जेएसएससी सीजीएल परीक्षा में धांधली मामले में सीआईडी की कार्रवाई निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। सीआईडी ने अब इस परीक्षा में सफल सभी 1932 अभ्यर्थियों की पड़ताल शुरू कर दी है। जांच एजेंसी का पूरा फोकस अब यह पता लगाने में है कि कौन-कौन से अभ्यर्थी सिंडिकेट की मदद से गलत तरीके से पास हुए। आरंभिक जांच में एसआईटी को ऐसे पुख्ता सबूत मिले हैं कि पेपर लीक के जरिए 125 से ज्यादा अभ्यर्थी सफल हुए थे और अभी वे नौकरी कर रहे हैं। अब परीक्षा से 10 दिन पहले और 10 दिन बाद के कॉल डंप और मोबाइल लोकेशन से इनका सिंडिकेट से कनेक्शन की जांच हो रही है। जांच एजेंसी 20 दिन के भीतर ऐसे सभी अभ्यर्थियों की रिपोर्ट तैयार कर लेगी। इसी बीच शनिवार को दूसरे दिन भी सीआईडी की टीम जेएसएससी ऑफिस पहुंची। शाम सात बजे तक कागजात खंगाले। सीआईडी ने अब तक 125 ऐसे सफल अभ्यर्थियों का डेटा तैयार किया है, जिनका सिंडिकेट से कनेक्शन रहा है। इनमें वे 28 अभ्यर्थी भी शामिल हैं, जिन्हें परीक्षा से पहले उत्तर रटवाने के लिए नेपाल ले जाया गया था। इस मामले में गलत तरीके से सफल हुए अभय तिवारी, उसकी पत्नी और भाई सहित सात अभ्यर्थियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। इस मामले में सीआईउी अब तक करीब 300 संदिग्धों से पूछताछ कर चुकी है। इसमें पता चला है कि सिंडिकेट ने पास कराने के लिए मोटी रकम में डील की थी। इसमें कुछ रकम एडवांस ली गई थी और कुछ रिजल्ट के बाद। इन 5 बिंदुओं पर सफल अभ्यर्थियों की हो रही जांच 1: ओएमआर शीट का विश्लेषण: सीआईडी ने सफल अभ्यथियों की ओएमआर शीट अपने कब्जे में ले लिया है। इसमें देखा जा रहा है कि अभ्यर्थियों ने कुल कितने सवालों के जवाब दिए। उनमें कितने सही थे। उत्तर देने का कोई असामान्य पैटर्न तो नहीं है। 2: मोबाइल लोकेशन: परीक्षा की तारीख से 10 दिन पहले अभ्यर्थियों का मोबाइल लोकेशन कहां थ्ज्ञा। क्या वह परीक्षा केंद्र वाले जिले से बाहर किसी संदिग्ध ठिकाने (बिहार, नेपाल या सीमावर्ती क्षे) पर तो नहीं था। 3: कॉल डंप: परीक्षा से 10 दिन पहले और 10 दिन बाद तक अभ्यर्थी के मोबाइल नंबर के कॉल डिटेल रिकॉर्ड और कॉल डंप का मिलान किया जा रहा है। इससे पता चलेगा कि वह किन-किन लोगों के संपर्क में था। 4: सिंडिकेट से बातचीत का मिलान: कॉल डेटा के जरिए यह ट्रैक किया जा रहा है कि अभ्यर्थी के संपर्क सूत्र कहीं पेपर लीक करने वाले सिंडिकेट, सॉल्वर गैंग या पूर्व में पकड़े गए दलालो से तो सीधे नहीं जुड़े हुए हैं। 5: रिजल्ट के बाद की गतिविधियां: रिजल्ट के बाद अभ्यथियों ने अपने मोबाइल से किन-किन लोगों से बात की। क्या किसी संदिग्ध व्यक्ति या दलाल से लगातार कॉल कर सफलता की सूचना दी या लेनदेन की बात की। इन 28 अभ्यर्थियों को नेपाल में रटवाए उत्तर फर्जी तरीके से पास हुए तो बचना मुश्किल परीक्षा हॉल में भले ही अभ्यर्थी ने चुपचाप ओएमआर शीट भर दी हो, लेकिन परीक्षा से पहले के 10 दिन और रिजल्ट के बाद के फोन कॉल्स का डिजिटल फुटप्रिंट कभी नहीं मिटता। सीआईडी जिस तरह मोबाइल टावर डंप, सीडीआर और ओएमआर पैटर्न को एक साथ रखकर जांच कर रही है, उससे साफ है कि फर्जी तरीके से नौकरी पाने वाले किसी भी अभ्यर्थी का बच निकलना अब नामुमकिन है। आने वाले 15 से 20 दिन झारखंड की प्रशासनिक व्यवस्था और हजारों ईमानदार युवाओं के भविष्य के लिहाज से बेहद निर्णायक साबित