उज्जैन के महाकाल मंदिर से रामघाट जाने वाले प्राचीन मार्ग पर स्थित ऐतिहासिक महाकाल द्वार देर रात अचानक भरभराकर गिर गया। घटना के समय द्वार के आसपास कोई व्यक्ति मौजूद नहीं था, जिसके चलते जनहानि टल गई। सूचना मिलते ही रविवार सुबह स्मार्ट सिटी के अधिकारी मौके पर पहुंचे और घटनास्थल का निरीक्षण किया। अधिकारियों के मुताबिक, महाकाल द्वार के समीप निर्माण कार्य के दौरान गहरी खुदाई चल रही है। पिछले दो-तीन दिनों से लगातार हो रही बारिश के कारण मिट्टी में नमी बढ़ने और जमीन के सेटलमेंट की वजह से द्वार की संरचना प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, हादसे की वास्तविक वजह जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। कार्यपालन यंत्री कमल सक्सेना ने बताया कि प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, हादसा रात को हुआ है,आसपास डीप एक्सकेवेशन का काम चल रहा था और लगातार बारिश भी हुई है। ऐसे में जमीन के धंसने यानी सेटलमेंट के कारण द्वार के गिरने की आशंका है। उन्होंने बताया कि हादसे में किसी प्रकार की जनहानि या अन्य नुकसान की जानकारी नहीं है। महाकाल मंदिर से करीब 100 मीटर दूर स्थित यह द्वार रामघाट जाने वाले पुराने मार्ग का महत्वपूर्ण हिस्सा है। लंबे समय से जीर्ण-शीर्ण स्थिति में होने के कारण यह रास्ता बंद था। उज्जैन स्मार्ट सिटी लिमिटेड की महाकाल मंदिर परिसर विस्तार परियोजना के तहत करीब 2.12 करोड़ रुपए की लागत से इसके जीर्णोद्धार का काम किया जा रहा था। इस द्वार के जीर्णोद्धार में आधुनिक सीमेंट के बजाय पारंपरिक चूना तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा था। चंदेरी और ललितपुर से आए कारीगर चूना, गुड़, मैथी, गूगल,उड़द के पानी, ईंट के चूरे और रेत जैसे पारंपरिक मिश्रण से निर्माण कार्य कर रहे थे। कारीगरों का दावा था कि यह तकनीक ऐतिहासिक संरचनाओं को लंबे समय तक मजबूती प्रदान करती है। बताया जाता है कि महाकाल द्वार ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है और इसे मध्यकालीन काल से रामघाट और महाकाल मंदिर के बीच संपर्क मार्ग के रूप में उपयोग किया जाता रहा है। द्वार के गिरने के बाद अब निर्माण गुणवत्ता, आसपास चल रही खुदाई और जमीन की स्थिति को लेकर जांच की जा रही है। जानिए कितना पुराना है महाकाल द्वार श्री महाकालेश्वर मंदिर के उत्तर में स्थित यह स्थान ‘महाकाल द्वार’ के नाम से जाना जाता है। यह ऐतिहासिक द्वार लगभग 14वीं शताब्दी ईस्वी के आरंभ का माना जाता है। इसका निर्माण बेसाल्ट पत्थर और ईंटों से किया गया है। महाकाल द्वार परिसर में एक मेहराबदार प्रवेश द्वार, पत्थर की सीढ़ियां, मंदिर से प्राप्त नक्काशीदार पत्थरों के अवशेष और एक पुराना मार्ग मौजूद है। सदियों से इस द्वार का उपयोग स्थानीय लोगों और तीर्थयात्रियों द्वारा रामघाट को श्री महाकालेश्वर मंदिर से जोड़ने वाले मार्ग के रूप में किया जाता रहा है। इसकी स्थापत्य विशेषताओं से पता चलता है कि मध्ययुग में दिल्ली के तीसरे सुल्तान द्वारा किए गए विनाश के बाद इस स्थल का अलग-अलग कालखंडों में जीर्णोद्धार हुआ। 18वीं शताब्दी में सिंधिया शासन के दौरान और आधुनिक दौर में सिंहस्थ कुंभ (2004) के समय भी यहां पुनरुद्धार कार्य किए गए। इसके बाद 2021 में उज्जैन स्मार्ट सिटी लिमिटेड द्वारा एक योजना के तहत महाकाल द्वार का पुनर्विकास किया गया। उज्जैन के महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर स्थलों में इसका विशेष महत्व है।

