Allahabad High Court ने मृत व्यक्ति के नाम Learning Licence बनने पर केंद्र और यूपी से मांगा जवाब

Allahabad High Court ने मृत व्यक्ति के नाम Learning Licence बनने पर केंद्र और यूपी से मांगा जवाब

लखनऊ, सात सितंबर इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने मृत व्यक्ति के नाम पर लर्निंग लाइसेंस जारी होने के मामले में केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब मांगा है। लखनऊ खंडपीठ ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान यह गंभीर सवाल उठाया कि आधार कार्ड के विवरण के आधार पर एक मृत व्यक्ति के नाम लर्निंग लाइसेंस कैसे जारी हो गया। याचिका में आधार के विवरण के आधार पर लर्निंग और ड्राइविंग लाइसेंस जारी किए जाने की मौजूदा ऑनलाइन व्यवस्था को चुनौती दी गई है।

याचिका में यह भी दावा किया गया है कि एक मामले में आधार विवरण के साथ अश्लील तस्वीरें ऑनलाइन अपलोड होने के बावजूद लर्निंग लाइसेंस जारी कर दिया गया। न्यायमूर्ति राजन राय और न्यायमूर्ति सैयद कमर हसन रिजवी की पीठ ने यह आदेश संतोष मिश्रा की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर दिया। याचिका में मुख्य रूप से केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 के नियम 11 और आधार प्रमाणीकरण संबंधी नियमों के तहत जारी अधिसूचनाओं को चुनौती दी गई है।

अदालत ने केंद्रीय मोटर वाहन नियम के नियम 11 को चुनौती दिए जाने के मद्देनजर भारत के अटॉर्नी जनरल को भी नोटिस जारी करने का आदेश दिया है। मामले की अगली सुनवाई छह सप्ताह बाद होगी। याचिका में कहा गया है कि मौजूदा ऑनलाइन व्यवस्था के तहत लर्निंग लाइसेंस के लिए आधार नंबर उपलब्ध कराने पर आधार में दर्ज विवरण लाइसेंसिंग प्राधिकरण के पास पहुंच जाता है और इसी आधार पर आगे की प्रक्रिया पूरी की जाती है।

याचिकाकर्ता ने दलील दी है कि आधार कार्ड उम्र का वैध प्रमाण नहीं है। ऐसे में केवल आधार विवरण के आधार पर लर्निंग लाइसेंस जारी करने की व्यवस्था मोटर वाहन अधिनियम के प्रावधानों के विपरीत हो सकती है। याचिका में यह भी कहा गया है कि आधार को उम्र का प्रमाण न मानने के बावजूद उसके विवरण के आधार पर लाइसेंस जारी होने से 16 या 18 वर्ष से कम आयु के व्यक्तियों को भी लाइसेंस जारी होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

याची की ओर से न्यायालय के समक्ष ऐसे दस्तावेज भी प्रस्तुत किए गए, जिनके आधार पर दावा किया गया कि एक मृत व्यक्ति के आधार नंबर का इस्तेमाल कर उसके नाम पर लर्निंग लाइसेंस जारी कर दिया गया। इसके अलावा एक अन्य मामले का हवाला देते हुए कहा गया कि आधार विवरण के साथ अश्लील तस्वीरें ऑनलाइन अपलोड किए जाने के बावजूद लर्निंग लाइसेंस जारी हो गया। याची ने ऐसी घटनाओं को गंभीर बताते हुए इन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी खतरा बताया है।

हालांकि, केंद्र और राज्य सरकार की ओर से इन आरोपों का विरोध किया गया। सरकारी पक्ष ने कहा कि केवल आधार नंबर उपलब्ध कराने से लर्निंग लाइसेंस स्वतः जारी नहीं हो जाता, बल्कि इसके लिए अन्य निर्धारित औपचारिकताएं भी पूरी करनी होती हैं। इस पर अदालत ने सवाल किया कि यदि वास्तव में किसी मृत व्यक्ति के आधार नंबर के आधार पर उसके नाम पर लर्निंग लाइसेंस जारी हुआ है तो ऐसा कैसे संभव हुआ।

हालांकि, सरकारी पक्ष की ओर से इस सवाल का कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिल सका।

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