जन्माष्टमी के मौके पर पटना के अलग-अलग अस्पतालों में 45 बच्चों ने जन्म लिया। नवजात बच्चों की किलकारियों से अस्पताल परिसर में उत्सव जैसा माहौल दिखा। कई परिवारों के लिए त्योहार की खुशियां दोगुनी हो गईं। कहीं मिठाइयां बांटी गईं तो कहीं सोहर और भजन गूंजे। कई परिजनों ने अपने नवजात में भगवान श्रीकृष्ण और राधा की छवि देखी। पीएमसीएच में 15 बच्चों का जन्म, परिवारों ने मनाई खुशियां शहर के सबसे बड़े अस्पताल पीएमसीएच में जन्माष्टमी के दिन रात 12 बजे से शुक्रवार रात तक 15 बच्चों का जन्म हुआ। अस्पताल अधीक्षक राजीव कुमार सिंह के मुताबिक, इनमें 10 लड़के और 5 लड़कियां शामिल हैं। 9 बच्चों का जन्म सिजेरियन और 6 का सामान्य प्रसव से हुआ। गुरु गोविंद सिंह अस्पताल में 12 बच्चों ने लिया जन्म पटना सिटी के गुरु गोविंद सिंह अस्पताल में जन्माष्टमी के दिन 12 बच्चों का जन्म हुआ। इनमें 7 लड़के और 5 लड़कियां थीं। इन नवजातों के आने से कई परिवारों की जन्माष्टमी पर्व और भी खास बन गई। गर्दनीबाग अस्पताल में 4 बच्चों का जन्म गर्दनीबाग अस्पताल में जन्माष्टमी के दिन 4 बच्चों का जन्म हुआ। इनमें 3 लड़के और 1 लड़की शामिल हैं। अस्पताल के मुताबिक, सभी चार बच्चों का जन्म सिजेरियन डिलीवरी से हुआ। IGIMS अस्पताल में 15 बच्चों का जन्म IGIMS अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक, जन्माष्टमी के दिन अस्पताल में 15 बच्चों का जन्म हुआ है। इनमें 9 लड़के और 6 लड़कियां शामिल हैं। चिकित्सकीय परिस्थितियों पर तय होती है डिलीवरी की तारीख अस्पताल के प्रबंधक शब्बीर आलम ने बताया, ‘बच्चे के जन्म का समय मुख्य रूप से प्राकृतिक प्रक्रिया और चिकित्सकीय परिस्थितियों पर निर्भर करता है। हालांकि, सामान्य प्रसव का समय प्राकृतिक प्रक्रिया के अनुसार ही निर्धारित होता है।’
नवजात में परिजनों को दिखी कृष्ण और राधा की छवि जन्माष्टमी के दिन बच्चे के जन्म से उत्साहित कई परिवार अपने नवजात को भगवान श्रीकृष्ण और राधा के रूप में देख रहे हैं। कुछ परिवारों ने बच्चों को कृष्ण और राधा की तरह सजाया, जबकि कई परिजनों ने बच्चों का नाम भगवान श्रीकृष्ण या राधा से जुड़ा रखने की बात कही। जन्माष्टमी के दिन पोता हुआ, ये भगवान का आशीर्वाद – पंकज सिंह नवजात के दादा पंकज सिंह ने कहा कि जन्माष्टमी के दिन पोते का जन्म उनके परिवार के लिए बेहद खास पल है। उन्होंने इसे भगवान श्रीकृष्ण का आशीर्वाद और शुभ संयोग बताया। वहीं, अमरावती देवी ने बताया कि वह जन्माष्टमी के दिन नानी बनी हैं। बच्चे के जन्म की खुशी पहले से ही थी, लेकिन जन्माष्टमी के दिन नाती के आने से परिवार की खुशी दोगुनी हो गई। उन्होंने इसे बेहद शुभ संयोग बताया। हमारे घर जन्माष्टमी पर आए नंदलाल- रेणु देवी रेणु देवी ने बताया कि जन्माष्टमी के दिन बेटे का जन्म होने के बाद