दिव्यांग विधवा महिला जर्जर मकान में रहने को मजबूर:छत का हिस्सा गिरा, बेटी के साथ सुरक्षित घर के लिए प्रशासन से मांगी मदद

दिव्यांग विधवा महिला जर्जर मकान में रहने को मजबूर:छत का हिस्सा गिरा, बेटी के साथ सुरक्षित घर के लिए प्रशासन से मांगी मदद

बागपत में एक दिव्यांग और विधवा महिला ने प्रशासन से आर्थिक मदद की गुहार लगाई है। महिला अपने जर्जर मकान की हालत सुधारना चाहती है। उसने तहसील दिवस में प्रार्थना पत्र देकर नया मकान बनवाने या मरम्मत के लिए सहायता मांगी है। प्रार्थना पत्र के मुताबिक, आवेदिका का नाम सुलोचना है। वह स्वर्गीय सतपाल की पत्नी हैं और बागपत के अग्रवाल मंडी टटीरी के वार्ड नंबर एक में रहती हैं। सुलोचना दिव्यांग होने के साथ-साथ विधवा भी हैं। उनके परिवार में सिर्फ एक बेटी है, कोई बेटा नहीं है। उनकी आर्थिक स्थिति बहुत कमजोर है और आय का कोई स्थायी साधन नहीं है। सुलोचना ने बताया कि वह झाड़ू-पोछा का काम करके अपनी और बेटी का गुजारा करती हैं। उनके मकान में बिजली भी नहीं है। करीब एक साल पहले उनके मकान की छत का एक हिस्सा टूटकर गिर गया था। तब से वह अपनी बेटी के साथ इसी खराब और जर्जर मकान में रहने को मजबूर हैं। महिला ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान के लिए आवेदन भी किया था। हालांकि, उस पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इस जर्जर मकान में रहने के कारण सुलोचना और उनकी बेटी को हमेशा किसी अनहोनी का डर लगा रहता है। सुलोचना ने प्रशासन से अपील की है कि उनकी आर्थिक स्थिति को देखते हुए मदद की जाए। वह मकान की छत बनवाने या नया मकान पाने के लिए आर्थिक सहायता चाहती हैं। इससे वह अपनी बेटी के साथ सुरक्षित जीवन जी सकेंगी। अब देखना होगा कि प्रशासन इस शिकायत पर क्या कदम उठाता है।

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