कैमूर के भभुआ जिला सूचना एवं जनसंपर्क विभाग में सरकारी योजनाओं के प्रचार-प्रसार को लेकर गंभीर लापरवाही सामने आई है। सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं, उपलब्धियों और विकास कार्यों की जानकारी आम लोगों तक पहुंचाने के लिए छपवाई गईं हजारों पुस्तिकाएं और पर्चे वर्षों से विभागीय भवन के कमरों में पड़े-पड़े खराब हो रहे हैं। लाखों रुपये खर्च कर तैयार कराई गई प्रचार सामग्री जरूरतमंदों तक पहुंचने के बजाय धूल और कीड़े-मकौड़ों के बीच बर्बाद हो रही है। देखें, मौके से आई तस्वीरें… बंडलों में पड़ी हैं योजनाओं की पुस्तिकाएं विभाग के कमरों और मेजों पर प्रचार पुस्तिकाओं के कई बंडल पड़े हैं। कई जगह पुस्तिकाएं फर्श पर बिखरी हुई नजर आती हैं। इनमें ‘अति पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं विकास’ समेत सरकार की विभिन्न योजनाओं से संबंधित जानकारी दी गई है। इनका उद्देश्य लोगों को सरकारी योजनाओं और उनके लाभ लेने की प्रक्रिया के बारे में जागरूक करना था। लाभार्थियों तक पहुंचने से पहले खराब हो गई सामग्री सरकारी धन खर्च कर छपवाई गई इन पुस्तिकाओं को संबंधित क्षेत्रों में वितरित किया जाना था, ताकि ग्रामीण और वंचित वर्ग के लोगों को योजनाओं की जानकारी मिल सके। लेकिन लंबे समय से वितरण नहीं होने के कारण बड़ी मात्रा में सामग्री खराब होने की स्थिति में पहुंच गई है। इससे सरकारी खर्च का उद्देश्य भी सवालों के घेरे में है। दफ्तर के कमरों में बंद रह गया प्रचार अभियान सरकार का जोर योजनाओं के व्यापक प्रचार-प्रसार पर रहता है, ताकि अधिक से अधिक पात्र लोग उनका लाभ उठा सकें। इसके लिए सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के माध्यम से प्रचार सामग्री तैयार कराई जाती है। लेकिन भभुआ में यही सामग्री लोगों तक पहुंचने के बजाय विभागीय कार्यालय में ही पड़ी रह गई। इससे विभाग की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। एक तरफ जानकारी के लिए भटकते हैं लोग स्थानीय लोगों का कहना है कि ग्रामीण और जरूरतमंद लोग आज भी सरकारी योजनाओं की जानकारी के लिए विभिन्न कार्यालयों के चक्कर लगाते हैं। दूसरी ओर, योजनाओं की जानकारी देने वाली पुस्तिकाएं दफ्तर में बंद पड़ी हैं। यदि समय रहते इनका वितरण किया जाता तो बड़ी संख्या में लोग योजनाओं का लाभ उठा सकते थे। जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होगी या नहीं? प्रचार सामग्री के इस तरह बर्बाद होने से सरकारी धन के उपयोग और विभागीय जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि वर्षों तक इन पुस्तिकाओं के वितरण की निगरानी क्यों नहीं हुई और इसके लिए जिम्मेदार कौन है? देखना होगा कि मामले की जांच कर प्रशासन संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय करता है या नहीं। कैमूर के भभुआ जिला सूचना एवं जनसंपर्क विभाग में सरकारी योजनाओं के प्रचार-प्रसार को लेकर गंभीर लापरवाही सामने आई है। सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं, उपलब्धियों और विकास कार्यों की जानकारी आम लोगों तक पहुंचाने के लिए छपवाई गईं हजारों पुस्तिकाएं और पर्चे वर्षों से विभागीय भवन के कमरों में पड़े-पड़े खराब हो रहे हैं। लाखों रुपये खर्च कर तैयार कराई गई प्रचार सामग्री जरूरतमंदों तक पहुंचने के बजाय धूल और कीड़े-मकौड़ों के बीच बर्बाद हो रही है। देखें, मौके से आई तस्वीरें… बंडलों में पड़ी हैं योजनाओं की पुस्तिकाएं विभाग के कमरों और मेजों पर प्रचार पुस्तिकाओं के कई बंडल पड़े हैं। कई जगह पुस्तिकाएं फर्श पर बिखरी हुई नजर आती हैं। इनमें ‘अति पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं विकास’ समेत सरकार की विभिन्न योजनाओं से संबंधित जानकारी दी गई है। इनका उद्देश्य लोगों को सरकारी योजनाओं और उनके लाभ लेने की प्रक्रिया के बारे में जागरूक करना था। लाभार्थियों तक पहुंचने से पहले खराब हो गई सामग्री सरकारी धन खर्च कर छपवाई गई इन पुस्तिकाओं को संबंधित क्षेत्रों में वितरित किया जाना था, ताकि ग्रामीण और वंचित वर्ग के लोगों को योजनाओं की जानकारी मिल सके। लेकिन लंबे समय से वितरण नहीं होने के कारण बड़ी मात्रा में सामग्री खराब होने की स्थिति में पहुंच गई है। इससे सरकारी खर्च का उद्देश्य भी सवालों के घेरे में है। दफ्तर के कमरों में बंद रह गया प्रचार अभियान सरकार का जोर योजनाओं के व्यापक प्रचार-प्रसार पर रहता है, ताकि अधिक से अधिक पात्र लोग उनका लाभ उठा सकें। इसके लिए सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के माध्यम से प्रचार सामग्री तैयार कराई जाती है। लेकिन भभुआ में यही सामग्री लोगों तक पहुंचने के बजाय विभागीय कार्यालय में ही पड़ी रह गई। इससे विभाग की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। एक तरफ जानकारी के लिए भटकते हैं लोग स्थानीय लोगों का कहना है कि ग्रामीण और जरूरतमंद लोग आज भी सरकारी योजनाओं की जानकारी के लिए विभिन्न कार्यालयों के चक्कर लगाते हैं। दूसरी ओर, योजनाओं की जानकारी देने वाली पुस्तिकाएं दफ्तर में बंद पड़ी हैं। यदि समय रहते इनका वितरण किया जाता तो बड़ी संख्या में लोग योजनाओं का लाभ उठा सकते थे। जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होगी या नहीं? प्रचार सामग्री के इस तरह बर्बाद होने से सरकारी धन के उपयोग और विभागीय जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि वर्षों तक इन पुस्तिकाओं के वितरण की निगरानी क्यों नहीं हुई और इसके लिए जिम्मेदार कौन है? देखना होगा कि मामले की जांच कर प्रशासन संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय करता है या नहीं।

