10 अगस्त को ख्यांगते को किया था गिरफ्तार जेपीएससी की भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी मामले में जेल में बद जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष एल ख्यांगते को जमानत नहीं मिली। अपर न्यायायुक्त (प्रथम) योगेश कुमार की कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने दो दिन पहले जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया था।
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि यह मामला गंभीर है और आरोपी काफी प्रभावशाली है। आरोपी के जेल से निकलने से जांच प्रभावित हो सकती है। जांच अभी प्रारंभिक अवस्था में है। ऐसे में आरोपी को जमानत पर छोड़ा जाना उचित नहीं है। इससे पहले सुनवाई के दौरान ख्यांगते के वकील ने कोर्ट को बताया कि उनके खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं है। छापेमारी में उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं मिला है। वहीं सीआईडी की ओर से बताया गया कि टीडीपीएल को परीक्षा आयोजन का काम देने में उनकी भूमिका रही है। टीडीपीएल की ओर से ली जाने वाली परीक्षाओं में पारदर्शिता नहीं बरती गई। ख्यांगते को इसकी पूरी जानकारी थी, लेकिन उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की। सीआईडी के वकील ने कोर्ट को बताया कि अन्य आरोपियों ने ख्यांगते पर टीडीपीएल से दो करोड़ रुपए कमीशन लेने की भी बात कही है। मास्टरमाइंड अभय तिवारी ने भी लिया है नाम सीआईडी के वकील ने कोर्ट में कहा कि जेपीएससी नियुक्ति घोटाले के किंगपिन अभय तिवारी ने स्वीकारोक्ति बयान में एल ख्यांगते के घोटाले में शामिल होने की बात कही है। उसने यह भी कहा है कि टीडीपीएल को परीक्षा आयोजित करने की एजेंसी के रूप में चयन करने में ख्यांगते की अहम भूमिका रही है। सीआईडी को पूछताछ में पता चला – टीडीपीएल को ठेका दिलाने के लिए ख्यांगते ने की थी डील भर्ती परीक्षा में गड़बड़ी मिलने पर सीआईडी ने जेपीएससी कार्यालय में छापेमारी की थी। इसके बाद एल ख्यांगते ने अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद उनसे कई दौर की पूछताछ की गई। इसी दौरान सीआईडी को पूछताछ में पता चला कि टीडीपीएल को ठेका दिलाने के एवज में ख्यांगते ने दो करोड़ रुपए में डील की थी। यही नहीं, उन्होंने टीडीपीएल को इस शर्त के साथ परीक्षा संचालित करने की जिम्मेदारी सौंपी थी कि एजेंसी को सभी भुगतान के एवज में 20 प्रतिशत कमीशन भी देना होगा। इसके बाद 10 अगस्त को सीआईडी ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया।

