Vijay Kedia Multibagger Stocks: शेयर बाजार में ज्यादातर निवेशक गिरते शेयर में खतरा देखते हैं, लेकिन दिग्गज निवेशक विजय केडिया को अक्सर वहीं मौका नजर आता है। Neuland Laboratories इसका बड़ा उदाहरण है। जिस समय कोविड संकट के दौरान मार्च 2020 में कंपनी का शेयर करीब 250 रुपये पर ट्रेड कर रहा था, उस वक्त केडिया ने इसमें अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई थी। इसके बाद 18 अगस्त 2026 को शेयर 23,881 रुपये पर पहुंच गया। यानी मार्च 2020 में खरीदे गए भाव के मुकाबले शेयर करीब 95 गुना ऊपर चला गया। यही वजह है कि न्यूलैंड लेबोरेटरीज को केडिया के हालिया बड़े मल्टीबैगर दांवों में गिना जा रहा है। यह शेयर आज सोमवार को एनएसई पर 22,870 रुपये पर बंद हुआ है।
जून तिमाही तक केडिया के पास थे 295 करोड़ के शेयर
ईटी की एक रिपोर्ट के अनुसार, केडिया ने न्यूलैंड लेबोरेटरीज में पहली बार सितंबर 2019 के आसपास निवेश किया था। इसके बाद कोविड के कारण बाजार में जबरदस्त गिरावट आई और मार्च 2020 में शेयर करीब 250 रुपये तक आ गया। उस समय उन्होंने शेयर में अपनी हिस्सेदारी और बढ़ाई। अलग-अलग भाव पर उन्होंने कंपनी में करीब 1.5 से 1.7 फीसदी हिस्सेदारी बनाई। बाद में उन्होंने करीब 0.5 से 0.6 फीसदी हिस्सेदारी अलग-अलग भाव पर बेच दी। रिपोर्ट के मुताबिक, इनमें कुछ बिक्री करीब 7,500 रुपये के आसपास के भाव पर भी हुई। जून तिमाही के अंत में उनके पास न्यूलैंड में करीब 1 फीसदी हिस्सेदारी थी, जिसकी मौजूदा अनुमानित कीमत करीब 295 करोड़ रुपये बताई गई है। केडिया का कहना है कि कुछ हिस्सेदारी बेचने के बाद उनकी प्रभावी लागत अब लगभग शून्य रह गई है।
असली दांव शेयर पर नहीं, कंपनी की ग्रोथ स्टोरी पर था
न्यूलैंड में केडिया का भरोसा केवल शेयर के भाव पर आधारित नहीं था। उनकी नजर कंपनी के peptide कारोबार और CDMO यानी Contract Development and Manufacturing Organization के फ्यूचर पर थी। जब उन्होंने कंपनी में निवेश किया, उस समय न्यूलैंड peptides सेक्टर में एक नया कारोबार तैयार कर रही थी। बाजार में इस अवसर को लेकर पूरी तरह स्पष्टता नहीं थी, लेकिन कंपनी के संकेतों से एक नए ग्रोथ सेक्टर की संभावना दिखाई दे रही थी। बाद में peptide कारोबार में देरी हुई। इसका असर शेयर पर भी पड़ा और भाव में तेज गिरावट आई। लेकिन केडिया के लिए यह कहानी खत्म होने का संकेत नहीं था। उनका कहना था कि किसी काम में देरी होने का मतलब यह नहीं कि उसकी कहानी खत्म हो गई। यही उनकी निवेश रणनीति का अहम हिस्सा है। वे ऐसी कंपनियों को तलाशते हैं जो कभी अच्छा प्रदर्शन कर चुकी हों, लेकिन किसी वजह से कुछ समय के लिए पटरी से उतर गई हों।
केडिया की नजर में ‘आउट ऑफ फॉर्म’ कंपनी क्या होती है?
