आकाश आनंद को मायावती पार्टी से बाहर कर सकती हैं:X बायो में BSP समर्थक लिखा; संगठन की कमान अब छोटे भतीजे के हाथ

आकाश आनंद को मायावती पार्टी से बाहर कर सकती हैं:X बायो में BSP समर्थक लिखा; संगठन की कमान अब छोटे भतीजे के हाथ

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) में आकाश आनंद को लेकर चल रहा विवाद अब आखिरी मुकाम तक पहुंच चुका है। मायावती कभी भी आकाश आनंद को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा सकती है। रविवार को आकाश आनंद ने अपना बायो एक बार फिर बदलते हुए इसके संकेत दिए हैं। 3 सितंबर को जहां उन्होंने खुद को बसपा कार्यकर्ता बताया था। अब उन्होंने इसमें बदलाव करते हुए बसपा समर्थक लिख दिया है। इसके अलावा रविवार को तीन बड़े घटनाक्रम हुए। पहला मायावती ने पार्टी पदाधिकारियों को निर्देशित कराया कि वे तुरंत आकाश और अशोक सिद्धार्थ को सोशल मीडिया पर अनफालो कर दें। दूसरा उन्होंने ईशान आनंद को यूपी–उत्तराखंड छोड़कर पूरे देश के राज्यों के संगठन की समीक्षा करने की जिम्मेदारी सौंपी है। पहले ये आकाश के पास जिम्मेदारी थी। तीसरा उन्होंने रामजी गौतम, सुरेश राव, राजाराम और अतर सिंह का कद बड़ा कर दिया। इसी के साथ सहारनपुर मंडल की जिम्मेदारी देख रहे रणधीर सिंह बेनीवाल अब साथ में पंजाब और हिमाचल प्रदेश राज्य की प्रभारी बनाए गए हैं। आकाश के पार्टी से निकालने की घोषणा कभी भी आकाश आनंद ने सोशल मीडिया प्रोफाइल में ‘बसपा’ की जगह ‘बसपा समर्थक’ लिख दिया है। इसे आकाश की पार्टी से दूरी बढ़ने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, आकाश आनंद को पार्टी से औपचारिक रूप से निष्कासित किए जाने की कोई स्पष्ट घोषणा सामने नहीं आई है। पार्टी सूत्रों की मानें तो मायावती कभी भी इसका ऐलान कर सकती है। आकाश-अशोक सिद्धार्थ को अनफॉलो करने का निर्देश पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, मायावती ने रविवार को सबसे पहले मेवालाल गौतम को पार्टी के जिलाध्यक्षों और पदाधिकारियों से फोन पर बात कर आकाश आनंद और अशोक सिद्धार्थ को सोशल मीडिया पर अनफॉलो करने के निर्देश दिए। बताया जा रहा है कि इसकी पृष्ठभूमि में सोशल मीडिया पर आकाश को लेकर चल रही गतिविधियां हैं। दिल्ली के यू-ट्यूबर समरराज के आकाश आनंद से जुड़े दो पोस्ट में से एक को अशोक सिद्धार्थ द्वारा री-ट्वीट किए जाने की बात सामने आई है। सूत्रों के अनुसार, इसकी जानकारी सतीश चंद्र मिश्रा ने मायावती तक पहुंचाई। इसके बाद मायावती ने मेवालाल गौतम को दोनों नेताओं को अनफॉलो कराने के निर्देश दिए। सोशल मीडिया पर ‘उम्मीदों का आकाश’ ट्रेंड करने से मायावती नाराज आकाश आनंद को लेकर बसपा कार्यकर्ताओं के एक वर्ग में नाराजगी की चर्चा है। सोशल मीडिया पर ‘उम्मीदों का आकाश’ जैसे शब्द ट्रेंड कर रहे हैं। आकाश के समर्थक उनके पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इसे लेकर मायावती तक कुछ लोगों ने इस तरह पेश किया है कि अशोक सिद्धार्थ आकाश के जरिए पार्टी पर कब्जा करना चाहते हैं। इसके बाद से मायावती एक–एक कर कई फैसले ले रही हैं। ईशान को बड़ी जिम्मेदारी, यूपी छोड़कर पूरे देश की समीक्षा बसपा प्रमुख मायावती ने रविवार को संगठनात्मक ढांचे में बड़ा बदलाव किया। उन्होंने देश को तीन सेक्टर में बांटा है। इनमें उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड को अलग रखा