Hanuman Ansh-Mirzapur The Movie: फिल्मों की सफलता का पैमाना अक्सर बॉक्स ऑफिस कलेक्शन को माना जाता है, लेकिन निर्देशक अनुभव सिन्हा का मानना है कि हालिया फिल्मों के आंकड़ों में इससे कहीं बड़ी कहानी छिपी हुई है। उन्होंने ‘मिर्जापुर-द मूवी’ और ‘हनुमान अंश’ के प्रदर्शन का जिक्र करते हुए कहा है कि इन दोनों फिल्मों की सफलता को महज अचानक मिली कामयाबी मानना सही नहीं होगा।
अनुभव सिन्हा ने ‘मिर्जापुर’ की टीम को दी बधाई
अनुभव सिन्हा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मिर्जापुर: द मूवी की टीम को शुभकामनाएं दीं। इसी पोस्ट में उन्होंने बॉक्स ऑफिस के बदलते रुझानों की ओर फिल्म इंडस्ट्री का ध्यान खींचने की कोशिश की। उनका कहना था कि अगर बॉक्स ऑफिस के आंकड़ों को ध्यान से समझा जाए तो वे दर्शकों की पसंद के बारे में महत्वपूर्ण संकेत देते हैं। अनुभव सिन्हा ने मिर्जापुर और हनुमान अंश दोनों को ऐसी फिल्मों के उदाहरण के तौर पर देखा, जिनकी कामयाबी को सिर्फ संयोग कहकर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
‘हनुमान अंश’ ने चौंकाया
हनुमान अंश की बॉक्स ऑफिस यात्रा खास तौर पर चर्चा में रही है। करीब 2 करोड़ रुपये के कथित बजट में बनी इस फिल्म ने शुरुआत में बहुत बड़ा कलेक्शन नहीं किया था। रिलीज के पहले दिन फिल्म की कमाई करीब 10 लाख रुपये बताई गई। हालांकि इसके बाद धीरे-धीरे फिल्म को दर्शकों का समर्थन मिलने लगा। सिनेमाघरों में तीन सप्ताह पूरे करने के बाद इसकी कमाई में उल्लेखनीय तेजी देखने को मिली और फिल्म ने घरेलू बॉक्स ऑफिस पर 100 करोड़ रुपये के नेट कलेक्शन का आंकड़ा पार कर लिया।
फिल्म का निर्देशन, लेखन और निर्माण विशाल चतुर्वेदी ने किया है। कम बजट से शुरू हुई इसकी बॉक्स ऑफिस यात्रा अब साल की सबसे चौंकाने वाली सफल फिल्मों में गिनी जा रही है।
‘मिर्जापुर: द मूवी’ की दमदार शुरुआत
दूसरी तरफ मिर्जापुर को पहले से ही लोकप्रिय फ्रेंचाइजी का फायदा मिला। पंकज त्रिपाठी, अली फजल, दिव्येंदु और जितेंद्र कुमार जैसे कलाकारों वाली इस फिल्म ने रिलीज के पहले दिन घरेलू बॉक्स ऑफिस पर करीब 25.75 करोड़ रुपये की कमाई की।
इसके बाद फिल्म का भारत में कुल कलेक्शन 60 करोड़ रुपये के पार पहुंच गया। इससे साफ है कि मिर्जापुर के किरदारों और कहानी को लेकर दर्शकों के बीच अब भी मजबूत दिलचस्पी बनी हुई है।
बदल रही है दर्शकों की पसंद?
अनुभव सिन्हा की टिप्पणी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वह खुद लंबे समय से अलग तरह की और सामाजिक मुद्दों पर आधारित फिल्मों के लिए पहचाने जाते हैं। मुल्क, थप्पड़, अनेक, भीड़ और अस्सी जैसी फिल्मों के जरिए उन्होंने गंभीर विषयों को पर्दे पर पेश किया है।
ऐसे में मिर्जापुर जैसी लोकप्रिय फ्रेंचाइजी और बेहद कम बजट में बनी हनुमान अंश की सफलता को लेकर उनका नजरिया इंडस्ट्री के लिए विचार करने वाला हो सकता है। शायद बॉक्स ऑफिस सिर्फ यह नहीं बता रहा कि कौन सी फिल्म कितनी कमाई कर रही है, बल्कि यह भी संकेत दे रहा है कि दर्शक इस समय किस तरह की कहानियों को सिनेमाघरों तक पहुंचकर देखना चाहते हैं। आने वाले समय में फिल्म इंडस्ट्री इस बदलते दर्शक मिजाज को किस तरह समझती है, ये देखना दिलचस्प होगा।

