भी आयोग तैयार करे- मनोज भारती जन सुराज प्रदेश अध्यक्ष ने कहा, विधानसभा और लोकसभा चुनाव के दौरान चुनाव आयोग के अधिकारी घर-घर और क्षेत्रवार मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया पूरी करते हैं। ऐसे में MLC चुनाव के लिए भी आयोग के पास आवश्यक व्यवस्था मौजूद है। उन्होंने सुझाव दिया कि मतदाता सूची तैयार करने के दौरान एक अतिरिक्त कॉलम जोड़ा जा सकता है, जिसके माध्यम से यह दर्ज किया जाए कि संबंधित मतदाता स्नातक है या शिक्षक। इसके आधार पर शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के लिए अलग-अलग मतदाता सूची तैयार की जा सकती है। मनोज भारती ने कहा कि यदि चुनाव आयोग खुद मतदाता सूची तैयार कर समय रहते प्रकाशित कर दे, तो सभी राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों को चुनाव की तैयारी के लिए समान अवसर मिलेगा। केंद्रीय चुनाव आयोग से प्रक्रिया बदलने की मांग मनोज भारती ने कहा कि यह मुद्दा पहले भी बिहार चुनाव आयोग के अधिकारियों और मुख्य निर्वाचन अधिकारी के सामने रखा गया था। वहां से बताया गया कि इस संबंध में नीति केंद्र स्तर पर तय होती है। उन्होंने केंद्रीय चुनाव आयोग से मांग की कि देश में जहां भी शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के MLC चुनाव होते हैं, वहां संबंधित राज्य की चुनावी इकाइयों को मतदाता सूची स्वयं तैयार करने का निर्देश दिया जाए। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची समय पर प्रकाशित होने से उम्मीदवारों और राजनीतिक दलों को प्रचार-प्रसार एवं चुनावी तैयारी के लिए पर्याप्त समय मिलेगा, जैसा विधानसभा और लोकसभा चुनावों के दौरान होता है। कुमार सौरभ बोले- मतदाता सूची में गड़बड़ी की जानकारी सामने आई जन सुराज के राष्ट्रीय प्रवक्ता कुमार सौरभ ने कहा कि बिहार के चार शिक्षक और चार स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में विधान परिषद सदस्यों के चुनाव होने हैं और इसकी अधिसूचना भी जल्द जारी होने की संभावना है। उन्होंने कहा कि जन सुराज पार्टी भी जल्द अपने उम्मीदवारों के नाम की घोषणा करेगी। कुमार सौरभ ने दावा किया कि पार्टी के पास अलग-अलग जगहों से MLC मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों से संबंधित जानकारियां सामने आई हैं। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि जन सुराज सीधे तौर पर यह आरोप नहीं लगा रहा है कि मतदाता सूची में जानबूझकर गड़बड़ी की गई है। यदि मतदाता सूची को लेकर कोई शिकायत या संदेह सामने आता है तो उसकी जांच करना मुख्य निर्वाचन अधिकारी और संबंधित चुनावी संस्थाओं की जिम्मेदारी है। ‘मतदाता सूची की शुचिता लोकतंत्र का पहला आधार’ कुमार सौरभ ने कहा कि भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था का मूल सिद्धांत एक व्यक्ति और एक वोट का अधिकार है। ऐसे में अलग-अलग चुनावों के लिए अलग-अलग मतदाता सूची बनाए जाने की व्यवस्था पर व्यापक चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पंचायत चुनाव, नगर परिषद, नगर निगम, विधानसभा और लोकसभा चुनावों के लिए अलग-अलग मतदाता सूचियां बनाई जाती हैं। इसके कारण अलग-अलग चुनावों में मतदाताओं की संख्या भी अलग-अलग दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची की शुचिता और पारदर्शिता लोकतंत्र का पहला आधार है। यदि मतदाता सूची की विश्वसनीयता को लेकर सवाल उठते हैं, तो इसका असर पूरी लोकतांत्रिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर पड़ सकता है। जन सुराज ने उठाई ‘वन नेशन, वन इलेक्शन रोल’ की मांग कुमार सौरभ ने इस दौरान ‘वन नेशन, वन इलेक्शन रोल’ की अवधारणा का समर्थन किया। जब एक व्यक्ति को मतदान का एक अधिकार प्राप्त है, तो अलग-अलग चुनावों के लिए अलग-अलग मतदाता सूचियों की जगह एक समन्वित और पारदर्शी चुनावी सूची पर विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पंचायत से लेकर नगर निकाय, विधानसभा और लोकसभा तक अलग-अलग मतदाता सूचियों की व्यवस्था के कारण कई तरह की विसंगतियां सामने आने की संभावना रहती है। इसलिए एक समान और अद्यतन चुनावी रोल तैयार करने पर राष्ट्रीय स्तर पर बहस होनी चाहिए। बिहार में प्रस्तावित शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के MLC चुनाव से पहले मतदाता सूची को लेकर जन सुराज ने सवाल खड़ा किया है। जन सुराज पार्टी ने MLC चुनाव की मतदाता सूची तैयार करने की मौजूदा प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए चुनाव आयोग से इसमें बदलाव की मांग की है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती ने कहा कि जिस तरह लोकसभा और विधानसभा चुनाव के लिए मतदाता सूची चुनाव आयोग स्वयं तैयार करता है, उसी तरह शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के MLC चुनाव की मतदाता सूची भी आयोग को ही तैयार करनी चाहिए। चार शिक्षक और चार स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में होने हैं चुनाव पाटलिपुत्रा कॉलोनी स्थित जन सुराज पार्टी कार्यालय में