गया है, जबकि बाकी राज्यों को दो बड़े सेक्टरों में बांटकर वरिष्ठ नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी है। रामजी गौतम और सुरेश राव को सेक्टर-1 की 10 राज्यों जिम्मेदारी राजाराम और अतर सिंह राव को सेक्टर-2 की 9 राज्यों की जिम्मेदारी रणधीर सिंह बेनीवाल को फिर पंजाब की जिम्मेदारी, हिमाचल भी मिला संगठनात्मक फेरबदल में रणधीर सिंह बेनीवाल की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो गई है। उन्हें सहारनपुर के साथ रामजी गौतम के साथ पंजाब की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके अलावा उन्हें हिमाचल प्रदेश की स्वतंत्र जिम्मेदारी भी दी गई है। इस बदलाव का एक राजनीतिक मतलब यह निकाला जा रहा है कि अशोक सिद्धार्थ के करीबी माने जाने वाले नितिन सिंह से हिमाचल की जिम्मेदारी वापस ले ली गई है। हालांकि, नितिन सिंह को पार्टी से बाहर किए जाने की कोई सूचना नहीं है। मायावती ने अचानक रामजी गौतम, आनंद कुमार और अतर सिंह को बुलाया इन बदलावों के बीच मायावती की सक्रियता भी चर्चा में है। बताया जा रहा है कि मायावती ने अचानक रविवार को अचानक रामजी गौतम, आनंद कुमार और अतर सिंह को बुलाया था। सतीश चंद्र मिश्रा भी वहां पहुंचे। इसके बाद नेताओं के साथ बैठक हुई। बैठक के बाद हुए इस तरह के संगठनात्मक आदेश जारी किए गए। 9 सितंबर को दिल्ली जाने का था कार्यक्रम, अब बदला समीकरण पार्टी से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, मायावती का 9 सितंबर को दिल्ली जाने का कार्यक्रम था। बताया गया था कि उन्होंने आकाश आनंद की पत्नी प्रज्ञा को लंदन से बुलाया था और आकाश की बेटी से मिलने की योजना थी। दिल्ली में ही मायावती ईशान आनंद को लेकर संगठनात्मक घोषणा करने वाली थी, लेकिन आकाश को लेकर किए गए निर्णय के बाद उन्होंने दिल्ली जाने का कार्यक्रम स्थगित कर दिया। यही कारण है कि ईशान को लेकर उन्होंने रविवार को ही फैसले ले लिए। क्या बसपा में अब आकाश की जगह उनके छोटे भाई ईशान लेंगे बसपा में बदलाव की शुरुआत 3 सितंबर की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक से ही दिखाई देने लगी थी। मायावती ने राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक बुलाई थी। इसमें पहली बार उनके छोटे भतीजे और आनंद कुमार के छोटे बेटे ईशान (ईशू) आनंद भी पहुंचे थे। खास बात यह रही कि इस बैठक में आकाश आनंद को नहीं बुलाया गया। इसके बाद आकाश ने सोशल मीडिया बायो में बदलाव कर राष्ट्रीय समन्वयक पद से हटाए जाने का संकेत खुद दिया था। बसपा में यह पूरा घटनाक्रम सिर्फ संगठनात्मक फेरबदल नहीं माना जा रहा। इसके केंद्र में मायावती के बाद पार्टी की अगली पीढ़ी का नेतृत्व भी है। एक तरफ आकाश आनंद लंबे समय से पार्टी की युवा राजनीति का चेहरा रहे हैं। दूसरी तरफ अब ईशान आनंद को राष्ट्रीय स्तर पर संगठन की निगरानी का अधिकार दिया जाना बताता है कि मायावती ने पार्टी के संगठनात्मक ढांचे में ईशान की भूमिका बढ़ाई है। हालांकि, अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि ईशान को आकाश के विकल्प के तौर पर औपचारिक रूप से स्थापित कर दिया गया है। लेकिन आकाश से जुड़े लोगों की जिम्मेदारियों में बदलाव और ईशान को मिली नई भूमिका ने बसपा की अंदरूनी राजनीति में चर्चा जरूर तेज कर दी है। खबर अपडेट हो रही है…

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