खगड़िया जिले में बाढ़ और नदी के कटाव ने ग्रामीण इलाकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। बागमती और कोसी नदियों का जलस्तर बढ़ने से कई पंचायतों में पानी फैल गया है। इससे लोगों का सामान्य जीवन प्रभावित हुआ है। कई घरों में पानी घुस गया है, जिससे ग्रामीणों को बाहर निकलने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। कबेला पंचायत के वार्ड संख्या 1 से 7 तक बाढ़ का पानी फैलने से ग्रामीणों की परेशानी बढ़ गई है। घरों से निकलने और जरूरी कामों के लिए लोगों को काफी दिक्कत हो रही है। प्रशासन ने फिलहाल दो नावों का इंतजाम किया है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रभावित आबादी को देखते हुए नावों की संख्या कम है। पंचायत के पूर्व समिति सदस्य मुन्ना ठाकुर के मुताबिक, सातों वार्डों में बड़ी संख्या में परिवार बाढ़ से प्रभावित हैं। नाव से लगातार गश्त करने का निर्देश फूस के घरों में रहने वाले परिवारों की हालत सबसे खराब है। कई परिवार सुरक्षित जगह की तलाश में पक्के मकानों की छत, यात्री शेड और ऊंची जगहों पर रहने को मजबूर हैं। तेज कटाव के कारण खेत, घर और सड़कें नदी के निशाने पर हैं। पिछले दो साल में नदी गांव से डेढ़ किलोमीटर दूर थी, जो अब घटकर सिर्फ 50 मीटर रह गई है। बाढ़ के कारण जो परिवार अपने घर छोड़कर सुरक्षित जगहों या राहत शिविरों में गए हैं, उनके खाली घरों की सुरक्षा के लिए पुलिस खास निगरानी रखेगी। जिलाधिकारी विक्रम वीरकर ने बाढ़ प्रभावित इलाकों में नाव से लगातार गश्त करने का निर्देश दिया है। कटाव ग्रामीणों के लिए सबसे बड़ी चिंता बाढ़ के दौरान खाली पड़े घरों में चोरी की आशंका को देखते हुए पुलिस को ऐसे इलाकों पर खास नजर रखने को कहा गया है, जहां से लोग चले गए हैं। पुलिस की लगातार मौजूदगी से चोरी की घटनाओं पर रोक लगेगी और प्रभावित परिवारों में अपने घर और सामान की सुरक्षा को लेकर भरोसा बना रहेगा। अलौली प्रखंड के बलुआही गांव में बागमती नदी का कटाव ग्रामीणों के लिए सबसे बड़ी चिंता बन गया है। ग्रामीणों के अनुसार करीब दो साल पहले नदी गांव से लगभग डेढ़ किलोमीटर दूर थी। लगातार कटाव के कारण अब नदी की दूरी घटकर महज 50 मीटर रह गई है। इस दौरान करीब 50 एकड़ जमीन नदी में समा चुकी है। 20 सालों से कटाव लगातार जारी जिन किसानों के पास कई एकड़ जमीन थी, उनमें से कई की जमीन का बड़ा हिस्सा नदी में कट चुका है। खेती और जमीन ही ग्रामीण परिवारों की आय का मुख्य आधार होने के कारण लगातार हो रहे कटाव ने उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा कर दिया है। उत्तरी बोहरबा गांव के ग्रामीण करीब 20 सालों से कटाव की मार झेल रहे हैं। वहां कटावरोधी कार्य शुरू होने के बाद अब नदी ने अपना रुख बलुआही और नया टोला की ओर कर लिया है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें अब निरीक्षण और आश्वासन नहीं, बल्कि स्थायी कटावरोधी काम चाहिए। बेलदौर में 11 घर कटाव की चपेट में बेलदौर प्रखंड के बलैठा पंचायत स्थित मुनि टोला में पिछले दो सप्ताह से कोसी नदी का कटाव जारी है। तेज कटाव की चपेट में अब तक 11 लोगों के घर आ चुके हैं। प्रभावित परिवारों के सामने रहने और सामान बचाने की चुनौती खड़ी हो गई है। अंचल प्रशासन की ओर से चार परिवारों को पॉलिथीन शीट उपलब्ध कराई गई है। खरैता में सड़क से सिर्फ 10 फीट दूर पहुंची बागमती चौथम प्रखंड के खरैता गांव में बागमती नदी का कटाव भी तेजी से बढ़ रहा है। नवादा घाट से मां कात्यायनी मंदिर जाने वाली मुख्य सड़क अब कटाव स्थल से महज 10 फीट दूर रह गई है। रविवार को भी सड़क के समीप कटाव तेज देखा गया। ग्रामीणों ने तत्काल कटावरोधी कार्य कराने की मांग की है। सीओ ने संबंधित विभागीय अधिकारियों को स्थिति की जानकारी दी है। विभागीय स्तर पर कटावरोधी कार्य की तैयारी की जा रही है। 