डीएम-एसपी के आदेशों पर भारी पड़ रही ऑर्केस्ट्रा की नर्तकियां:महाराजगंज में 10-11 सितंबर के आमंत्रण ने खोली प्रशासनिक दावों की पोल

डीएम-एसपी के आदेशों पर भारी पड़ रही ऑर्केस्ट्रा की नर्तकियां:महाराजगंज में 10-11 सितंबर के आमंत्रण ने खोली प्रशासनिक दावों की पोल

सीवान में महावीरी जुलूस और मेले को लेकर जिला प्रशासन के सख्त आदेशों के बावजूद डीजे और ऑर्केस्ट्रा का खेल थमने का नाम नहीं ले रहा है। एक ओर जिलाधिकारी विजय प्रकाश मीणा और पुलिस अधीक्षक भारत सोनी लगातार बैठकों में डीजे और ऑर्केस्ट्रा पर पूर्ण प्रतिबंध की बात दोहरा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर गांव-गांव में इन आदेशों की खुलेआम अनदेखी के वीडियो और तस्वीरें सामने आ रही हैं। अब ऑर्केस्ट्रा की नर्तकियां सोशल मीडिया पर पोस्ट डालकर खुद कार्यक्रमों में पहुंचने की घोषणा कर रही हैं, जिससे प्रशासन के सख्त दावों और जमीनी हकीकत के बीच का अंतर साफ दिखाई देने लगा है। गांवों में बड़े-बड़े ट्रॉली पर लगाए जा रहे DJ डीएम और एसपी के पदभार संभालने के बाद से महावीरी जुलूस के चुनौतीपूर्ण महीने को शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण तरीके से संपन्न कराने के लिए लगातार प्रखंड स्तर पर बैठकें की जा रही हैं। शांति समिति और अखाड़ा समितियों के साथ बैठकों में अधिकारियों की ओर से स्पष्ट रूप से कहा गया है कि किसी भी स्थिति में डीजे और ऑर्केस्ट्रा का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। मीडिया के सामने भी यही दावा किया गया कि समितियों ने प्रशासन को इस संबंध में भरोसा दिया है। इसके बावजूद मेला शुरू होते ही तस्वीर बदलती नजर आ रही है। जिले के अलग-अलग गांवों में बड़े-बड़े ट्रॉली पर ऊंचे डीजे लगाए जा रहे हैं। तेज आवाज में गाने बज रहे हैं और उन पर नर्तकियों के कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं। कई जगहों पर डीजे की ऊंचाई इतनी अधिक दिखाई दे रही है कि संकरी सड़कों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में दुर्घटना की आशंका बनी हुई है। प्रशासनिक आदेशों के बावजूद ऐसे कार्यक्रमों का जारी रहना पुलिस-प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। ऑर्केस्ट्रा की नर्तकियों पोस्ट डालकर लोगों को बुला रही सबसे गंभीर तस्वीर महाराजगंज से सामने आ रही है। यहां एसडीओ और एसडीपीओ स्तर के अधिकारी लगातार अखाड़ा समितियों के साथ बैठक कर प्रतिबंधित गतिविधियों पर रोक की बात कर चुके हैं। इसके बावजूद सोशल मीडिया पर कई लोकप्रिय अंतरराज्यीय ऑर्केस्ट्रा से जुड़ी नर्तकियों की पोस्ट सामने आई है, जिसमें 10 और 11 सितंबर को आयोजित होने वाले मौनिया बाबा मेले में पहुंचने की सूचना देते हुए लोगों को आमंत्रित किया गया है। जिस कार्यक्रम को लेकर प्रशासनिक स्तर पर प्रतिबंध की बात कही जा रही है, उसी कार्यक्रम का सोशल मीडिया पर खुले तौर पर प्रचार हो रहा है। स्थिति यह है कि सोशल मीडिया मॉनिटरिंग की बात करने वाला प्रशासन उन पोस्ट और वीडियो पर समय रहते कार्रवाई करता दिखाई नहीं दे रहा है। अगर किसी आयोजन में डीजे और ऑर्केस्ट्रा प्रतिबंधित है तो कार्यक्रम की घोषणा सार्वजनिक होने के बाद उस पर रोक की कार्रवाई पहले होनी चाहिए, न कि आयोजन के बाद एफआईआर दर्ज कराकर प्रक्रिया पूरी की जाए। लगातार उल्लंघन के बावजूद केवल संबंधित आयोजकों पर प्राथमिकी दर्ज होना और प्रतिबंध के बावजूद कार्यक्रमों का पहले से प्रचारित होना व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल खड़ा करता है। आदेश पालन नहीं करने वालों पर होगी कार्रवाई पुलिस अधीक्षक भारत सोनी ने भी स्पष्ट किया है कि सरकार का संकल्प है और सभी को उसका पालन करना होगा। उन्होंने कहा कि डीजे और ऑर्केस्ट्रा हर स्थिति में प्रतिबंधित रहेगा तथा जहां इसका अनुपालन नहीं हो रहा