मां कालीधाम मंदिर के पास महिला की दुकान पर ताला:बेतिया राज कर्मचारियों ने सामान बाहर फेंका, विरोध करने पर हाथापाई

मां कालीधाम मंदिर के पास महिला की दुकान पर ताला:बेतिया राज कर्मचारियों ने सामान बाहर फेंका, विरोध करने पर हाथापाई

बेतिया के ऐतिहासिक मां कालीधाम मंदिर के गेट के पास लाइब्रेरी की सीढ़ी के नीचे छोटी-सी दुकान चलाकर परिवार का भरण-पोषण करने वाली एक गरीब महिला की दुकान बंद करा दिए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि बेतिया राज के कर्मचारियों ने दुकान में रखा फूल-माला, सिंदूर, टिकली-बिंदी और बच्चों के खिलौनों समेत पूरा सामान बाहर निकाल दिया और दुकान पर ताला लगा दिया। दुकान ही थी परिवार की रोजी-रोटी महिला के मुताबिक, वह लंबे समय से इस छोटी दुकान के जरिए परिवार का गुजारा कर रही थी। मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं को पूजा सामग्री और बच्चों के छोटे खिलौने बेचकर होने वाली आमदनी ही परिवार की आय का प्रमुख साधन थी। दुकान बंद होने के बाद परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। कार्रवाई किसके आदेश पर हुई महिला और उसके परिजनों का आरोप है कि किसी खास व्यक्ति के कहने पर बेतिया राज के कर्मचारियों ने दुकान पर कार्रवाई की। विरोध करने पर कर्मचारियों और महिला के परिजनों के बीच हाथापाई होने का आरोप भी लगाया गया है। हालांकि, कार्रवाई के पीछे बेतिया राज की ओर से क्या कारण बताया गया है, यह स्पष्ट नहीं हो सका है। सिर्फ इसी दुकान पर कार्रवाई क्यों? मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर दुकान बेतिया राज की जमीन पर नियमों के विपरीत संचालित हो रही थी, तो कार्रवाई का आधार क्या था? वहीं, आसपास बेतिया राज की जमीन पर कई अन्य दुकानें भी संचालित होने की बात कही जा रही है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि सिर्फ इसी गरीब परिवार की दुकान को क्यों निशाना बनाया गया? अतिक्रमण हटाना है तो कार्रवाई समान हो अगर प्रशासन या बेतिया राज की ओर से इसे अतिक्रमण या अवैध कब्जे के खिलाफ कार्रवाई बताया जाता है, तो क्या क्षेत्र में संचालित अन्य दुकानों पर भी इसी तरह की कार्रवाई की जाएगी? स्थानीय स्तर पर यह सवाल भी उठ रहा है कि नियम सभी के लिए समान हैं या कार्रवाई चुनिंदा दुकानों तक सीमित रहेगी। प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग एक ओर सरकार गरीब परिवारों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने और आत्मनिर्भर बनाने पर जोर देती है, वहीं दूसरी ओर एक महिला का छोटा रोजगार बंद होने से उसके परिवार की आजीविका प्रभावित हुई है। ऐसे में जिला प्रशासन से मामले का संज्ञान लेकर निष्पक्ष जांच कराने की मांग उठ रही है। प्रशासन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि दुकान पर कार्रवाई किस नियम और किस आदेश के तहत की गई। यदि कार्रवाई नियमानुसार हुई है तो उसकी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए और यदि किसी स्तर पर नियमों की अनदेखी हुई है तो संबंधित पक्ष के खिलाफ उचित कार्रवाई होनी चाहिए। बेतिया के ऐतिहासिक मां कालीधाम मंदिर के गेट के पास लाइब्रेरी की सीढ़ी के नीचे छोटी-सी दुकान चलाकर परिवार का भरण-पोषण करने वाली एक गरीब महिला की दुकान बंद करा दिए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि बेतिया राज के कर्मचारियों ने दुकान में रखा फूल-माला, सिंदूर, टिकली-बिंदी और बच्चों के खिलौनों समेत पूरा सामान बाहर निकाल दिया और दुकान पर ताला लगा दिया। दुकान ही थी परिवार की रोजी-रोटी महिला के मुताबिक, वह लंबे समय से इस छोटी दुकान के जरिए परिवार का गुजारा कर रही थी। मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं को पूजा सामग्री और बच्चों के छोटे खिलौने बेचकर होने वाली आमदनी ही परिवार की आय का प्रमुख साधन थी। दुकान बंद होने के बाद परिवार के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। कार्रवाई किसके आदेश पर हुई महिला और उसके परिजनों का आरोप है कि किसी खास व्यक्ति के कहने पर बेतिया राज के कर्मचारियों ने दुकान पर कार्रवाई की। विरोध करने पर कर्मचारियों और महिला के परिजनों के बीच हाथापाई होने का आरोप भी लगाया गया है। हालांकि, कार्रवाई के पीछे बेतिया राज की ओर से क्या कारण बताया गया है, यह स्पष्ट नहीं हो सका है। सिर्फ इसी दुकान पर कार्रवाई क्यों? मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर दुकान बेतिया राज की जमीन पर नियमों के विपरीत संचालित हो रही थी, तो कार्रवाई का आधार क्या था? वहीं, आसपास बेतिया राज की जमीन पर कई अन्य दुकानें भी संचालित होने की बात कही जा रही है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि सिर्फ इसी गरीब परिवार की दुकान को क्यों निशाना बनाया गया? अतिक्रमण हटाना है तो कार्रवाई समान हो अगर प्रशासन या बेतिया राज की ओर से इसे अतिक्रमण या अवैध कब्जे के खिलाफ कार्रवाई बताया जाता है, तो क्या क्षेत्र में संचालित अन्य दुकानों पर भी इसी तरह की कार्रवाई की जाएगी? स्थानीय स्तर पर यह सवाल भी उठ रहा है कि नियम सभी के लिए समान हैं या कार्रवाई चुनिंदा दुकानों तक सीमित रहेगी। प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग एक ओर सरकार गरीब परिवारों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने और आत्मनिर्भर बनाने पर जोर देती है, वहीं दूसरी ओर एक महिला का छोटा रोजगार बंद होने से उसके परिवार की आजीविका प्रभावित हुई है। ऐसे में जिला प्रशासन से मामले का संज्ञान लेकर निष्पक्ष जांच कराने की मांग उठ रही है। प्रशासन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि दुकान पर कार्रवाई किस नियम और किस आदेश के तहत की गई। यदि कार्रवाई नियमानुसार हुई है तो उसकी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए और यदि किसी स्तर पर नियमों की अनदेखी हुई है तो संबंधित पक्ष के खिलाफ उचित कार्रवाई होनी चाहिए।  

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