परिवार ने उसका नाम भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ा रखने का फैसला किया है। उनके अनुसार अस्पताल में भी पूरे दिन खुशी और उत्सव जैसा माहौल बना रहा। सिद्धार्थ के घर 35 साल बाद बेटी का जन्म हुआ फुलवारी निवासी सिद्धार्थ के घर 35 साल बाद जन्माष्टमी के दिन बेटी का जन्म हुआ। सात साल बाद पिता बने सिद्धार्थ ने बेटी का नाम राधा रखने का फैसला किया। उन्होंने कहा, “वर्षों की तपस्या और भगवान के आशीर्वाद से बेटी हुई है। आज डिस्चार्ज के बाद पत्नी नेहा को घर ले जाने के लिए गाड़ी को गुब्बारों से सजाकर अस्पताल पहुंचा हूं। पूरे परिवार में उत्सव का माहौल है।” मिठाई बांटी, सोहर और भजनों से मनाया जश्न जिन परिवारों में जन्माष्टमी के दिन नवजात का जन्म हुआ, उन्होंने इस मौके को उत्सव की तरह मनाया। कई परिवारों ने मिठाइयां बांटीं। कहीं सोहर गाए गए तो कहीं भजन-कीर्तन हुआ। परिजनों ने मंदिर में प्रसाद चढ़ाने की बात भी कही। किलकारियों के बीच अस्पताल बना उत्सव का केंद्र नवजात बच्चों की किलकारियों और परिजनों की खुशियों के बीच अस्पतालों का माहौल जन्माष्टमी के रंग में रंगा नजर आया। परिवारों के साथ अस्पताल कर्मचारी भी इस खुशी में शामिल हुए। कई परिवारों के लिए इस बार जन्माष्टमी सिर्फ एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि परिवार में नए जीवन के आगमन का यादगार उत्सव बन गई। जन्माष्टमी के मौके पर पटना के अलग-अलग अस्पतालों में 45 बच्चों ने जन्म लिया। नवजात बच्चों की किलकारियों से अस्पताल परिसर में उत्सव जैसा माहौल दिखा। कई परिवारों के लिए त्योहार की खुशियां दोगुनी हो गईं। कहीं मिठाइयां बांटी गईं तो कहीं सोहर और भजन गूंजे। कई परिजनों ने अपने नवजात में भगवान श्रीकृष्ण और राधा की छवि देखी। पीएमसीएच में 15 बच्चों का जन्म, परिवारों ने मनाई खुशियां शहर के सबसे बड़े अस्पताल पीएमसीएच में जन्माष्टमी के दिन रात 12 बजे से शुक्रवार रात तक 15 बच्चों का जन्म हुआ। अस्पताल अधीक्षक राजीव कुमार सिंह के मुताबिक, इनमें 10 लड़के और 5 लड़कियां शामिल हैं। 9 बच्चों का जन्म सिजेरियन और 6 का सामान्य प्रसव से हुआ। गुरु गोविंद सिंह अस्पताल में 12 बच्चों ने लिया जन्म पटना सिटी के गुरु गोविंद सिंह अस्पताल में जन्माष्टमी के दिन 12 बच्चों का जन्म हुआ। इनमें 7 लड़के और 5 लड़कियां थीं। इन नवजातों के आने से कई परिवारों की जन्माष्टमी पर्व और भी खास बन गई। गर्दनीबाग अस्पताल में 4 बच्चों का जन्म गर्दनीबाग अस्पताल में जन्माष्टमी के दिन 4 बच्चों का जन्म हुआ। इनमें 3 लड़के और 1 लड़की शामिल हैं। अस्पताल के मुताबिक, सभी चार बच्चों का जन्म सिजेरियन डिलीवरी से हुआ। IGIMS अस्पताल में 15 बच्चों का जन्म IGIMS अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक, जन्माष्टमी के दिन अस्पताल में 15 बच्चों का जन्म हुआ है। इनमें 9 लड़के और 6 लड़कियां शामिल हैं। चिकित्सकीय परिस्थितियों पर तय होती है डिलीवरी की तारीख अस्पताल के प्रबंधक शब्बीर आलम ने बताया, ‘बच्चे के जन्म का समय मुख्य रूप से प्राकृतिक प्रक्रिया और चिकित्सकीय परिस्थितियों पर निर्भर करता है। हालांकि, सामान्य प्रसव का समय प्राकृतिक प्रक्रिया के अनुसार ही निर्धारित होता है।’