250 बंबू रोल और 1000 ईसी बैग से रोकने की कोशिश बाढ़ प्रमंडल-दो की ओर से कटाव रोकने के लिए सुरक्षात्मक कार्य जारी है। एक सप्ताह पहले 150 बंबू रोल लगाए गए थे। अब 100 और बंबू रोल लगाए जा रहे हैं। इसके अलावा कटाव प्रभावित स्थानों पर 1000 ईसी बैग लगाए जा रहे हैं। जरूरत पड़ने पर हाथी पांव भी बनाए जाएंगे। कटाव प्रभावित परिवारों को एहतियात के तौर पर सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी जा रही है। चापाकल से लेकर मेडिकल टीम तक की होगी व्यवस्था बाढ़ की स्थिति को देखते हुए गोगरी अनुमंडल कार्यालय में रविवार को जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की बैठक हुई। बैठक की अध्यक्षता एसडीओ संजय कुमार ने की, जबकि डीएम वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े। बैठक में तय किया गया कि प्रभावित पंचायतों में जरूरत के अनुसार चापाकल, अस्थायी शौचालय, लाइट, मेडिकल टीम और प्लास्टिक उपलब्ध कराया जाएगा। पेयजल और स्वच्छता की समस्या वाले इलाकों में प्राथमिकता के आधार पर संसाधन पहुंचाए जाएंगे। जरूरत पड़ने पर कम्युनिटी किचेन भी शुरू किया जाएगा। घरों में पानी, ऊंचा चूल्हा कर बन रहा खाना खगड़िया सदर दक्षिणी पंचायत के वार्ड संख्या 10 में बाढ़ का पानी घरों में प्रवेश कर गया है। कई परिवार पानी के बीच घर में ही रहने को मजबूर हैं। बाढ़ पीड़ितों ने चूल्हे को ऊंचा कर खाना पकाने की व्यवस्था की है, जबकि बच्चों को पानी से बचाने के लिए चौकी को ऊंचा कर उस पर सुलाया जा रहा है। बाढ़ और कटाव की दोहरी मार झेल रहे ग्रामीणों की मांग है कि प्रभावित इलाकों में नावों की संख्या बढ़ाई जाए और राहत, पेयजल, दवा, शौचालय तथा सुरक्षित ठिकाने जैसी जरूरी सुविधाएं जल्द उपलब्ध कराई जाएं। खगड़िया जिले में बाढ़ और नदी के कटाव ने ग्रामीण इलाकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। बागमती और कोसी नदियों का जलस्तर बढ़ने से कई पंचायतों में पानी फैल गया है। इससे लोगों का सामान्य जीवन प्रभावित हुआ है। कई घरों में पानी घुस गया है, जिससे ग्रामीणों को बाहर निकलने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। कबेला पंचायत के वार्ड संख्या 1 से 7 तक बाढ़ का पानी फैलने से ग्रामीणों की परेशानी बढ़ गई है। घरों से निकलने और जरूरी कामों के लिए लोगों को काफी दिक्कत हो रही है। प्रशासन ने फिलहाल दो नावों का इंतजाम किया है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रभावित आबादी को देखते हुए नावों की संख्या कम है। पंचायत के पूर्व समिति सदस्य मुन्ना ठाकुर के मुताबिक, सातों वार्डों में बड़ी संख्या में परिवार बाढ़ से प्रभावित हैं। नाव से लगातार गश्त करने का निर्देश फूस के घरों में रहने वाले परिवारों की हालत सबसे खराब है। कई परिवार सुरक्षित जगह की तलाश में पक्के मकानों की छत, यात्री शेड और ऊंची जगहों पर रहने को मजबूर हैं। तेज कटाव के कारण खेत, घर और सड़कें नदी के निशाने पर हैं। पिछले दो साल में नदी गांव से डेढ़ किलोमीटर दूर थी, जो अब घटकर सिर्फ 50 मीटर रह गई है। बाढ़ के कारण जो परिवार अपने घर छोड़कर सुरक्षित जगहों या राहत शिविरों में गए हैं, उनके खाली घरों की सुरक्षा के लिए पुलिस खास निगरानी रखेगी। जिलाधिकारी विक्रम वीरकर ने बाढ़ प्रभावित इलाकों में नाव से लगातार गश्त करने का निर्देश दिया है। कटाव ग्रामीणों के लिए सबसे बड़ी चिंता बाढ़ के दौरान खाली पड़े घरों में चोरी की आशंका को देखते हुए पुलिस को ऐसे इलाकों पर खास नजर रखने को कहा गया है, जहां से लोग चले गए हैं। पुलिस की लगातार मौजूदगी से चोरी की घटनाओं पर रोक लगेगी और प्रभावित परिवारों में अपने घर और सामान की सुरक्षा को लेकर भरोसा बना रहेगा। अलौली प्रखंड के बलुआही गांव में बागमती नदी का कटाव ग्रामीणों के लिए सबसे बड़ी चिंता बन गया है। ग्रामीणों के अनुसार करीब दो साल पहले नदी गांव से लगभग डेढ़ किलोमीटर दूर थी। लगातार कटाव के कारण अब नदी की दूरी घटकर महज 50 मीटर रह गई है। इस दौरान करीब 50 एकड़ जमीन नदी में समा चुकी है। 