कोसी में जलस्तर बढ़ने से निचले इलाकों में घुसा पानी:मधेपुरा के 2 प्रखंडों के एक दर्जन गांवों में समस्या, 55 जगहों पर नावें उतारीं

कोसी में जलस्तर बढ़ने से निचले इलाकों में घुसा पानी:मधेपुरा के 2 प्रखंडों के एक दर्जन गांवों में समस्या, 55 जगहों पर नावें उतारीं

मधेपुरा में कोसी नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। इससे चौसा और आलमनगर प्रखंड के निचले इलाकों में पानी फैल गया है। कई गांवों में पानी पहुंचने से ग्रामीणों की परेशानी बढ़ गई है। निचले इलाकों में आवागमन पर असर पड़ने के साथ मवेशियों के लिए चारा जुटाना भी मुश्किल हो गया है। जलस्तर में लगातार वृद्धि से ग्रामीणों में बाढ़ की आशंका बढ़ गई है। हालात को देखते हुए जिला प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में नावें चलना शुरू कर दिया है। एडीएम (आपदा) मुकेश कुमार ने बताया कि चौसा प्रखंड में 16 निजी और 3 सरकारी नावें चल रही हैं। वहीं, आलमनगर में 36 जगहों पर निजी नावें चलाई जा रही हैं। इसके अलावा मोटरबोट और SDRF की टीम भी तैनात हैं। आपात स्थिति में तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू करने की तैयारी है। लोगों से अलर्ट रहने की अपील एडीएम ने बताया कि निचले इलाकों में पानी आने से कुछ रास्ते बंद हो गए हैं। प्रशासन हालात पर लगातार नजर रख रहा है। जरूरत पड़ने पर प्रभावित लोगों के लिए सामुदायिक रसोई शुरू करने और उन्हें सुरक्षित जगहों पर पहुंचाने की तैयारी भी है। लोगों से घबराने के बजाय सतर्क रहने की अपील की गई है। कोसी के बढ़ते जलस्तर का असर अब स्कूलों पर भी दिखने लगा है। चौसा प्रखंड के फुलौत में तियर टोला उत्क्रमित उच्च माध्यमिक विद्यालय परिसर में नदी का पानी घुस गया है। सांप-बिच्छू आने की आशंका से डरे स्टूडेंट और पैरेंट्स परिसर में पानी जमा होने से बच्चों की हाजिरी पर असर पड़ने लगा है। वहीं, स्कूल परिसर में सांप-बिच्छू आने की आशंका के चलते छात्रों और अभिभावकों में डर बना हुआ है। छात्रों ने बताया कि हर साल बाढ़ के दौरान स्कूल परिसर में पानी भर जाता है। इसके कारण करीब दो महीने तक पढ़ाई पर असर पड़ता है। छात्रों के मुताबिक बाढ़ के समय कई बार शिक्षकों को दूसरे स्कूलों में भेज दिए जाने से पढ़ाई पर और ज्यादा असर पड़ता है। परिसर में पानी जमा होने से परेशानी विद्यालय के प्रधान शिक्षक राजेश कुमार ने बताया कि पिछले दिन से निचले इलाके में पानी बढ़ने के कारण विद्यालय परिसर में पानी प्रवेश किया है। पानी आने की आशंका को देखते हुए विद्यालय के जरूरी सामानों को ऊपरी मंजिल पर सुरक्षित रख दिया गया है। फिलहाल विद्यालय में कक्षाएं संचालित की जा रही हैं, लेकिन परिसर में पानी जमा होने से परेशानी बढ़ गई है। बच्चों की सुरक्षा को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है। प्रभावित गांवों में बढ़ सकता है बाढ़ का खतरा आलमनगर विधानसभा क्षेत्र के विधायक सह बिहार विधानसभा के उपाध्यक्ष नरेंद्र नारायण यादव ने कहा कि वे अपने क्षेत्र की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। निचले इलाकों में पानी पहुंचा है और जिला प्रशासन भी स्थिति की लगातार निगरानी कर रहा है। लगातार बारिश और कोसी के बढ़ते जलस्तर का असर मधेपुरा-खगड़िया-भागलपुर सीमा क्षेत्र से गुजरने वाली कोसी की सहायक नदियों पर भी दिखाई दे रहा है। कई इलाकों में पानी फैलने लगा है। यदि जलस्तर में वृद्धि जारी रही तो आने वाले दिनों में प्रभावित गांवों में बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है। फिलहाल ग्रामीणों