बिहार सरकार ने शिक्षकों को राज्यकर्मी का दर्जा तो दिया, लेकिन इसके अनुसार वेतन नहीं। चपरासी से लेकर सचिव तक राज्य सरकार के कर्मचारियों को 7वें वेतनमान का लाभ मिल रहा है, लेकिन शिक्षकों को नहीं। बिहार के सरकारी शिक्षक 7वां वेतनमान की मांग कर रहे हैं। इन्होंने काली पट्टी बांधकर काम किया है। अब 2 अक्टूबर से पटना में आमरण अनशन करेंगे। 7वां वेतनमान देने पर सरकार पर 10 हजार करोड़ रुपए से अधिक का बोझ बढ़ेगा। अभी 5.5 लाख राज्यकर्मी शिक्षक हैं। इनकी मांग है कि सरकार ने जब राज्यकर्मी का दर्जा दिया है तो इसी अनुसार वेतन भी दे। मंडे स्पेशल में पढ़िए, बिहार में कितने तरीके से शिक्षकों की बहाली हुई। 7वां वेतनमान लागू करने पर इतना वेतन कितना बढ़ जाएगा। 1990 से पहले बहाल हुए शिक्षकों को मिल रहा 1.5 लाख वेतन शिक्षक नेता मार्कण्डेय पाठक ने बताया कि 1994 में बीपीएससी से बहाल शिक्षकों, 2012 में बहाल 34500 विशेष शिक्षकों और हाई स्कूल विद्यालय सेवा आयोग से 1998 से 2015 तक बहाल शिक्षकों को सरकारी कर्मचारियों की तरह वेतनमान मिल रहा है। ये शिक्षक 7वें वेतनमान का लाभ ले रहे हैं। पड़ोसी राज्यों झारखंड और यूपी के काफी शिक्षकों को सरकारी कर्मचारियों की तरह वेतन मिल रहा है। 2006 में पंचायत और नगर निकाय के जरिए नियोजित शिक्षक बहाल किए गए थे। उनके वेतन की संरचना स्थायी सरकारी कर्मचारियों के अनुसार नहीं होकर अलग रखी गई। 2023 में सरकार ने नई शिक्षक नियमावली बनाई और राज्यकर्मी का दर्जा दिया। दूसरी तरफ पुराने शिक्षकों (ज्यादातर 1990 से पहले बहाल हुए) को केंद्रीय वेतनमान के अनुसार एक लाख से डेढ़ लाख रुपए तक वेतन मिल रहा है। बिहार में 6 तरह से हुई शिक्षकों की बहाली अब तक तीन TRE से हुई शिक्षकों की भर्ती BPSC के जरिए TRE के तहत शिक्षकों की तीन बहाली हुई। TRE-4 प्रक्रिया में है। TRE-1 (2023) के तहत 1.70 लाख शिक्षक बहाल हुए। TRE-2 (2023) के तहत लगभग 94 हजार शिक्षक बहाल हुए। TRE-3 (2024) के तहत लगभग 87 हजार शिक्षकों की बहाली हुई। 5 बार ली जा चुकी है सक्षमता परीक्षा नियोजित शिक्षकों के लिए सरकार ने 2024 में विशिष्ट शिक्षक संवर्ग बनाया था। नियोजित शिक्षकों से अब तक पांच चरणों में सक्षमता परीक्षा ली गई है। परीक्षा पास करने वाले नियोजित शिक्षक विशिष्ट शिक्षक बने हैं। इन्हें राज्य के बाकी शिक्षकों के समान वेतन और अन्य सेवा सुविधाएं मिल रही हैं। जो सक्षमता परीक्षा पास नहीं कर पाए वे स्थानीय निकाय के नियोजित शिक्षक बने हुए हैं। 7वां वेतनमान लागू करने पर कितनी हो जाएगी शिक्षकों की सैलरी 7वां वेतनमान लागू करने पर अनुमान है कि सरकार को सालाना 10 हजार करोड़ रुपए से अधिक अतिरिक्त खर्च करना पड़ेगा। इससे शिक्षकों की सैलरी 15 हजार रुपए प्रति महीना तक बढ़ने की उम्मीद है। चपरासी को दे रहे हैं 7वां वेतनमान, शिक्षक क्यों वंचित: शत्रुघ्न प्रसाद बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ के महासचिव और पूर्व सांसद शत्रुघ्न प्रसाद सिंह ने कहा, ‘सभी शिक्षक राज्यकर्मी हो गए हैं। ऐसे में उन्हें राज्यकर्मी की तरह वेतन वृद्धि का भी लाभ मिलना चाहिए। चपरासी से लेकर चीफ सेक्रेटरी को 7वां वेतनमान मिल रहा तो शिक्षकों को क्यों वंचित किया जा रहा है।’ बिहार स्टेट टीचर्स एसोसिएशन (गोपगुट) के प्रदेश अध्यक्ष मार्कण्डेय पाठक ने कहा, ‘6 लाख शिक्षक बिहार के बच्चों के भविष्य का निर्माण कर रहे हैं। दुख की बात है कि जो शिक्षक बच्चों के भविष्य निर्माता हैं उनका भविष्य चौपट हो रहा है।’ ‘2011 में हुई टीईटी में मात्र सवा लाख अभ्यर्थी पास हो पाए थे, जबकि 33 लाख ने आवेदन किया था। इतनी कठिन परीक्षा ली गई थी। उसके बाद भी सरकार को शिक्षकों की योग्यता पर भरोसा नहीं रहा। सरकार ने समक्षता परीक्षा ली। अब सरकार के पास कोई बहाना नहीं है कि शिक्षक योग्य नहीं हैं। सांसदों, विधायकों को जब पुराना पेंशन मिल रहा है तो शिक्षकों को भी मिलना चाहिए।’ सरकार को दो तरह की नीति नहीं चलानी चाहिए: मनोज कुमार बिहार राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ के उप महासचिव मनोज कुमार ने कहा, ‘शिक्षकों को वेतन देने के मामले में सरकार की दोहरी नीति है। एक तरफ सरकार कहती है कि शिक्षक राज्यकर्मी हैं, लेकिन वेतन राज्यकर्मी के बराबर नहीं देती।’ ‘राज्य में जो सरकारी आदेशपाल हैं या निचले स्तर के जो कर्मचारी हैं उनके बराबर भी शिक्षकों का वेतन नहीं है। पहले भर्ती हुए शिक्षकों को केंद्र सरकार की अनुशंसा के अनुरूप वेतनमान मिल रहा है।’ शिक्षक अभी क्यों उठा रहे 7वां वेतनमान देने की मांग? शिक्षकों ने 7वां वेतनमान देने की मांग उठाने के लिए ऐसा वक्त चुना है जब विधान परिषद की 8 सीटों पर चुनाव होने जा रहे हैं। इनमें से चार शिक्षक कोटा के हैं। मतलब, राजनीतिक पार्टियों को चार सीट पाने के लिए शिक्षकों के मुद्दों पर ध्यान देना होगा। राज्यकर्मी का दर्जा देने के साथ ही बिहार सरकार ने शिक्षकों के वेतन के लिए अलग व्यवस्था रखी थी। इन्हें राज्य सरकार के दूसरे विभागों के कर्मचारी की तरह 7वें वेतनमान का लाभ नहीं मिला है। शिक्षक इसी व्यवस्था को बदलने की मांग कर रहे हैं। बिहार सरकार ने शिक्षकों को राज्यकर्मी का दर्जा तो दिया, लेकिन इसके अनुसार वेतन नहीं। चपरासी से लेकर सचिव तक राज्य सरकार के कर्मचारियों को 7वें वेतनमान का लाभ मिल रहा है, लेकिन शिक्षकों को नहीं। बिहार के सरकारी शिक्षक 7वां वेतनमान की मांग कर रहे हैं। इन्होंने काली पट्टी बांधकर काम किया है। अब 2 अक्टूबर से पटना में आमरण अनशन करेंगे। 7वां वेतनमान देने पर सरकार पर 10 हजार करोड़ रुपए से अधिक का बोझ बढ़ेगा। अभी 5.5 लाख राज्यकर्मी शिक्षक हैं। इनकी मांग है कि सरकार ने जब राज्यकर्मी का दर्जा दिया है तो इसी अनुसार वेतन भी दे। मंडे स्पेशल में पढ़िए, बिहार में कितने तरीके से शिक्षकों की बहाली हुई। 7वां वेतनमान लागू करने पर इतना वेतन कितना बढ़ जाएगा। 1990 से पहले बहाल हुए शिक्षकों को मिल रहा 1.5 लाख वेतन शिक्षक नेता मार्कण्डेय पाठक ने बताया कि 1994 में बीपीएससी से बहाल शिक्षकों, 2012 में बहाल 34500 विशेष शिक्षकों और हाई स्कूल विद्यालय सेवा आयोग से 1998 से 2015 तक बहाल शिक्षकों को सरकारी कर्मचारियों की तरह वेतनमान मिल रहा है। ये शिक्षक 7वें वेतनमान का लाभ ले रहे हैं। पड़ोसी राज्यों झारखंड और यूपी के काफी शिक्षकों को सरकारी कर्मचारियों की तरह वेतन मिल रहा है। 2006 में पंचायत और नगर निकाय के जरिए नियोजित शिक्षक बहाल किए गए थे। उनके वेतन की संरचना स्थायी सरकारी कर्मचारियों के अनुसार नहीं होकर अलग रखी गई। 