2013 के दंगों की बरसी पर लगाए गए विवादित पोस्टर-होर्डिंग्स और सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद के ध्वस्तीकरण के बाद उठे विवाद को लेकर सपा सांसद हरेंद्र मलिक ने प्रशासन और सरकार पर तीखा हमला बोला है। पुलिस को चकमा देकर सहारनपुर जाकर लौटे सांसद ने सोमवार शाम करीब 5 बजे अपने आवास पर मीडिया से वार्ता की। इस दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासनिक बंदिशों और हाउस अरेस्ट के बावजूद वह मौके पर पहुंचे और कहा कि जनता के मुद्दों पर उनकी आवाज को रोका नहीं जा सकता। हरेंद्र मलिक ने कहा कि प्रशासन और सरकार की पूरी तरह तानाशाही चल रही है। उन्होंने दावा किया कि सपा प्रतिनिधिमंडल को घर पर ही नजरबंद कर दिया गया था और उन्हें मौके पर जाने की अनुमति नहीं दी जा रही थी। सांसद के मुताबिक, “हम पुलिस और प्रशासन को चकमा देकर, बचते-बचाते और हवाई चप्पलों में सहारनपुर पहुंचे थे।” सांसद ने बताया कि कैराना की सपा सांसद इकरा हसन से भी उनकी बातचीत हुई थी। उनके मुताबिक, इकरा हसन ने फोन कर कहा था कि चाहे कुछ भी हो जाए, मौके पर पहुंचना जरूर है। इसके बाद वह प्रतिनिधिमंडल के साथ मौके पर पहुंचे। मुजफ्फरनगर में लगाए गए 2013 के दंगों की याद दिलाने वाले विवादित पोस्टर और होर्डिंग्स को लेकर हरेंद्र मलिक ने इसे गंभीर मामला बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे पोस्टरों और होर्डिंग्स के जरिए इलाके के सामाजिक सौहार्द और आपसी भाईचारे को बिगाड़ने की सोची-समझी कोशिश की जा रही है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि माहौल खराब करने वाली ऐसी हरकतों के पीछे शामिल लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। सांसद ने कहा कि किसी भी ऐसी गतिविधि को बढ़ावा नहीं मिलना चाहिए, जिससे मुज़फ़्फ़रनगर और आसपास के क्षेत्रों में तनाव पैदा हो। सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद के ध्वस्तीकरण के बाद उठे विवाद का जिक्र करते हुए भी सांसद ने प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों को जनता के बीच जाने और लोगों की समस्याएं सुनने से रोकना उचित नहीं है। हरेंद्र मलिक ने कहा कि प्रशासनिक बंदिशों के बावजूद समाजवादी पार्टी जनता के मुद्दों पर अपनी आवाज उठाती रहेगी। उन्होंने जनप्रतिनिधियों को जनता के बीच जाने की अनुमति देने और ऐसे मामलों में प्रशासन से निष्पक्ष एवं कानून के मुताबिक कार्रवाई करने की मांग की।