नवजात में परिजनों को दिखी कृष्ण और राधा की छवि जन्माष्टमी के दिन बच्चे के जन्म से उत्साहित कई परिवार अपने नवजात को भगवान श्रीकृष्ण और राधा के रूप में देख रहे हैं। कुछ परिवारों ने बच्चों को कृष्ण और राधा की तरह सजाया, जबकि कई परिजनों ने बच्चों का नाम भगवान श्रीकृष्ण या राधा से जुड़ा रखने की बात कही। जन्माष्टमी के दिन पोता हुआ, ये भगवान का आशीर्वाद – पंकज सिंह नवजात के दादा पंकज सिंह ने कहा कि जन्माष्टमी के दिन पोते का जन्म उनके परिवार के लिए बेहद खास पल है। उन्होंने इसे भगवान श्रीकृष्ण का आशीर्वाद और शुभ संयोग बताया। वहीं, अमरावती देवी ने बताया कि वह जन्माष्टमी के दिन नानी बनी हैं। बच्चे के जन्म की खुशी पहले से ही थी, लेकिन जन्माष्टमी के दिन नाती के आने से परिवार की खुशी दोगुनी हो गई। उन्होंने इसे बेहद शुभ संयोग बताया। हमारे घर जन्माष्टमी पर आए नंदलाल- रेणु देवी रेणु देवी ने बताया कि जन्माष्टमी के दिन बेटे का जन्म होने के बाद परिवार ने उसका नाम भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ा रखने का फैसला किया है। उनके अनुसार अस्पताल में भी पूरे दिन खुशी और उत्सव जैसा माहौल बना रहा। सिद्धार्थ के घर 35 साल बाद बेटी का जन्म हुआ फुलवारी निवासी सिद्धार्थ के घर 35 साल बाद जन्माष्टमी के दिन बेटी का जन्म हुआ। सात साल बाद पिता बने सिद्धार्थ ने बेटी का नाम राधा रखने का फैसला किया। उन्होंने कहा, “वर्षों की तपस्या और भगवान के आशीर्वाद से बेटी हुई है। आज डिस्चार्ज के बाद पत्नी नेहा को घर ले जाने के लिए गाड़ी को गुब्बारों से सजाकर अस्पताल पहुंचा हूं। पूरे परिवार में उत्सव का माहौल है।” मिठाई बांटी, सोहर और भजनों से मनाया जश्न जिन परिवारों में जन्माष्टमी के दिन नवजात का जन्म हुआ, उन्होंने इस मौके को उत्सव की तरह मनाया। कई परिवारों ने मिठाइयां बांटीं। कहीं सोहर गाए गए तो कहीं भजन-कीर्तन हुआ। परिजनों ने मंदिर में प्रसाद चढ़ाने की बात भी कही। किलकारियों के बीच अस्पताल बना उत्सव का केंद्र नवजात बच्चों की किलकारियों और परिजनों की खुशियों के बीच अस्पतालों का माहौल जन्माष्टमी के रंग में रंगा नजर आया। परिवारों के साथ अस्पताल कर्मचारी भी इस खुशी में शामिल हुए। कई परिवारों के लिए इस बार जन्माष्टमी सिर्फ एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि परिवार में नए जीवन के आगमन का यादगार उत्सव बन गई।

