शिक्षक दिवस के मौके पर देशभर में जहां शिक्षकों का सम्मान किया जाता है, वहीं बिहार के कैमूर जिले में शिक्षक अपनी मांगों और शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘शिक्षक सत्याग्रह आंदोलन’ के तहत धरने पर बैठे। यह आंदोलन बिहार राज्य प्रारंभिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप कुमार पप्पू के कहने पर किया गया। धरना स्थल पर बिहार राज्य प्रारंभिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष संतोष कुमार प्रसाद ने बताया कि प्राथमिक, माध्यमिक, उच्च माध्यमिक और नियोजित शिक्षकों की कुल 28 से 29 मांगें हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपनी ही नियमावली का पालन नहीं कर रही है। भ्रष्टाचार खत्म करने बड़ा कदम उठाएगा संघ नियमावली के मुताबिक, 12 साल की सेवा पूरी कर चुके शिक्षकों को समय पर प्रमोशन मिलना चाहिए। लेकिन, जब वित्तीय लाभ देने की बात आती है, तो सरकार अपने वादों से पीछे हट जाती है। संतोष प्रसाद ने जिला शिक्षा कार्यालय में फैले भ्रष्टाचार पर गुस्सा जाहिर करते हुए कहा कि शिक्षकों से पैसे लेकर काम किया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर काम करने के तरीके में सुधार नहीं हुआ, तो संघ भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए बड़ा कदम उठाएगा। सड़क से लेकर कोर्ट तक लड़ाई लड़ने की चेतावनी संघ की जिला इकाई कैमूर की प्रधान सचिव सीमा कुमारी ने बताया कि शिक्षकों का दो-दो महीने का वेतन बिना किसी वजह के रोक दिया जाता है। इससे उनके घरों में दिक्कतें आती हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रमोशन और सर्विस बुक में एंट्री के नाम पर जिला शिक्षा कार्यालय में रिश्वत मांगी जाती है। शिक्षकों ने साफ किया कि उन्हें अब तक सिर्फ झूठे आश्वासन मिले हैं। वे अब ठोस आदेश चाहते हैं। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि अगर जिला स्तर पर उनकी समस्याओं का हल नहीं हुआ, तो वे सड़क से लेकर कोर्ट तक लड़ाई लड़ेंगे और इसे एक बड़े राज्यव्यापी आंदोलन में बदल देंगे। शिक्षक दिवस के मौके पर देशभर में जहां शिक्षकों का सम्मान किया जाता है, वहीं बिहार के कैमूर जिले में शिक्षक अपनी मांगों और शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘शिक्षक सत्याग्रह आंदोलन’ के तहत धरने पर बैठे। यह आंदोलन बिहार राज्य प्रारंभिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप कुमार पप्पू के कहने पर किया गया। धरना स्थल पर बिहार राज्य प्रारंभिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष संतोष कुमार प्रसाद ने बताया कि प्राथमिक, माध्यमिक, उच्च माध्यमिक और नियोजित शिक्षकों की कुल 28 से 29 मांगें हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपनी ही नियमावली का पालन नहीं कर रही है। भ्रष्टाचार खत्म करने बड़ा कदम उठाएगा संघ नियमावली के मुताबिक, 12 साल की सेवा पूरी कर चुके शिक्षकों को समय पर प्रमोशन मिलना चाहिए। लेकिन, जब वित्तीय लाभ देने की बात आती है, तो सरकार अपने वादों से पीछे हट जाती है। संतोष प्रसाद ने जिला शिक्षा कार्यालय में फैले भ्रष्टाचार पर गुस्सा जाहिर करते हुए कहा कि शिक्षकों से पैसे लेकर काम किया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर काम करने के तरीके में सुधार नहीं हुआ, तो संघ भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए बड़ा कदम उठाएगा। सड़क से लेकर कोर्ट तक लड़ाई लड़ने की चेतावनी संघ की जिला इकाई कैमूर की प्रधान सचिव सीमा कुमारी ने बताया कि शिक्षकों का दो-दो महीने का वेतन बिना किसी वजह के रोक दिया जाता है। इससे उनके घरों में दिक्कतें आती हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रमोशन और सर्विस बुक में एंट्री के नाम पर जिला शिक्षा कार्यालय में रिश्वत मांगी जाती है। शिक्षकों ने साफ किया कि उन्हें अब तक सिर्फ झूठे आश्वासन मिले हैं। वे अब ठोस आदेश चाहते हैं। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि अगर जिला स्तर पर उनकी समस्याओं का हल नहीं हुआ, तो वे सड़क से लेकर कोर्ट तक लड़ाई लड़ेंगे और इसे एक बड़े राज्यव्यापी आंदोलन में बदल देंगे।