होंगे। जेएसएससी सीजीएल परीक्षा में धांधली मामले में सीआईडी की कार्रवाई निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। सीआईडी ने अब इस परीक्षा में सफल सभी 1932 अभ्यर्थियों की पड़ताल शुरू कर दी है। जांच एजेंसी का पूरा फोकस अब यह पता लगाने में है कि कौन-कौन से अभ्यर्थी सिंडिकेट की मदद से गलत तरीके से पास हुए। आरंभिक जांच में एसआईटी को ऐसे पुख्ता सबूत मिले हैं कि पेपर लीक के जरिए 125 से ज्यादा अभ्यर्थी सफल हुए थे और अभी वे नौकरी कर रहे हैं। अब परीक्षा से 10 दिन पहले और 10 दिन बाद के कॉल डंप और मोबाइल लोकेशन से इनका सिंडिकेट से कनेक्शन की जांच हो रही है। जांच एजेंसी 20 दिन के भीतर ऐसे सभी अभ्यर्थियों की रिपोर्ट तैयार कर लेगी। इसी बीच शनिवार को दूसरे दिन भी सीआईडी की टीम जेएसएससी ऑफिस पहुंची। शाम सात बजे तक कागजात खंगाले। सीआईडी ने अब तक 125 ऐसे सफल अभ्यर्थियों का डेटा तैयार किया है, जिनका सिंडिकेट से कनेक्शन रहा है। इनमें वे 28 अभ्यर्थी भी शामिल हैं, जिन्हें परीक्षा से पहले उत्तर रटवाने के लिए नेपाल ले जाया गया था। इस मामले में गलत तरीके से सफल हुए अभय तिवारी, उसकी पत्नी और भाई सहित सात अभ्यर्थियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। इस मामले में सीआईउी अब तक करीब 300 संदिग्धों से पूछताछ कर चुकी है। इसमें पता चला है कि सिंडिकेट ने पास कराने के लिए मोटी रकम में डील की थी। इसमें कुछ रकम एडवांस ली गई थी और कुछ रिजल्ट के बाद। इन 5 बिंदुओं पर सफल अभ्यर्थियों की हो रही जांच 1: ओएमआर शीट का विश्लेषण: सीआईडी ने सफल अभ्यथियों की ओएमआर शीट अपने कब्जे में ले लिया है। इसमें देखा जा रहा है कि अभ्यर्थियों ने कुल कितने सवालों के जवाब दिए। उनमें कितने सही थे। उत्तर देने का कोई असामान्य पैटर्न तो नहीं है। 2: मोबाइल लोकेशन: परीक्षा की तारीख से 10 दिन पहले अभ्यर्थियों का मोबाइल लोकेशन कहां थ्ज्ञा। क्या वह परीक्षा केंद्र वाले जिले से बाहर किसी संदिग्ध ठिकाने (बिहार, नेपाल या सीमावर्ती क्षे) पर तो नहीं था। 3: कॉल डंप: परीक्षा से 10 दिन पहले और 10 दिन बाद तक अभ्यर्थी के मोबाइल नंबर के कॉल डिटेल रिकॉर्ड और कॉल डंप का मिलान किया जा रहा है। इससे पता चलेगा कि वह किन-किन लोगों के संपर्क में था। 4: सिंडिकेट से बातचीत का मिलान: कॉल डेटा के जरिए यह ट्रैक किया जा रहा है कि अभ्यर्थी के संपर्क सूत्र कहीं पेपर लीक करने वाले सिंडिकेट, सॉल्वर गैंग या पूर्व में पकड़े गए दलालो से तो सीधे नहीं जुड़े हुए हैं। 5: रिजल्ट के बाद की गतिविधियां: रिजल्ट के बाद अभ्यथियों ने अपने मोबाइल से किन-किन लोगों से बात की। क्या किसी संदिग्ध व्यक्ति या दलाल से लगातार कॉल कर सफलता की सूचना दी या लेनदेन की बात की। इन 28 अभ्यर्थियों को नेपाल में रटवाए उत्तर फर्जी तरीके से पास हुए तो बचना मुश्किल परीक्षा हॉल में भले ही अभ्यर्थी ने चुपचाप ओएमआर शीट भर दी हो, लेकिन परीक्षा से पहले के 10 दिन और रिजल्ट के बाद के फोन कॉल्स का डिजिटल फुटप्रिंट कभी नहीं मिटता। सीआईडी जिस तरह मोबाइल टावर डंप, सीडीआर और ओएमआर पैटर्न को एक साथ रखकर जांच कर रही है, उससे साफ है कि फर्जी तरीके से नौकरी पाने वाले किसी भी अभ्यर्थी का बच निकलना अब नामुमकिन है। आने वाले 15 से 20 दिन झारखंड की प्रशासनिक व्यवस्था और हजारों ईमानदार युवाओं के भविष्य के लिहाज से बेहद निर्णायक साबित होंगे।

