बाढ़ की तैयारी को लेकर पीएचसी में उन्मुखीकरण कार्यक्रम

बाढ़ की तैयारी को लेकर पीएचसी में उन्मुखीकरण कार्यक्रम

भास्कर न्यूज | बायसी बायसी पीएचसी सभागार में बाढ़ की संभावित स्थिति से निपटने और आपदा के दौरान लोगों को त्वरित स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के लिए उन्मुखीकरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। आपदा प्रबंधन के मार्गदर्शन में स्वास्थ्य विभाग, यूनिसेफ बिहार, बिहार इंटर एजेंसी ग्रुप एवं जीपीएसवीएस के संयुक्त तत्वावधान में कार्यशाला हुई। इसमें बाढ़ पूर्व तैयारी, त्वरित प्रत्युत्तर एवं रिकवरी के साथ डूबने, वज्रपात और सर्पदंश से बचाव की जानकारी दी गई। कार्यक्रम में बायसी, बैसा एवं अमौर प्रखंडों के बाढ़ प्रभावित पंचायतों में कार्यरत एएनएम, आशा फेसिलिटेटर और आशा कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। जिला सलाहकार कमल कामत ने कहा कि पूर्णिया जिला बाढ़ की दृष्टि से संवेदनशील है। स्वास्थ्यकर्मियों को आपदा की स्थिति में साहस, संयम और सहयोग की भावना से काम करना चाहिए। बाढ़ से पहले संभावित प्रभावित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और उप-स्वास्थ्य केंद्रों को चिन्हित कर दवाओं, उपकरणों और आवश्यक सामग्री को सुरक्षित स्थान पर रखने की पूर्व व्यवस्था जरूरी है। बच्चों, दिव्यांगजनों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं पर विशेष ध्यान देने पर जोर दिया गया।
प्रखंड स्तरीय स्वास्थ्य केंद्रों और बाढ़ राहत शिविरों में ओआरएस, क्लोरीन/हैलोजन टैबलेट, एंटी-वेनम, ब्लीचिंग पाउडर, थर्मल स्कैनर, पल्स ऑक्सीमीटर और ऑक्सीजन सिलिंडर पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध रखने को कहा गया। मानसून के दौरान प्रसव की संभावित तिथि वाली गर्भवती महिलाओं की पहचान कर निकटतम स्वास्थ्य केंद्र में पंजीकरण और संस्थागत प्रसव की पूर्व योजना बनाने की बात कही गई।
बाढ़ के दौरान दवाओं के स्टॉक का नियमित अद्यतन करने, राहत शिविरों और प्रभावित क्षेत्रों में डायरिया एवं खसरा जैसे संक्रमणों की निगरानी करने तथा बच्चों को विटामिन-ए की खुराक की सुविधा जारी रखने की जानकारी दी गई। डायरिया में ओआरएस और जिंक के उपयोग को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया। प्रशिक्षण में एसडीआरएफ प्रखंड समन्वयक प्रमोद कुमार कर्मकार एवं प्रशिक्षक धीरज कुमार ने डूबने से बचाव, सर्पदंश एवं वज्रपात से सुरक्षा के उपाय बताए। विभिन्न आपातकाल में अपनाए जाने वाले जीवन रक्षक उपायों का मॉकड्रिल के माध्यम से व्यावहारिक प्रदर्शन भी कराया गया। भास्कर न्यूज | बायसी बायसी पीएचसी सभागार में बाढ़ की संभावित स्थिति से निपटने और आपदा के दौरान लोगों को त्वरित स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के लिए उन्मुखीकरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। आपदा प्रबंधन के मार्गदर्शन में स्वास्थ्य विभाग, यूनिसेफ बिहार, बिहार इंटर एजेंसी ग्रुप एवं जीपीएसवीएस के संयुक्त तत्वावधान में कार्यशाला हुई। इसमें बाढ़ पूर्व तैयारी, त्वरित प्रत्युत्तर एवं रिकवरी के साथ डूबने, वज्रपात और सर्पदंश से बचाव की जानकारी दी गई। कार्यक्रम में बायसी, बैसा एवं अमौर प्रखंडों के बाढ़ प्रभावित पंचायतों में कार्यरत एएनएम, आशा फेसिलिटेटर और आशा कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। जिला सलाहकार कमल कामत ने कहा कि पूर्णिया जिला बाढ़ की दृष्टि से संवेदनशील है। स्वास्थ्यकर्मियों को आपदा की स्थिति में साहस, संयम और सहयोग की भावना से काम करना चाहिए। बाढ़ से पहले संभावित प्रभावित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और उप-स्वास्थ्य केंद्रों को चिन्हित कर दवाओं, उपकरणों और आवश्यक सामग्री को सुरक्षित स्थान पर रखने की पूर्व व्यवस्था जरूरी है। बच्चों, दिव्यांगजनों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं पर विशेष ध्यान देने पर जोर दिया गया।
प्रखंड स्तरीय स्वास्थ्य केंद्रों और बाढ़ राहत शिविरों में ओआरएस, क्लोरीन/हैलोजन टैबलेट, एंटी-वेनम, ब्लीचिंग पाउडर, थर्मल स्कैनर, पल्स ऑक्सीमीटर और ऑक्सीजन सिलिंडर पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध रखने को कहा गया। मानसून के दौरान प्रसव की संभावित तिथि वाली गर्भवती महिलाओं की पहचान कर निकटतम स्वास्थ्य केंद्र में पंजीकरण और संस्थागत प्रसव की पूर्व योजना बनाने की बात कही गई।
बाढ़ के दौरान दवाओं के स्टॉक का नियमित अद्यतन करने, राहत शिविरों और प्रभावित क्षेत्रों में डायरिया एवं खसरा जैसे संक्रमणों की निगरानी करने तथा बच्चों को विटामिन-ए की खुराक की सुविधा जारी रखने की जानकारी दी गई। डायरिया में ओआरएस और जिंक के उपयोग को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया। प्रशिक्षण में एसडीआरएफ प्रखंड समन्वयक प्रमोद कुमार कर्मकार एवं प्रशिक्षक धीरज कुमार ने डूबने से बचाव, सर्पदंश एवं वज्रपात से सुरक्षा के उपाय बताए। विभिन्न आपातकाल में अपनाए जाने वाले जीवन रक्षक उपायों का मॉकड्रिल के माध्यम से व्यावहारिक प्रदर्शन भी कराया गया।  

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