कुछ सपने आंखों से नहीं, हौसलों से देखे जाते हैं। इसका जीता-जागता उदाहरण हैं इटावा के दिव्यांग टीचर और इंजीनियर प्रकाश सोनी। प्रकाश आंखों से देख नहीं सकते। इसके बावजूद बच्चों को शिक्षा दे रहे हैं। उनके पढ़ाए स्टूडेंट्स एसडीएम, डिप्टी एसपी, इंजीनियर समेत कई महत्वपूर्ण पदों पर पहुंच चुके हैं। प्रकाश की रेटिना अपनी जगह से खिसक गई थी, जिसके बाद उनकी आंखों की रोशनी चली गई। इसके बाद भी उन्होंने हौसला नहीं हारा। विपरीत परिस्थितियों के बाद भी अपनी जिंदगी दूसरों के भविष्य को संवारने में लगा दी। वह 32 सालों से बच्चों को पढ़ा रहे हैं। टीचर्स-डे पर पढ़िए प्रकाश के हौसले की कहानी… 23 साल की उम्र में आंखों की रोशनी चली गई ऐतिहासिक लखना कस्बे में प्रकाश सोनी रहते हैं। परिवार में पत्नी विजय लक्ष्मी एक बेटी ज्योत्सना और बेटा उज्जवल है। बेटी बैंक कर्मचारी है। बेटे ने जेएनयू से पीएचडी किया है। करीब 20 साल की उम्र में प्रकाश की आंखों की रोशनी धीरे-धीरे कम होने लगी थी। परिजनों ने चेन्नई के शंकर नेत्रालय में उनका इलाज कराया, लेकिन रोशनी वापस नहीं आई। 3 साल बाद 2 मई 1992 में प्रकाश की आंखों का रेटिना अपनी जगह से खिसक गया। उनकी आंखों की रोशनी पूरी तरह से चली गई। उनकी जिंदगी में पूरी तरह से अंधेरा छा गया। रोशनी खोने के बाद टीचर बने प्रकाश ने कानपुर से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी। उनका सपना इंजीनियर बनकर करियर बनाने का था। आंखों की रोशनी जाने के बाद भी प्रकाश ने हार नहीं मानी। कुछ कर गुजरने की चाहत उन्हें शिक्षा के क्षेत्र में आने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने लखना देहात के रॉयल हैप्पी किड्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल से बच्चों को पढ़ाना शुरू किया। तब से लेकर आज तक वह बच्चों को पढ़ाने और उनके भविष्य को बेहतर बनाने में जुटे हैं। आंखों से नहीं दिखता, फिर भी ब्लैक बोर्ड पर लिख लेते हैं प्रकाश के पढ़ाने का अंदाज सबसे खास है। आंखों से दिखाई न देने के बावजूद वह ब्लैक बोर्ड पर इतनी खूबसूरती से लिखते हैं, जैसे उनकी आंखों की रोशनी सामान्य हो। उनकी लिखावट स्टूडेंट्स को खूब पसंद आती है। उनका पढ़ाने का तरीका भी ऐसा है कि छात्र कठिन विषयों को आसानी से समझ लेते हैं और लंबे समय तक याद रखते हैं। उनके लिए आंखों से न दिखना, पढ़ाने की राह में बाधा नहीं बनी। छात्रा बोली- पहली बार में ही समझ आ जाती है बात स्कूल की छात्रा पल्लवी ने कहा- प्रकाश सर जैसा पढ़ाने वाला दूसरा कोई टीचर नहीं है। वह जिस तरह किसी सब्जेक्ट को समझाते हैं, वह पहली बार में ही दिमाग में बैठ जाता है। उनकी बातों को समझना आसान होता है। बड़े पदों पर पहुंचे प्रकाश के पढ़ाए स्टूडेंट्स प्रकाश के पढ़ाए कई स्टूडेंट्स आज महत्वपूर्ण पदों पर जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। उनके स्टूडेंट्स में कोई एसडीएम बना तो किसी ने डिप्टी एसपी और इंजीनियर बनकर सफलता हासिल की। विद्यार्थियों की उपलब्धियां ही उनके शिक्षक जीवन की सबसे बड़ी पूंजी हैं। आंखों की रोशनी न होने के बावजूद प्रकाश सोनी हजारों विद्यार्थियों के भविष्य में शिक्षा का उजाला भर रहे हैं। पत्नी भी स्कूल की जिम्मेदारी संभालती हैं प्रकाश सोनी की पत्नी विजयलक्ष्मी रॉयल हैप्पी किड्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल की प्रिंसिपल हैं। उनका कहना है कि पति ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद इंजीनियर के रूप में भविष्य बनाने की तैयारी की थी, लेकिन आंखों की रोशनी जाने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी। विजयलक्ष्मी के मुताबिक, शिक्षण के प्रति उनकी लगन ने उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। इसके बाद से वह लगातार बच्चों को पढ़ाने और उनके भविष्य को बेहतर बनाने में जुटे हुए हैं। जॉन मिल्टन की रचना से मिली प्रेरणा प्रकाश सोनी अंग्रेजी कवि जॉन मिल्टन की रचना ‘ऑन हिज ब्लाइंडनेस’ को अपनी पसंदीदा रचना बताते हैं। मिल्टन ने दृष्टिहीनता के बावजूद अपनी रचनात्मकता से दुनिया को प्रभावित किया। उसी तरह प्रकाश सोनी भी आंखों की रोशनी खोने के बावजूद शिक्षा के क्षेत्र में लगातार अपनी पहचान बना रहे हैं। सहकर्मी और छात्रों के परिजन भी हैं मुरीद स्कूल के टीचर स्वदेश कुमार का कहना है कि नेत्रहीन होने के बावजूद प्रकाश सोनी जिस तरह बच्चों के बीच शिक्षा की अलख जगा रहे हैं, वह अपने आप में इंस्पायरिंग है। उनके पढ़ाने के तरीके से हर कोई प्रभावित है। बच्चों के परिजन भी अपने बच्चों को उनके स्कूल में पढ़ाना सौभाग्य मानते हैं। प्रकाश सोनी के लिए स्टूडेंट्स का प्यार और उनकी सफलता ही सबसे बड़ी उपलब्धि है। आंखों की रोशनी खोने के बाद उन्होंने जिस तरह शिक्षा को अपनी जिंदगी का मकसद बनाया, वह दूसरों के लिए भी प्रेरणा बन गया है।

