मधुपुर में भूमि अंश निर्धारण में गड़बड़ी का आरोप:तत्कालीन लेखपाल पर मिलीभगत का आरोप, पीड़ितों ने जिलाधिकारी से की शिकायत

मधुपुर में भूमि अंश निर्धारण में गड़बड़ी का आरोप:तत्कालीन लेखपाल पर मिलीभगत का आरोप, पीड़ितों ने जिलाधिकारी से की शिकायत

सोनभद्र के रॉबर्ट्सगंज तहसील के मधुपुर गांव में संयुक्त भूमि के अंश निर्धारण को लेकर विवाद सामने आया है। भृगुनाथ, अजय पाल, विजय पाल और संजय कुमार पाल समेत अन्य सहखातेदारों ने तत्कालीन लेखपाल पर विपक्षी पक्ष से मिलीभगत कर बिना जानकारी दिए अंश निर्धारण करने का आरोप लगाया है। पीड़ितों ने जिलाधिकारी से शिकायत कर मामले की जांच और कार्रवाई की मांग की है। खतौनी की नकल निकलवाने पर पता चला मामला पीड़ितों का कहना है कि अंश निर्धारण की प्रक्रिया के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं दी गई। न तो उन्हें नोटिस की जानकारी मिली और न ही उनके हस्ताक्षर लिए गए। बाद में जब उन्होंने तहसील से खतौनी की नकल निकलवाई, तब अंश निर्धारण में कथित गड़बड़ी का पता चला। संयुक्त जमीन में हिस्सा घटाने का आरोप भृगुनाथ और संजय कुमार पाल के मुताबिक, मधुपुर मौजे की जमीन संख्या 954, 955 और 961 सभी सहखातेदारों के नाम संयुक्त रूप से दर्ज है। परिवार के लोग आपसी बंटवारे के आधार पर जमीन पर खेती करते आ रहे हैं। आरोप है कि करीब एक महीने पहले तत्कालीन लेखपाल ने विपक्षी पक्ष से मिलीभगत कर अंश निर्धारण कर दिया। भृगुनाथ ने आरोप लगाया, “जमीन पुरानी और संयुक्त है। हमें बिना बताए और हमारी सहमति के बिना अंश निर्धारण कर दिया गया। वंशावली के हिसाब से हमारा हिस्सा आधा बनता है, लेकिन खतौनी में उसे घटाकर चौथाई कर दिया गया है।” लेखपाल से जवाब नहीं मिलने का आरोप पीड़ितों के अनुसार, अंश निर्धारण के बाद उन्होंने तत्कालीन लेखपाल से संपर्क किया, लेकिन उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इसी बीच लेखपाल का तबादला भी हो गया। पीड़ितों ने आशंका जताई कि उनके हिस्से की जमीन पर दूसरे पक्ष को अधिकार देने के बाद उसे किसी तीसरे व्यक्ति को बेचा या हस्तांतरित किया जा सकता है। संजय कुमार पाल ने कहा, “हमें अंश निर्धारण की कोई जानकारी नहीं दी गई। जब खतौनी निकलवाई, तब पूरे मामले का पता चला। अगर समय रहते इसमें सुधार नहीं हुआ तो विपक्षी जमीन बेच सकता है और बाद में हमें सालों तक कोर्ट-कचहरी करनी पड़ सकती है।” डीएम से निष्पक्ष जांच की मांग पीड़ितों ने जिलाधिकारी से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और कथित गलत अंश निर्धारण को निरस्त कर वास्तविक हिस्सेदारी निर्धारित कराने की मांग की है। साथ ही जमीन को किसी तीसरे व्यक्ति के पक्ष में हस्तांतरित किए जाने की आशंका को देखते हुए संबंधित लेखपाल के खिलाफ कार्रवाई की भी मांग की है।

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