है, वहां संबंधित लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जा रही है। लेकिन जमीनी स्तर पर सवाल यही है कि जब प्रशासन को पहले से पता है कि किन क्षेत्रों में मेले और जुलूस होने हैं, तो संभावित उल्लंघन करने वालों को पहले से चिन्हित कर रोकथाम की कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है। महाराजगंज जैसे संवेदनशील इलाके में यह स्थिति और गंभीर हो जाती है। यहां 10 और 11 सितंबर के कार्यक्रम के लिए सोशल मीडिया पर सार्वजनिक आमंत्रण जारी होना बताता है कि आयोजकों को प्रतिबंध की जानकारी होने के बावजूद कार्यक्रम की तैयारी और प्रचार जारी है। यदि प्रशासन वास्तव में डीजे और ऑर्केस्ट्रा पर पूर्ण प्रतिबंध को लेकर गंभीर है तो कार्यक्रम से पहले ही इसे रोकने की कार्रवाई अपेक्षित है।
पिछले साल विवाद और तनाव की थी स्थिति पिछले वर्षों का अनुभव भी प्रशासन के सामने है। महावीरी जुलूस और मेले के दौरान जिले के अलग-अलग हिस्सों में विवाद और तनाव की स्थिति बनती रही है। बड़हरिया में पिछले वर्ष स्थिति इतनी बिगड़ी थी कि तत्कालीन थानाध्यक्ष के सिर में चोट आई थी, जबकि महाराजगंज में भी धार्मिक विवाद की स्थिति सामने आ चुकी है। इसके बाद इंटरनेट बंद करने, बड़े पैमाने पर पुलिस बल तैनात करने और गिरफ्तारियों जैसी कार्रवाई करनी पड़ती रही है। ऐसी स्थिति बनने से पहले रोकथाम करना ही प्रशासन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। इस बार डीएम विजय प्रकाश मीणा और एसपी भारत सोनी ने शुरुआत से ही सख्ती का संदेश दिया है। महाराजगंज एसडीपीओ स्तर पर भी बैठकों और निर्देशों का दौर चला है। अब असली परीक्षा उन आदेशों की जमीन पर अमल की है। खासकर 10 और 11 सितंबर के मौनिया बाबा मेले में सोशल मीडिया पर सार्वजनिक रूप से घोषित ऑर्केस्ट्रा कार्यक्रम के खिलाफ समय रहते कार्रवाई होती है या प्रतिबंध के बावजूद कार्यक्रम को होने दिया जाता है, यह आने वाले दिनों में प्रशासन की तैयारियों और उसकी सख्ती की वास्तविक तस्वीर सामने रखेगा। सीवान में महावीरी जुलूस और मेले को लेकर जिला प्रशासन के सख्त आदेशों के बावजूद डीजे और ऑर्केस्ट्रा का खेल थमने का नाम नहीं ले रहा है। एक ओर जिलाधिकारी विजय प्रकाश मीणा और पुलिस अधीक्षक भारत सोनी लगातार बैठकों में डीजे और ऑर्केस्ट्रा पर पूर्ण प्रतिबंध की बात दोहरा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर गांव-गांव में इन आदेशों की खुलेआम अनदेखी के वीडियो और तस्वीरें सामने आ रही हैं। अब ऑर्केस्ट्रा की नर्तकियां सोशल मीडिया पर पोस्ट डालकर खुद कार्यक्रमों में पहुंचने की घोषणा कर रही हैं, जिससे प्रशासन के सख्त दावों और जमीनी हकीकत के बीच का अंतर साफ दिखाई देने लगा है। गांवों में बड़े-बड़े ट्रॉली पर लगाए जा रहे DJ डीएम और एसपी के पदभार संभालने के बाद से महावीरी जुलूस के चुनौतीपूर्ण महीने को शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण तरीके से संपन्न कराने के लिए लगातार प्रखंड स्तर पर बैठकें की जा रही हैं। शांति समिति और अखाड़ा समितियों के साथ बैठकों में अधिकारियों की ओर से स्पष्ट रूप से कहा गया है कि किसी भी स्थिति में डीजे और ऑर्केस्ट्रा का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। मीडिया के सामने भी यही दावा किया गया कि समितियों ने प्रशासन को इस संबंध में भरोसा दिया है। इसके बावजूद मेला शुरू होते ही तस्वीर बदलती नजर आ रही है। जिले के अलग-अलग गांवों में बड़े-बड़े ट्रॉली पर ऊंचे डीजे लगाए जा रहे हैं। तेज आवाज में गाने बज रहे हैं और उन पर नर्तकियों के कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं। कई जगहों पर डीजे की ऊंचाई इतनी अधिक दिखाई दे रही है कि संकरी सड़कों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में दुर्घटना की आशंका बनी हुई है। प्रशासनिक