2023 में सरकार ने नई शिक्षक नियमावली बनाई और राज्यकर्मी का दर्जा दिया। दूसरी तरफ पुराने शिक्षकों (ज्यादातर 1990 से पहले बहाल हुए) को केंद्रीय वेतनमान के अनुसार एक लाख से डेढ़ लाख रुपए तक वेतन मिल रहा है। बिहार में 6 तरह से हुई शिक्षकों की बहाली अब तक तीन TRE से हुई शिक्षकों की भर्ती BPSC के जरिए TRE के तहत शिक्षकों की तीन बहाली हुई। TRE-4 प्रक्रिया में है। TRE-1 (2023) के तहत 1.70 लाख शिक्षक बहाल हुए। TRE-2 (2023) के तहत लगभग 94 हजार शिक्षक बहाल हुए। TRE-3 (2024) के तहत लगभग 87 हजार शिक्षकों की बहाली हुई। 5 बार ली जा चुकी है सक्षमता परीक्षा नियोजित शिक्षकों के लिए सरकार ने 2024 में विशिष्ट शिक्षक संवर्ग बनाया था। नियोजित शिक्षकों से अब तक पांच चरणों में सक्षमता परीक्षा ली गई है। परीक्षा पास करने वाले नियोजित शिक्षक विशिष्ट शिक्षक बने हैं। इन्हें राज्य के बाकी शिक्षकों के समान वेतन और अन्य सेवा सुविधाएं मिल रही हैं। जो सक्षमता परीक्षा पास नहीं कर पाए वे स्थानीय निकाय के नियोजित शिक्षक बने हुए हैं। 7वां वेतनमान लागू करने पर कितनी हो जाएगी शिक्षकों की सैलरी 7वां वेतनमान लागू करने पर अनुमान है कि सरकार को सालाना 10 हजार करोड़ रुपए से अधिक अतिरिक्त खर्च करना पड़ेगा। इससे शिक्षकों की सैलरी 15 हजार रुपए प्रति महीना तक बढ़ने की उम्मीद है। चपरासी को दे रहे हैं 7वां वेतनमान, शिक्षक क्यों वंचित: शत्रुघ्न प्रसाद बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ के महासचिव और पूर्व सांसद शत्रुघ्न प्रसाद सिंह ने कहा, ‘सभी शिक्षक राज्यकर्मी हो गए हैं। ऐसे में उन्हें राज्यकर्मी की तरह वेतन वृद्धि का भी लाभ मिलना चाहिए। चपरासी से लेकर चीफ सेक्रेटरी को 7वां वेतनमान मिल रहा तो शिक्षकों को क्यों वंचित किया जा रहा है।’ बिहार स्टेट टीचर्स एसोसिएशन (गोपगुट) के प्रदेश अध्यक्ष मार्कण्डेय पाठक ने कहा, ‘6 लाख शिक्षक बिहार के बच्चों के भविष्य का निर्माण कर रहे हैं। दुख की बात है कि जो शिक्षक बच्चों के भविष्य निर्माता हैं उनका भविष्य चौपट हो रहा है।’ ‘2011 में हुई टीईटी में मात्र सवा लाख अभ्यर्थी पास हो पाए थे, जबकि 33 लाख ने आवेदन किया था। इतनी कठिन परीक्षा ली गई थी। उसके बाद भी सरकार को शिक्षकों की योग्यता पर भरोसा नहीं रहा। सरकार ने समक्षता परीक्षा ली। अब सरकार के पास कोई बहाना नहीं है कि शिक्षक योग्य नहीं हैं। सांसदों, विधायकों को जब पुराना पेंशन मिल रहा है तो शिक्षकों को भी मिलना चाहिए।’ सरकार को दो तरह की नीति नहीं चलानी चाहिए: मनोज कुमार बिहार राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ के उप महासचिव मनोज कुमार ने कहा, ‘शिक्षकों को वेतन देने के मामले में सरकार की दोहरी नीति है। एक तरफ सरकार कहती है कि शिक्षक राज्यकर्मी हैं, लेकिन वेतन राज्यकर्मी के बराबर नहीं देती।’ ‘राज्य में जो सरकारी आदेशपाल हैं या निचले स्तर के जो कर्मचारी हैं उनके बराबर भी शिक्षकों का वेतन नहीं है। पहले भर्ती हुए शिक्षकों को केंद्र सरकार की अनुशंसा के अनुरूप वेतनमान मिल रहा है।’ शिक्षक अभी क्यों उठा रहे 7वां वेतनमान देने की मांग? शिक्षकों ने 7वां वेतनमान देने की मांग उठाने के लिए ऐसा वक्त चुना है जब विधान परिषद की 8 सीटों पर चुनाव होने जा रहे हैं। इनमें से चार शिक्षक कोटा के हैं। मतलब, राजनीतिक पार्टियों को चार सीट पाने के लिए शिक्षकों के मुद्दों पर ध्यान देना होगा। राज्यकर्मी का दर्जा देने के साथ ही बिहार सरकार ने शिक्षकों के वेतन के लिए अलग व्यवस्था रखी थी। इन्हें राज्य सरकार के दूसरे विभागों के कर्मचारी की तरह 7वें वेतनमान का लाभ नहीं मिला है। शिक्षक इसी व्यवस्था को बदलने की मांग कर रहे हैं।

