बेगूसराय- छतों पर कटी रातें, चौकियों पर जल रहे चूल्हे:बाढ़ से एक लाख से अधिक की आबादी प्रभावित, खतरे के निशान से 1.5 मीटर ऊपर गंगा

बेगूसराय- छतों पर कटी रातें, चौकियों पर जल रहे चूल्हे:बाढ़ से एक लाख से अधिक की आबादी प्रभावित, खतरे के निशान से 1.5 मीटर ऊपर गंगा

बेगूसराय में गंगा नदी खतरे के निशान से 1.5 मीटर ऊपर बह रही है। शुक्रवार तक जिले के तटीय और दियारा इलाके को मिलाकर कुल एक लाख से अधिक की आबादी प्रभावित है। गुरुवार रात से नदी के जलस्तर में हुई बेतहाशा वृद्धि के कारण बाढ़ की स्थिति बेहद विकराल और भयानक हो चुकी है। बेगूसराय में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान 41.76 मीटर को ध्वस्त करते हुए आज 43.24 मीटर पर दर्ज किया गया है। खतरे के निशान से करीब डेढ़ मीटर ऊपर बह रही गंगा ने जिले के तटीय और दियारा इलाकों में हाहाकार मचा दिया है। स्थानीय लोगों और बुजुर्गों का कहना है कि अगर पानी के बढ़ने की यही रफ्तार रही, तो अगले 24 घंटों में गंगा का जलस्तर अब तक के बाढ़ के इतिहास के सभी भयावह रिकॉर्ड तोड़ देगा। गंगा में आई इस प्रचंड उफान के कारण बेगूसराय के बछवाड़ा, तेघड़ा, बरौनी, मटिहानी, बलिया और साहेबपुर कमाल प्रखंड के दियारा क्षेत्र पूरी तरह से टापू बन चुके हैं। सबसे गंभीर स्थिति शाम्हो प्रखंड की है, जो चारों तरफ से बाढ़ के पानी से घिरकर जिले के मुख्य हिस्से से पूरी तरह कट चुका है। बाढ़ प्रभावित इलाके की तीन तस्वीरें देखिए अब सबसे पहले नगर निगम क्षेत्र की स्थिति जानिए बेगूसराय नगर निगम क्षेत्र के कमरुद्दीनपुर और आकाशपुर मोहल्लों में पानी प्रवेश कर गया है। बाढ़ में प्रभावित बछवाड़ा प्रखंड का चमथा दियारा, तेघरा का भगवानपुर चक्की, बरौनी का सिमरिया बिंद टोली, मटिहानी का रामदीरी (चारों पंचायत), सिहमा, छितरौर, खोरमपुर, बलहपुर (दोनों पंचायत) एवं बलिया का मकसूदपुर, शादीपुर, पहाड़पुर है। इनमें से चक्की, छितरौर, खोरमपुर, बलहपुर, सिंहपुर और महेंद्रपुर गांवों में 7 हजार से अधिक घरों के भीतर 2 से 4 फीट तक बाढ़ का पानी तैर रहा है, जिससे जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। दैनिक भास्कर की टीम जब मटिहानी प्रखंड के अति-प्रभावित छितरौर गांव पहुंची, तो वहां का दृश्य विचलित कर देने वाला था। गांव की सड़कों से लेकर लोगों के कमरों और आंगनों तक में 2 से 3 फीट तक पानी भरा हुआ है। 10-10 कमरों वाले पक्के मकानों का निचला हिस्सा पूरी तरह जलमग्न हो चुका है। लोग अपने कीमती सामान और परिजनों को लेकर घर की छतों पर शरण लिए हुए हैं। गुप्ता- लखमीनिया बांध से बलहपुर और महेंद्रपुर जाने वाली मुख्य सड़कों पर कमर भर पानी तेज बहाव के साथ बह रहा है। लोग अपनी जान जोखिम में डालकर, साइकिलों पर जरूरी सामान लादकर और मवेशियों को हांकते हुए ऊंचे स्थानों व बांधों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं। चौकी पर ईंट रखकर चूल्हा जला रहे हैं, न गैस है न राशन बाढ़ की इस विभीषिका के बीच सबसे बुरी मार महिलाओं, छोटे बच्चों और बुजुर्गों पर पड़ी है। छितरौर गांव की अनीता देवी ने रोते हुए अपनी आपबीती सुनाई। उसने बताया कि 10 दिनों से चारों तरफ पानी भरा हुआ था, लेकिन पिछले 3 दिनों से पानी सीधे घर के अंदर घुस गया है। न खाने-पीने की सुविधा है, न बच्चे के लिए दूध। खाना पकाने के लिए सूखी लकड़ी या गैस सिलेंडर तक नहीं बचा है। घर के अंदर चौकी पर ईंटें रखकर किसी तरह चूल्हा जला रहे हैं और खाना बना रहे हैं। ऊपर से बारिश हो रही है, जिससे छत पर भी त्रिपाल के सहारे वक्त काटना पड़ रहा है। बीमार पड़ने पर डॉक्टर या दवा की कोई व्यवस्था नहीं है। हमारे घर के पुरुष मवेशियों को लेकर दूर बांध पर गए हैं, हम बच्चों के साथ यहां फंसे हैं। संदीप कुमार ने बताया कि गांव के अधिकांश युवा और परिवार छतों पर त्रिपाल तानकर रातें गुजार रहे हैं। हम लोग छतों पर त्रिपाल लगाकर रह रहे हैं। मवेशियों को