20 सालों से कटाव लगातार जारी जिन किसानों के पास कई एकड़ जमीन थी, उनमें से कई की जमीन का बड़ा हिस्सा नदी में कट चुका है। खेती और जमीन ही ग्रामीण परिवारों की आय का मुख्य आधार होने के कारण लगातार हो रहे कटाव ने उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा कर दिया है। उत्तरी बोहरबा गांव के ग्रामीण करीब 20 सालों से कटाव की मार झेल रहे हैं। वहां कटावरोधी कार्य शुरू होने के बाद अब नदी ने अपना रुख बलुआही और नया टोला की ओर कर लिया है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें अब निरीक्षण और आश्वासन नहीं, बल्कि स्थायी कटावरोधी काम चाहिए। बेलदौर में 11 घर कटाव की चपेट में बेलदौर प्रखंड के बलैठा पंचायत स्थित मुनि टोला में पिछले दो सप्ताह से कोसी नदी का कटाव जारी है। तेज कटाव की चपेट में अब तक 11 लोगों के घर आ चुके हैं। प्रभावित परिवारों के सामने रहने और सामान बचाने की चुनौती खड़ी हो गई है। अंचल प्रशासन की ओर से चार परिवारों को पॉलिथीन शीट उपलब्ध कराई गई है। खरैता में सड़क से सिर्फ 10 फीट दूर पहुंची बागमती चौथम प्रखंड के खरैता गांव में बागमती नदी का कटाव भी तेजी से बढ़ रहा है। नवादा घाट से मां कात्यायनी मंदिर जाने वाली मुख्य सड़क अब कटाव स्थल से महज 10 फीट दूर रह गई है। रविवार को भी सड़क के समीप कटाव तेज देखा गया। ग्रामीणों ने तत्काल कटावरोधी कार्य कराने की मांग की है। सीओ ने संबंधित विभागीय अधिकारियों को स्थिति की जानकारी दी है। विभागीय स्तर पर कटावरोधी कार्य की तैयारी की जा रही है। 250 बंबू रोल और 1000 ईसी बैग से रोकने की कोशिश बाढ़ प्रमंडल-दो की ओर से कटाव रोकने के लिए सुरक्षात्मक कार्य जारी है। एक सप्ताह पहले 150 बंबू रोल लगाए गए थे। अब 100 और बंबू रोल लगाए जा रहे हैं। इसके अलावा कटाव प्रभावित स्थानों पर 1000 ईसी बैग लगाए जा रहे हैं। जरूरत पड़ने पर हाथी पांव भी बनाए जाएंगे। कटाव प्रभावित परिवारों को एहतियात के तौर पर सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी जा रही है। चापाकल से लेकर मेडिकल टीम तक की होगी व्यवस्था बाढ़ की स्थिति को देखते हुए गोगरी अनुमंडल कार्यालय में रविवार को जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की बैठक हुई। बैठक की अध्यक्षता एसडीओ संजय कुमार ने की, जबकि डीएम वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े। बैठक में तय किया गया कि प्रभावित पंचायतों में जरूरत के अनुसार चापाकल, अस्थायी शौचालय, लाइट, मेडिकल टीम और प्लास्टिक उपलब्ध कराया जाएगा। पेयजल और स्वच्छता की समस्या वाले इलाकों में प्राथमिकता के आधार पर संसाधन पहुंचाए जाएंगे। जरूरत पड़ने पर कम्युनिटी किचेन भी शुरू किया जाएगा। घरों में पानी, ऊंचा चूल्हा कर बन रहा खाना खगड़िया सदर दक्षिणी पंचायत के वार्ड संख्या 10 में बाढ़ का पानी घरों में प्रवेश कर गया है। कई परिवार पानी के बीच घर में ही रहने को मजबूर हैं। बाढ़ पीड़ितों ने चूल्हे को ऊंचा कर खाना पकाने की व्यवस्था की है, जबकि बच्चों को पानी से बचाने के लिए चौकी को ऊंचा कर उस पर सुलाया जा रहा है। बाढ़ और कटाव की दोहरी मार झेल रहे ग्रामीणों की मांग है कि प्रभावित इलाकों में नावों की संख्या बढ़ाई जाए और राहत, पेयजल, दवा, शौचालय तथा सुरक्षित ठिकाने जैसी जरूरी सुविधाएं जल्द उपलब्ध कराई जाएं।