प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती ने यह मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि बिहार में चार स्नातक और चार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के लिए आने वाले एक-दो महीनों में MLC चुनाव प्रस्तावित हैं। उन्होंने कहा कि इन निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाता सूची तैयार करने की मौजूदा व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने बताया कि चुनाव प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची से संबंधित एक निर्धारित समयसीमा तय की गई थी। इसके आधार पर 15 नवंबर 2025 तक आवेदन एवं मतदाता सूची से जुड़ी प्रक्रिया पूरी की जानी थी। इसके बाद 31 दिसंबर 2025 तक मतदाता सूची की घोषणा की गई। MLC चुनाव की सूची भी आयोग तैयार करे- मनोज भारती जन सुराज प्रदेश अध्यक्ष ने कहा, विधानसभा और लोकसभा चुनाव के दौरान चुनाव आयोग के अधिकारी घर-घर और क्षेत्रवार मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया पूरी करते हैं। ऐसे में MLC चुनाव के लिए भी आयोग के पास आवश्यक व्यवस्था मौजूद है। उन्होंने सुझाव दिया कि मतदाता सूची तैयार करने के दौरान एक अतिरिक्त कॉलम जोड़ा जा सकता है, जिसके माध्यम से यह दर्ज किया जाए कि संबंधित मतदाता स्नातक है या शिक्षक। इसके आधार पर शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के लिए अलग-अलग मतदाता सूची तैयार की जा सकती है। मनोज भारती ने कहा कि यदि चुनाव आयोग खुद मतदाता सूची तैयार कर समय रहते प्रकाशित कर दे, तो सभी राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों को चुनाव की तैयारी के लिए समान अवसर मिलेगा। केंद्रीय चुनाव आयोग से प्रक्रिया बदलने की मांग मनोज भारती ने कहा कि यह मुद्दा पहले भी बिहार चुनाव आयोग के अधिकारियों और मुख्य निर्वाचन अधिकारी के सामने रखा गया था। वहां से बताया गया कि इस संबंध में नीति केंद्र स्तर पर तय होती है। उन्होंने केंद्रीय चुनाव आयोग से मांग की कि देश में जहां भी शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के MLC चुनाव होते हैं, वहां संबंधित राज्य की चुनावी इकाइयों को मतदाता सूची स्वयं तैयार करने का निर्देश दिया जाए। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची समय पर प्रकाशित होने से उम्मीदवारों और राजनीतिक दलों को प्रचार-प्रसार एवं चुनावी तैयारी के लिए पर्याप्त समय मिलेगा, जैसा विधानसभा और लोकसभा चुनावों के दौरान होता है। कुमार सौरभ बोले- मतदाता सूची में गड़बड़ी की जानकारी सामने आई जन सुराज के राष्ट्रीय प्रवक्ता कुमार सौरभ ने कहा कि बिहार के चार शिक्षक और चार स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में विधान परिषद सदस्यों के चुनाव होने हैं और इसकी अधिसूचना भी जल्द जारी होने की संभावना है। उन्होंने कहा कि जन सुराज पार्टी भी जल्द अपने उम्मीदवारों के नाम की घोषणा करेगी। कुमार सौरभ ने दावा किया कि पार्टी के पास अलग-अलग जगहों से MLC मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों से संबंधित जानकारियां सामने आई हैं। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि जन सुराज सीधे तौर पर यह आरोप नहीं लगा रहा है कि मतदाता सूची में जानबूझकर गड़बड़ी की गई है। यदि मतदाता सूची को लेकर कोई शिकायत या संदेह सामने आता है तो उसकी जांच करना मुख्य निर्वाचन अधिकारी और संबंधित चुनावी संस्थाओं की जिम्मेदारी है। ‘मतदाता सूची की शुचिता लोकतंत्र का पहला आधार’ कुमार सौरभ ने कहा कि भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था का मूल सिद्धांत एक व्यक्ति और एक वोट का अधिकार है। ऐसे में अलग-अलग चुनावों के लिए अलग-अलग मतदाता सूची बनाए जाने की व्यवस्था पर व्यापक चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पंचायत चुनाव, नगर परिषद, नगर निगम, विधानसभा और लोकसभा चुनावों के लिए अलग-अलग मतदाता सूचियां बनाई जाती हैं। इसके कारण अलग-अलग चुनावों में मतदाताओं की संख्या भी अलग-अलग दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची की शुचिता और पारदर्शिता लोकतंत्र का पहला आधार है। यदि मतदाता सूची की विश्वसनीयता को लेकर सवाल उठते हैं, तो इसका असर पूरी लोकतांत्रिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर पड़ सकता है। जन सुराज ने उठाई ‘वन नेशन, वन इलेक्शन रोल’ की मांग कुमार सौरभ ने इस दौरान ‘वन नेशन, वन इलेक्शन रोल’ की अवधारणा का समर्थन किया। जब एक व्यक्ति को मतदान का एक अधिकार प्राप्त है, तो अलग-अलग चुनावों के लिए अलग-अलग मतदाता सूचियों की जगह एक समन्वित और पारदर्शी चुनावी सूची पर विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पंचायत से लेकर नगर निकाय, विधानसभा और लोकसभा तक अलग-अलग मतदाता सूचियों की व्यवस्था के कारण कई तरह की विसंगतियां सामने आने की संभावना रहती है। इसलिए एक समान और अद्यतन चुनावी रोल तैयार करने पर राष्ट्रीय स्तर पर बहस होनी चाहिए।  

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