में चिंता का माहौल है, जबकि प्रशासन ने किसी भी परिस्थिति से निपटने के लिए पूरी तैयारी का दावा किया है। मधेपुरा में कोसी नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। इससे चौसा और आलमनगर प्रखंड के निचले इलाकों में पानी फैल गया है। कई गांवों में पानी पहुंचने से ग्रामीणों की परेशानी बढ़ गई है। निचले इलाकों में आवागमन पर असर पड़ने के साथ मवेशियों के लिए चारा जुटाना भी मुश्किल हो गया है। जलस्तर में लगातार वृद्धि से ग्रामीणों में बाढ़ की आशंका बढ़ गई है। हालात को देखते हुए जिला प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में नावें चलना शुरू कर दिया है। एडीएम (आपदा) मुकेश कुमार ने बताया कि चौसा प्रखंड में 16 निजी और 3 सरकारी नावें चल रही हैं। वहीं, आलमनगर में 36 जगहों पर निजी नावें चलाई जा रही हैं। इसके अलावा मोटरबोट और SDRF की टीम भी तैनात हैं। आपात स्थिति में तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू करने की तैयारी है। लोगों से अलर्ट रहने की अपील एडीएम ने बताया कि निचले इलाकों में पानी आने से कुछ रास्ते बंद हो गए हैं। प्रशासन हालात पर लगातार नजर रख रहा है। जरूरत पड़ने पर प्रभावित लोगों के लिए सामुदायिक रसोई शुरू करने और उन्हें सुरक्षित जगहों पर पहुंचाने की तैयारी भी है। लोगों से घबराने के बजाय सतर्क रहने की अपील की गई है। कोसी के बढ़ते जलस्तर का असर अब स्कूलों पर भी दिखने लगा है। चौसा प्रखंड के फुलौत में तियर टोला उत्क्रमित उच्च माध्यमिक विद्यालय परिसर में नदी का पानी घुस गया है। सांप-बिच्छू आने की आशंका से डरे स्टूडेंट और पैरेंट्स परिसर में पानी जमा होने से बच्चों की हाजिरी पर असर पड़ने लगा है। वहीं, स्कूल परिसर में सांप-बिच्छू आने की आशंका के चलते छात्रों और अभिभावकों में डर बना हुआ है। छात्रों ने बताया कि हर साल बाढ़ के दौरान स्कूल परिसर में पानी भर जाता है। इसके कारण करीब दो महीने तक पढ़ाई पर असर पड़ता है। छात्रों के मुताबिक बाढ़ के समय कई बार शिक्षकों को दूसरे स्कूलों में भेज दिए जाने से पढ़ाई पर और ज्यादा असर पड़ता है। परिसर में पानी जमा होने से परेशानी विद्यालय के प्रधान शिक्षक राजेश कुमार ने बताया कि पिछले दिन से निचले इलाके में पानी बढ़ने के कारण विद्यालय परिसर में पानी प्रवेश किया है। पानी आने की आशंका को देखते हुए विद्यालय के जरूरी सामानों को ऊपरी मंजिल पर सुरक्षित रख दिया गया है। फिलहाल विद्यालय में कक्षाएं संचालित की जा रही हैं, लेकिन परिसर में पानी जमा होने से परेशानी बढ़ गई है। बच्चों की सुरक्षा को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है। प्रभावित गांवों में बढ़ सकता है बाढ़ का खतरा आलमनगर विधानसभा क्षेत्र के विधायक सह बिहार विधानसभा के उपाध्यक्ष नरेंद्र नारायण यादव ने कहा कि वे अपने क्षेत्र की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। निचले इलाकों में पानी पहुंचा है और जिला प्रशासन भी स्थिति की लगातार निगरानी कर रहा है। लगातार बारिश और कोसी के बढ़ते जलस्तर का असर मधेपुरा-खगड़िया-भागलपुर सीमा क्षेत्र से गुजरने वाली कोसी की सहायक नदियों पर भी दिखाई दे रहा है। कई इलाकों में पानी फैलने लगा है। यदि जलस्तर में वृद्धि जारी रही तो आने वाले दिनों में प्रभावित गांवों में बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है। फिलहाल ग्रामीणों में चिंता का माहौल है, जबकि प्रशासन ने किसी भी परिस्थिति से निपटने के लिए पूरी तैयारी का दावा किया है।  

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