Bhupen Hazarika Birth Anniversary: असम की मिट्टी से निकली एक ऐसी आवाज, जिसने भारत ही नहीं बल्कि दुनियाभर के संगीत प्रेमियों के दिलों में अपनी खास जगह बनाई। आवाज में मिठास, गीतों में समाज की चिंता। साथ ही अंदाज में अपनी मिट्टी से गहरा जुड़ाव… यह पहचान थी महान गायक, संगीतकार और फिल्मकार भूपेन हजारिका की। उन्हें प्यार से ‘सुधाकंठ’ कहा जाता था, जिसका अर्थ है अमृत जैसी आवाज वाला कलाकार।
असम के तिनसुकिया में भूपेन हजारिका का जन्म 8 सितंबर 1926 को हुआ था। उनका रिश्ता संगीत से बचपन में ही जुड़ गया था। भूपेन की मां शांतिप्रिया ने उन्हें पारंपरिक असमिया संगीत से परिचित कराया। यही संगीत आगे चलकर उनकी पहचान का हिस्सा बना। उनकी आवाज में असम की संस्कृति, वहां की मिट्टी और आम लोगों की जिंदगी की झलक साफ दिखाई देती थी।
भूपेन हजारिका की लव स्टोरी
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक भूपेन हजारिका ने मशहूर एक्ट्रेस कल्पना लाजमी से शादी की थी। उस समय भूपेन 45 साल के थे, जबकि कल्पना लाजमी की उम्र 17 साल थी। दोनों करीब 40 साल तक रिलेशनशिप में रहे। कल्पना लाजमी का 2017 में निधन हो गया था। वह लंबे समय से किडनी कैंसर से पीड़ित थीं।
दरअसल, बॉलीवुड की मशहूर एक्ट्रेस कल्पना लाजमी और महान गायक भूपेन हजारिका की प्रेम कहानी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं थी। दोनों के रिश्ते के बारे में दुनिया को उस वक्त विस्तार से पता चला, जब कल्पना लाजमी की आत्मकथा ‘भूपेन हजारिका: ऐज आई न्यू हिम’ रिलीज हुई। इस किताब के जरिए सामने आया कि कल्पना और भूपेन हजारिका करीब 40 साल तक रिलेशनशिप में रहे थे। अपनी आत्मकथा में कल्पना लाजमी ने भूपेन हजारिका के साथ पहली मुलाकात और अपने रिश्ते को लेकर कई बातें साझा की थीं। उन्होंने बताया था कि पहली मुलाकात के दौरान ही उनकी नजरें भूपेन हजारिका से मिलीं और उन्हें पहली नजर में प्यार हो गया। कल्पना ने लिखा था कि इस प्यार की झलक उन्होंने करीब 40 साल बाद भी भूपेन हजारिका की आंखों में देखी थी, जब उनके जीवन की रोशनी बुझने वाली थी।
उम्र के फासले के बावजूद बरकरार रहा प्यार
कल्पना लाजमी ने अपनी किताब में दोनों के रिश्ते को लेकर बताया कि उनके जीवन में जवानी से लेकर बुढ़ापे तक प्रेम और जुनून उसी तरह बना रहा। उम्र के 28 साल के अंतर के बावजूद उनका रिश्ता करीब 40 वर्षों तक कायम रहा।
1. महज 12 साल की उम्र में लिखे फिल्मों के गाने
भूपेन हजारिका ने महज 12 साल की उम्र में 2 फिल्मों के गाने लिखे थे। आगे चलकर उन्होंने करीब 1 हजार गाने और 15 किताबें लिखीं। उनकी आवाज और संगीत के जादू ने उन्हें अलग पहचान दिलाई। उन्होंने ‘रुदाली’, ‘साज’, ‘मिल गई मंजिल’, ‘मुझे’, ‘दरमियां’ और ‘गजगामिनी’ जैसी फिल्मों में संगीत दिया। उनके संगीत ने हिंदी सिनेमा में भी उन्हें खास पहचान दिलाई।
2. विदेश में पढ़ाई के बावजूद नहीं टूटा मिट्टी से रिश्ता
भूपेन हजारिका ने शुरुआती पढ़ाई गुवाहाटी में की। इसके बाद उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) से राजनीति विज्ञान की पढ़ाई की। आगे उन्हें अमेरिका की कोलंबिया यूनिवर्सिटी में पढ़ने का मौका मिला। विदेश में रहने के बावजूद उनकी जड़ें अपनी मिट्टी से कभी नहीं टूटीं। उनकी रचनाओं में आम आदमी, सामाजिक बराबरी और इंसानियत जैसे मुद्दे लगातार दिखाई देते रहे।
3. ऐसे मिला ‘सुधाकंठ’ का नाम
भूपेन हजारिका की आवाज में ऐसी गहराई और प्रभाव था, जिसने उन्हें बाकी कलाकारों से अलग पहचान दी। ‘सुधाकंठ’ की उपाधि उन्हें असम के प्रसिद्ध कवि आनंद चंद्र बरुआ से मिली थी। उनकी आवाज के लिए यह नाम बिल्कुल सटीक बैठता था। उनके गीतों में सिर्फ सुर और संगीत नहीं था, बल्कि समाज की आवाज भी सुनाई देती थी। उनका संगीत गरीब, मजदूर, वंचित और आम इंसान की जिंदगी से जुड़ा हुआ था।
यही वजह थी कि उनकी लोकप्रियता केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रही। वह अपने गीतों के जरिए लोगों को सोचने और सवाल करने के लिए भी प्रेरित करते थे।
4. संगीत को कमाई नहीं, सामाजिक जिम्मेदारी मानते थे
भूपेन हजारिका के लिए संगीत केवल कमाई का जरिया नहीं था। वह अपनी कला को समाज के प्रति जिम्मेदारी मानते थे। इसी वजह से बिना अनुमति उनके गीतों को रीमिक्स किए जाने पर भी वह नाराज होते थे। उनका मानना था कि उनके गीतों में मौजूद सामाजिक संदेश को बदलने या कमजोर करने का अधिकार किसी को नहीं है।
5. मंच के नीचे सो रहे ढोलकिए को खुद घर पहुंचाया
भूपेन हजारिका बेहद कोमल दिल वाले इंसान भी थे। बिहू उत्सव के दौरान एक कार्यक्रम के बाद उन्होंने एक स्थानीय ढोलकिए को मंच के नीचे सोते हुए देखा। वह कलाकार लंबे समय तक प्रस्तुति देने के बाद थककर वहीं सो गया था। भूपेन दा की नजर जब उस पर पड़ी तो उन्होंने अपनी कार रुकवाई और उसे खुद उसके घर तक पहुंचाया। उनका मानना था कि कलाकार छोटा या बड़ा नहीं होता। जो व्यक्ति कला के लिए मेहनत करता है, वह सम्मान का हकदार है।



