कुशीनगर के रामकोला थाना क्षेत्र के परवरपार गांव में शनिवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया, जब एक मां अपनी नौ वर्षीय बेटी के इलाज के लिए आर्थिक मदद की आस में एयरटेल के मोबाइल टावर पर चढ़ गई। टावर के ऊपर पहुंचने के बाद महिला बार-बार नीचे कूदकर जान देने की धमकी देने लगी। महिला को टावर पर चढ़ा देखकर ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई। सूचना मिलने पर डायल-112 और रामकोला पुलिस मौके पर पहुंची। करीब दो घंटे तक पुलिस ने महिला को समझाया, उसकी समस्या सुनी और बच्ची के इलाज में हरसंभव सहयोग का भरोसा दिया। इसके बाद महिला सुरक्षित नीचे उतर आई। परवरपार गांव की खटिक टोली निवासी 35 वर्षीय उषा देवी शनिवार सुबह करीब सात बजे अचानक गांव के पास लगे मोबाइल टावर पर चढ़ गईं। कुछ ही देर में ग्रामीणों की नजर महिला पर पड़ी तो गांव में अफरा-तफरी मच गई। लोगों ने आवाज देकर उषा देवी को नीचे आने के लिए समझाने की कोशिश की, लेकिन वह अपनी नौ वर्षीय बेटी गुड़िया के इलाज की समस्या बताते हुए टावर से नीचे कूदने की धमकी देती रहीं। मामला गंभीर होने पर ग्रामीणों ने डायल-112 और रामकोला थाने की पुलिस को सूचना दी। पति भी टावर पर चढ़कर समझाने पहुंचे उषा देवी को नीचे उतारने के लिए उनके पति मूरत ने भी प्रयास किया। बताया गया कि वह खुद टावर पर चढ़े और पत्नी को समझाने की कोशिश की, लेकिन उषा नीचे आने के लिए तैयार नहीं हुईं। महिला बार-बार अपनी बेटी की बीमारी और इलाज के लिए पैसे नहीं जुटा पाने की परेशानी बता रही थीं। उनकी बात सुनकर मौके पर मौजूद ग्रामीण भी भावुक हो गए। सभी की कोशिश थी कि किसी तरह महिला को सुरक्षित नीचे उतारा जाए। परिजनों के अनुसार, करीब छह महीने पहले गुड़िया स्कूल में खेलते समय गिर गई थी। हादसे में उसके पैर में चोट आई थी। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के बावजूद माता-पिता ने बच्ची को आसपास के कई निजी अस्पतालों में दिखाया। परिजनों का कहना है कि बच्ची की हालत में सुधार नहीं हुआ। इलाज के दौरान कई बार एक्स-रे भी कराया गया। इसके बावजूद चोट ठीक नहीं हुई तो माता-पिता उसे अलग-अलग डॉक्टरों के पास लेकर भटकते रहे। पैर में सड़न शुरू हुई तो बढ़ी परेशानी कुछ दिन पहले बच्ची के पैर में सड़न शुरू होने की बात परिजनों ने बताई। इसके बाद स्थानीय डॉक्टरों ने इलाज करने में असमर्थता जताई और बच्ची को लखनऊ ले जाने की सलाह दी। लखनऊ में इलाज कराने की बात सुनकर परिवार की चिंता और बढ़ गई। निजी स्तर पर इलाज कराने में पहले ही काफी खर्च हो चुका था। अब बड़े शहर में इलाज का खर्च जुटाना परिवार के लिए बड़ी चुनौती बन गया। उषा देवी के पति मूरत गांव और आसपास के इलाकों में कबाड़ खरीदने-बेचने का काम करते हैं। इसी से होने वाली आमदनी से परिवार का गुजारा चलता है। सीमित आमदनी के कारण बेटी के लंबे इलाज का खर्च उठाना उनके लिए मुश्किल हो गया। परिजनों के मुताबिक, ग्रामीणों ने पहले भी आपस में चंदा जुटाकर बच्ची के इलाज और दवाइयों के लिए मदद की थी। लेकिन बीमारी बढ़ने के बाद आगे के इलाज के लिए बड़ी रकम की जरूरत बताई गई, जिसे जुटा पाना परिवार के लिए मुश्किल हो गया। शनिवार सुबह इन्हीं परेशानियों के बीच उषा देवी टावर पर चढ़ गईं। वह अपनी बेटी का इलाज न करा पाने की चिंता में बेहद परेशान थीं। टावर के ऊपर से वह बार-बार अपनी बात बताती रहीं और नीचे कूदने की धमकी देती रहीं। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने काफी देर तक उन्हें शांत करने का प्रयास किया। पुलिस ने महिला की बात सुनी और भरोसा दिलाया कि बच्ची के इलाज में हरसंभव सहयोग किया जाएगा। इसके बाद करीब दो घंटे की समझाइश के बाद उषा देवी टावर से सुरक्षित नीचे उतर आईं। ग्रामीणों की भी जुटी भीड़ महिला के टावर पर चढ़ने की खबर फैलते ही आसपास के ग्रामीण बड़ी संख्या में मौके पर पहुंच गए थे। लोगों की चिंता महिला और उसकी सुरक्षा को लेकर बनी हुई थी। सभी की नजर पुलिस की समझाइश और महिला के नीचे उतरने पर टिकी रही। महिला के सुरक्षित नीचे उतरने के बाद ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। इसके बाद परिवार के लोगों ने भी उन्हें संभाला। परिवार के सामने इस समय सबसे बड़ी चिंता नौ वर्षीय गुड़िया के इलाज की है। परिजन चाहते हैं कि बच्ची को बेहतर उपचार मिल सके, लेकिन आर्थिक स्थिति रास्ते में सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है। घटना ने एक बार फिर यह सवाल भी खड़ा किया है कि गंभीर बीमारी से जूझ रहे गरीब परिवारों तक समय पर इलाज और आर्थिक सहायता किस तरह पहुंचाई जाए। ग्रामीणों का कहना है कि बच्ची के इलाज के लिए अब सामूहिक और प्रशासनिक मदद की जरूरत है।

