पूर्णिया में रविवार की सुबह परमान नदी पर बना पुराना लोहे का पुल ध्वस्त हो गया। पुल से गुजर रहा बालू लदा ओवरलोड ट्रक नदी में गिर गया। पुल टूटने का आभास होते ही ड्राइवर ने ट्रक छलांग लगा दी। जिससे उसकी जान बच गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, घटना रविवार सुबह करीब साढ़े 11 बजे की है। ट्रक जैसे ही नदी के बीच पहुंचा सालों पुराना लोहे का ढांचा दवाब झेल नहीं सका और तेज आवाज के साथ टूट गया। पुल के साथ ट्रक भी परमान नदी में गिर पड़ा। घटना की सूचना मिलते ही आसपास के गांवों से सैकड़ों लोग मौके पर पहुंच गए। हादसे में अमौर और जलालगढ़ के बीच आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया है। घटना अमौर प्रखंड की तियरपाड़ा पंचायत स्थित असियानी घाट की है। हादसे की रिपोर्ट तैयार की जाएगी घटना की पुष्टि करते हुए ग्रामीण कार्य विभाग (आरडब्ल्यूडी) के कार्यपालक अभियंता कालेश्वर प्रसाद ने बताया कि सूचना मिलते ही विभागीय तकनीकी टीम के साथ घटनास्थल के लिए रवाना हो गए हैं। उन्होंने कहा कि पुल ध्वस्त होने के कारणों की जांच की जाएगी और रिपोर्ट भी तैयार होगी। अमौर की अंचलाधिकारी शबीना खातून ने बताया कि एहतियातन राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) को अलर्ट कर दिया गया है। राहत-निगरानी कार्य के लिए टीम को मौके पर पहुंचने का निर्देश दिया गया है।
नए पुल के निर्माण में देरी हादसे के बाद स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी देखने को मिली। ग्रामीणों का कहना है कि असियानी घाट का यह पुल लंबे समय से जर्जर स्थिति में था और इसकी मरम्मत या वैकल्पिक व्यवस्था की मांग लगातार की जा रही थी। लोगों ने बताया कि पुराने पुल के समानांतर करीब ढाई वर्ष पहले नए पक्के पुल का निर्माण कार्य शुरू हुआ था, लेकिन अब तक केवल दो पिलर ही बन पाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि संवेदक और विभागीय अधिकारियों की उदासीनता के कारण निर्माण कार्य बेहद धीमी गति से चल रहा है। यदि नया पुल समय पर बन गया होता तो यह हादसा टाला जा सकता था।
अमौर और जलालगढ़ के बीच गांव हुए प्रभावित अमौर और जलालगढ़ के बीच दर्जनों गांवों का संपर्क प्रभावित हुआ है। लोगों को कई किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय कर वैकल्पिक मार्गों का सहारा लेना पड़ रहा है। व्यापार, शिक्षा और दैनिक जीवन से जुड़े कार्यों पर भी इसका असर पड़ने लगा है। ग्रामीणों ने प्रशासन पर अवैध बालू खनन और ओवरलोड वाहनों के संचालन पर कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि क्षेत्र में लंबे समय से भारी वाहनों का निर्बाध परिचालन हो रहा था, जिससे जर्जर पुल पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा था। लोगों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषी अधिकारियों, ठेकेदारों और अवैध खनन से जुड़े लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। पूर्णिया में रविवार की सुबह परमान नदी पर बना पुराना लोहे का पुल ध्वस्त हो गया। पुल से गुजर रहा बालू लदा ओवरलोड ट्रक नदी में गिर गया। पुल टूटने का आभास होते ही ड्राइवर ने ट्रक छलांग लगा दी। जिससे उसकी जान बच गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, घटना रविवार सुबह करीब साढ़े 11 बजे की है। ट्रक जैसे ही नदी के बीच पहुंचा सालों पुराना लोहे का ढांचा दवाब झेल नहीं सका और तेज आवाज के साथ टूट गया। पुल के साथ ट्रक भी परमान नदी में गिर पड़ा। घटना की सूचना मिलते ही आसपास के गांवों से सैकड़ों लोग मौके पर पहुंच गए। हादसे में अमौर और जलालगढ़ के बीच आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया है। घटना अमौर प्रखंड की तियरपाड़ा पंचायत स्थित असियानी घाट की है। हादसे की रिपोर्ट तैयार की जाएगी घटना की पुष्टि करते हुए ग्रामीण कार्य विभाग (आरडब्ल्यूडी) के कार्यपालक अभियंता कालेश्वर प्रसाद ने बताया कि सूचना मिलते ही विभागीय तकनीकी टीम के साथ घटनास्थल के लिए रवाना हो गए हैं। उन्होंने कहा कि पुल ध्वस्त होने के कारणों की जांच की जाएगी और रिपोर्ट भी तैयार होगी। अमौर की अंचलाधिकारी शबीना खातून ने बताया कि एहतियातन राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) को अलर्ट कर दिया गया है। राहत-निगरानी कार्य के लिए टीम को मौके पर पहुंचने का निर्देश दिया गया है।
नए पुल के निर्माण में देरी हादसे के बाद स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी देखने को मिली। ग्रामीणों का कहना है कि असियानी घाट का यह पुल लंबे समय से जर्जर स्थिति में था और इसकी मरम्मत या वैकल्पिक व्यवस्था की मांग लगातार की जा रही थी। लोगों ने बताया कि पुराने पुल के समानांतर करीब ढाई वर्ष पहले नए पक्के पुल का निर्माण कार्य शुरू हुआ था, लेकिन अब तक केवल दो पिलर ही बन पाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि संवेदक और विभागीय अधिकारियों की उदासीनता के कारण निर्माण कार्य बेहद धीमी गति से चल रहा है। यदि नया पुल समय पर बन गया होता तो यह हादसा टाला जा सकता था।
अमौर और जलालगढ़ के बीच गांव हुए प्रभावित अमौर और जलालगढ़ के बीच दर्जनों गांवों का संपर्क प्रभावित हुआ है। लोगों को कई किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय कर वैकल्पिक मार्गों का सहारा लेना पड़ रहा है। व्यापार, शिक्षा और दैनिक जीवन से जुड़े कार्यों पर भी इसका असर पड़ने लगा है। ग्रामीणों ने प्रशासन पर अवैध बालू खनन और ओवरलोड वाहनों के संचालन पर कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि क्षेत्र में लंबे समय से भारी वाहनों का निर्बाध परिचालन हो रहा था, जिससे जर्जर पुल पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा था। लोगों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषी अधिकारियों, ठेकेदारों और अवैध खनन से जुड़े लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