आदेशों के बावजूद ऐसे कार्यक्रमों का जारी रहना पुलिस-प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। ऑर्केस्ट्रा की नर्तकियों पोस्ट डालकर लोगों को बुला रही सबसे गंभीर तस्वीर महाराजगंज से सामने आ रही है। यहां एसडीओ और एसडीपीओ स्तर के अधिकारी लगातार अखाड़ा समितियों के साथ बैठक कर प्रतिबंधित गतिविधियों पर रोक की बात कर चुके हैं। इसके बावजूद सोशल मीडिया पर कई लोकप्रिय अंतरराज्यीय ऑर्केस्ट्रा से जुड़ी नर्तकियों की पोस्ट सामने आई है, जिसमें 10 और 11 सितंबर को आयोजित होने वाले मौनिया बाबा मेले में पहुंचने की सूचना देते हुए लोगों को आमंत्रित किया गया है। जिस कार्यक्रम को लेकर प्रशासनिक स्तर पर प्रतिबंध की बात कही जा रही है, उसी कार्यक्रम का सोशल मीडिया पर खुले तौर पर प्रचार हो रहा है। स्थिति यह है कि सोशल मीडिया मॉनिटरिंग की बात करने वाला प्रशासन उन पोस्ट और वीडियो पर समय रहते कार्रवाई करता दिखाई नहीं दे रहा है। अगर किसी आयोजन में डीजे और ऑर्केस्ट्रा प्रतिबंधित है तो कार्यक्रम की घोषणा सार्वजनिक होने के बाद उस पर रोक की कार्रवाई पहले होनी चाहिए, न कि आयोजन के बाद एफआईआर दर्ज कराकर प्रक्रिया पूरी की जाए। लगातार उल्लंघन के बावजूद केवल संबंधित आयोजकों पर प्राथमिकी दर्ज होना और प्रतिबंध के बावजूद कार्यक्रमों का पहले से प्रचारित होना व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल खड़ा करता है। आदेश पालन नहीं करने वालों पर होगी कार्रवाई पुलिस अधीक्षक भारत सोनी ने भी स्पष्ट किया है कि सरकार का संकल्प है और सभी को उसका पालन करना होगा। उन्होंने कहा कि डीजे और ऑर्केस्ट्रा हर स्थिति में प्रतिबंधित रहेगा तथा जहां इसका अनुपालन नहीं हो रहा है, वहां संबंधित लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जा रही है। लेकिन जमीनी स्तर पर सवाल यही है कि जब प्रशासन को पहले से पता है कि किन क्षेत्रों में मेले और जुलूस होने हैं, तो संभावित उल्लंघन करने वालों को पहले से चिन्हित कर रोकथाम की कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है। महाराजगंज जैसे संवेदनशील इलाके में यह स्थिति और गंभीर हो जाती है। यहां 10 और 11 सितंबर के कार्यक्रम के लिए सोशल मीडिया पर सार्वजनिक आमंत्रण जारी होना बताता है कि आयोजकों को प्रतिबंध की जानकारी होने के बावजूद कार्यक्रम की तैयारी और प्रचार जारी है। यदि प्रशासन वास्तव में डीजे और ऑर्केस्ट्रा पर पूर्ण प्रतिबंध को लेकर गंभीर है तो कार्यक्रम से पहले ही इसे रोकने की कार्रवाई अपेक्षित है।
पिछले साल विवाद और तनाव की थी स्थिति पिछले वर्षों का अनुभव भी प्रशासन के सामने है। महावीरी जुलूस और मेले के दौरान जिले के अलग-अलग हिस्सों में विवाद और तनाव की स्थिति बनती रही है। बड़हरिया में पिछले वर्ष स्थिति इतनी बिगड़ी थी कि तत्कालीन थानाध्यक्ष के सिर में चोट आई थी, जबकि महाराजगंज में भी धार्मिक विवाद की स्थिति सामने आ चुकी है। इसके बाद इंटरनेट बंद करने, बड़े पैमाने पर पुलिस बल तैनात करने और गिरफ्तारियों जैसी कार्रवाई करनी पड़ती रही है। ऐसी स्थिति बनने से पहले रोकथाम करना ही प्रशासन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। इस बार डीएम विजय प्रकाश मीणा और एसपी भारत सोनी ने शुरुआत से ही सख्ती का संदेश दिया है। महाराजगंज एसडीपीओ स्तर पर भी बैठकों और निर्देशों का दौर चला है। अब असली परीक्षा उन आदेशों की जमीन पर अमल की है। खासकर 10 और 11 सितंबर के मौनिया बाबा मेले में सोशल मीडिया पर सार्वजनिक रूप से घोषित ऑर्केस्ट्रा कार्यक्रम के खिलाफ समय रहते कार्रवाई होती है या प्रतिबंध के बावजूद कार्यक्रम को होने दिया जाता है, यह आने वाले दिनों में प्रशासन की तैयारियों और उसकी सख्ती की वास्तविक तस्वीर सामने रखेगा।  

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