रिपोर्ट के अनुसार, विजय केडिया ऐसी कंपनियों की तुलना एक ऐसे प्लेयर से करते हैं, जो दौड़ के बीच में थक गया हो या ऐसा स्टूडेंट जो कुछ समय के लिए पढ़ाई में पीछे रह गया हो। बाजार अक्सर किसी कंपनी की बिक्री, मुनाफे या शेयर भाव में कमजोरी देखकर उसे नजरअंदाज करना शुरू कर देता है। लेकिन केडिया का सवाल अलग होता है। वे देखते हैं कि कंपनी की बुनियाद अभी मजबूत है या नहीं।
अगर कंपनी पहले रिकॉर्ड बना चुकी है और मौजूदा परेशानी अस्थायी है, तो उनके लिए वापसी की संभावना बनी रहती है। यानी बाजार जहां ‘कहानी खत्म’ देख रहा हो, वहां केडिया यह तलाशते हैं कि कहीं यह सिर्फ अस्थायी ब्रेक तो नहीं है।
सिर्फ एक कंपनी की बात सुनकर निवेश नहीं करते
केडिया की एक खास आदत है। वे किसी कंपनी में निवेश से पहले केवल उसी कंपनी के मैनेजमेंट की बात पर निर्भर नहीं रहते। उनका कहना है कि अगर वे न्यूलैंड को देख रहे हैं तो केवल न्यूलैंड की बातें सुनना पर्याप्त नहीं है। वे पूरी फार्मा इंडस्ट्री की कंपनियों की कमेंट्री और उनके संकेतों पर नजर रखते हैं। उनके मुताबिक, अगर एक ही दिशा की बात कई कंपनियां कर रही हैं तो यह संकेत हो सकता है कि मौका केवल एक कंपनी तक सीमित नहीं है। न्यूलैंड के मामले में CDMO को लेकर भी ऐसा ही माहौल दिखाई दिया। कई कंपनियां इस सेक्टर को भविष्य के ग्रोथ एरिया के तौर पर देख रही थीं। केडिया ने इसी व्यापक ट्रेंड को अपने निवेश के लिए अहम माना।
हर सेक्टर का एक्सपर्ट बनना जरूरी नहीं
केडिया का मानना है कि निवेशक को हर इंडस्ट्री का तकनीकी विशेषज्ञ बनने की जरूरत नहीं है। उनके मुताबिक, उन्हें फार्मासिस्ट बनने की जरूरत नहीं थी। वे कारोबार की हर तकनीकी बारीकी को गहराई से समझने के बजाय यह देखना पसंद करते हैं कि कंपनी किस दिशा में आगे बढ़ रही है। वे बहुत ज्यादा विश्लेषण को लेकर भी सावधान करते हैं। उनके अनुसार, बहुत ज्यादा विश्लेषण कई बार फैसले लेने की क्षमता ही रोक देता है। इसलिए उनका फोकस हर तिमाही के छोटे-छोटे उतार-चढ़ाव से ज्यादा कंपनी की लॉन्ग टर्म स्टोरी पर रहता है।
विजय केडिया का RISE फॉर्मूला क्या है?
न्यूलैंड की स्टोरी के पीछे केडिया की व्यापक निवेश सोच भी दिखाई देती है। उनका मानना है कि निवेशक को पुराने और परिपक्व सेक्टर्स में अटके रहने के बजाय उभरते हुए सेक्टर्स पर नजर रखनी चाहिए। इसी सोच के तहत वे RISE फ्रेमवर्क का इस्तेमाल करते हैं।
R यानी रिन्यूएबल और एनर्जी ट्रांजिशन
I यानी इंफ्रास्ट्रक्चर
S यानी सिक्युरिटी, जिसमें डिफेंस और साइबर सिक्योरिटी शामिल हैं
E यानी इमर्जिंग टेक्नोलॉजीज जैसे इलेक्ट्रिक व्हीकल और डेटा सेंटर्स
(डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल सिर्फ जानकारी मात्र है। यह निवेश की सलाह नहीं है। शेयर मार्केट/म्यूचुअल फंड में निवेश जोखिम भरा होता है। कहीं भी पैसा लगाने से पहले अपने निवेश सलाहकार से परामर्श लें।)



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