गुजरात में लिव-इन-पार्टनर की बस स्टैंड पर हत्या:पुलिस आरोपी को घसीटकर घटनास्थल लाई, डंडों से पीटा; कहा- अपराध क्रूर था, सख्ती जरूरी

गुजरात में लिव-इन-पार्टनर की बस स्टैंड पर हत्या:पुलिस आरोपी को घसीटकर घटनास्थल लाई, डंडों से पीटा; कहा- अपराध क्रूर था, सख्ती जरूरी

गुजरात के भावनगर में अपनी लिव-इन पार्टनर की हत्या के आरोपी की पुलिस ने सरेआम पिटाई कर दी। पुलिस आरोपी को क्राइम सीन रीक्रिएट करने के लिए उसी बस स्टैंड पर लेकर पहुंची थी, जहां उसने महिला पर हमला किया था। इसी दौरान पुलिस ने आरोपी को रस्सियों से बांधा, घसीटा और डंडे से पीटा। इस घटना का वीडियो शनिवार को वायरल हो रहा है। वीडियो में आरोपी फैजल लखानी को रस्सियों से बंधा देखा जा सकता है। पुलिसकर्मी उसे घसीटते हुए ले जा रहे हैं और डंडे से उसकी पिटाई कर रहे हैं। महिला की मौत के बाद हत्या का केस दर्ज पुलिस के मुताबिक, मृतका काजल बरैया और फैजल लखानी करीब 7 साल से साथ रह रहे थे। दोनों फुटपाथ पर रहते थे। आरोपी के खिलाफ पहले से भी कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें लूट और अन्य गंभीर अपराध शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, जेल से बाहर आने के बाद फैजल को पता चला कि काजल उसके परिचित रवि के साथ रिश्ते में है। इसी बात को लेकर गुरुवार को दोनों के बीच विवाद हुआ। आरोप है कि फैजल ने काजल और रवि के साथ मारपीट की। गंभीर रूप से घायल काजल को भावनगर के सरकारी सर टी. अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इसके बाद पुलिस ने शुक्रवार को फैजल को हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर लिया। पुलिस बोली- लोगों का भरोसा खत्म हो रहा था नीलमबाग पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर डीपी उनादकट ने पुलिस की कार्रवाई का बचाव किया। उनका कहना है कि आरोपी ने महिला पर बेहद बेरहमी से हमला किया था और यह घटना लोगों के सामने हुई थी। पुलिस अधिकारी के मुताबिक, आरोपी द्वारा महिला की सरेआम पिटाई का वीडियो सामने आने के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे। लोगों में यह धारणा बनने लगी कि अपराधी महिलाओं पर हमला कर रहे हैं और पुलिस कुछ नहीं कर पा रही। उनादकट ने कहा कि ऐसे गंभीर मामलों में अपराधियों को कड़ा संदेश देने की जरूरत होती है। उन्होंने पुलिस की ओर से की गई पिटाई को इसी वजह से जरूरी बताया। गुजरात में सरेआम आरोपी को पीटने पर कार्रवाई का प्रावधान पुलिस की इस कार्रवाई पर इसलिए भी सवाल उठ रहे हैं क्योंकि गुजरात में पुलिसकर्मियों द्वारा आरोपियों को सार्वजनिक रूप से पीटने जैसी कार्रवाई पर रोक के निर्देश जारी किए जा चुके हैं। गुजरात हाईकोर्ट में एक स्वतः संज्ञान वाली जनहित याचिका (PIL) की सुनवाई के दौरान बताया गया था कि राज्य के गृह विभाग ने 7 मई को एक सर्कुलर जारी किया था। इसमें पुलिसकर्मियों को आरोपियों को सार्वजनिक जगह पर उठक-बैठक कराने, घुटनों के बल रेंगने के लिए मजबूर करने, लात मारने या डंडे से पीटने जैसी कार्रवाई से रोक दिया गया था। सर्कुलर के मुताबिक, ऐसा करने वाले पुलिस अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई की जाएगी। संबंधित क्षेत्र के वरिष्ठ अधिकारियों को भी इसके लिए जिम्मेदार माना जाएगा।

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