सड़कों और बांधों पर बांधा गया है। सरकारी मदद के नाम पर अभी तक खाना-पीना शुरू नहीं हुआ है। जब हम लोग बहुत गुहार लगाते हैं या अधिकारियों को सूचना दी जाती है, तब जाकर कोई झांकने आता है। अभी-अभी एक सरकारी नाव मिली है, लेकिन राहत सामग्री का अब भी इंतजार है। राहत की उम्मीद के बाद दोबारा आया पानी यह इस सीजन में बेगूसराय के लोगों के लिए दोहरी मार है। कुछ दिन पहले गंगा का जलस्तर बढ़ा था, फिर धीरे-धीरे घटने लगा था। लोगों को लगा था कि अब राहत मिलेगी और जिंदगी पटरी पर लौटेगी। लेकिन गुरुवार रात से दूसरी बार आए इस उफान ने पहली बार से भी ज्यादा विकराल रूप धारण कर लिया है। लोग इसे जलालत भरी जिंदगी जीने को मजबूर बता रहे हैं। 7 हजार बांटने से बेहतर है पानी रोकने का स्थायी समाधान बलहपुर पंचायत-1 के रहने वाले रवीश कुमार ने बताया कि बलहपुर, सिंहपुर और महेंद्रपुर के लगभग सभी घरों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर चुका है। सड़क पर पानी का तेज बहाव है और गाड़ियां गुजरने से सड़कें जगह-जगह से टूट रही हैं। करीब 20 हजार की आबादी इससे सीधे प्रभावित है। रवीश ने सरकार की राहत नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि हर साल खाना-पीना और 7-7 हजार रुपये की फौरी मदद बांटने के बजाय सरकार को पानी के रुकाव और तटबंध का कोई स्थायी समाधान करना चाहिए। ​कमर भर पानी में पैदल चलने की लाचारी महेंद्रपुर के बुजुर्ग अवधेश सिंह ने बताया कि घरों में पानी भर जाने के कारण लोग घर छोड़कर भागने को मजबूर हैं। इलाके में कमर तक पानी भरा हुआ है और सड़कें पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी हैं। अवधेश सिंह के अनुसार, इतने विकट हालात के बावजूद प्रशासन की ओर से अब तक नावों की कोई व्यवस्था नहीं की गई है, जिससे लोग जान जोखिम में डालकर कमर भर पानी में पैदल ही आने-जाने को विवश हैं। फिलहाल हजारों परिवारों के पास सूखा राशन और पीने का शुद्ध पानी खत्म हो चुका है। बाढ़ के पानी में जहरीले सांप-कीड़ों का खतरा बढ़ गया है, लेकिन मेडिकल टीमें नजर नहीं आ रही है। मवेशियों के लिए हरा चारा पूरी तरह डूब चुका है, जिससे पशुपालक अपने मवेशियों को औने-पौने दाम पर बेचने या भूखा रखने को मजबूर हैं। फिलहाल अगले 24 घंटों तक जलस्तर में इसी तरह बढ़ोतरी जारी रही तो नए इलाकों में भी पानी प्रवेश कर सकता है।
सदर एसडीओ अश्वनी कुमार बोले- प्रशासन और आपदा प्रबंधन पूरी तरह तैयार हम लोग पूरी टीम के साथ अपने पूरे क्षेत्र को देख रहे हैं। अभी तक पानी का लेवल कंट्रोल में है। बांध के बाहर वाले जो इलाके हैं, उसमें कुछ जगहों पर पानी आया है, लेकिन नियंत्रण में है। नाव का परिचालन हम लोग शुरू करवा दिए हैं और आगे अगर पानी राइज होता है तो हम लोग डिसीजन लेंगे। प्रशासन आपदा प्रबंधन के लिए पूर्णतः तैयार है। हम लोग सारा इंतजाम किए हुए हैं और लोगों के साथ में हैं। हम लोग सर्वे कर रहे हैं। जिन-जिन घरों में अगर पानी गया है तो हम लोग जीआर पर भी विचार करेंगे, जो दिया जाता है वो हम लोग देंगे। अगर उससे आगे कुछ समस्या होती है तो जो नियमानुसार करना चाहिए हम लोग करेंगे। नाव का इंतज़ाम करा दिया गया है, सभी पंचायतों में नाव का निबंधन करवा दिया गया है। जहां जरूरत हो रहा है नाव का परिचालन करवा रहे हैं। पानी बढ़ेगा तो आवश्यकता के अनुसार सामुदायिक किचन चलाया जाएगा। बेगूसराय में गंगा नदी खतरे के निशान से 1.5 मीटर ऊपर बह रही है। शुक्रवार तक जिले के तटीय और दियारा इलाके को मिलाकर कुल एक लाख से अधिक की आबादी प्रभावित है। गुरुवार रात से नदी के जलस्तर में हुई बेतहाशा वृद्धि के कारण बाढ़ की स्थिति बेहद विकराल और भयानक हो चुकी है। बेगूसराय में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान 41.76 मीटर को ध्वस्त करते हुए आज 43.24 मीटर पर दर्ज किया गया है। खतरे के निशान से करीब डेढ़ मीटर ऊपर बह रही गंगा ने जिले के तटीय और दियारा इलाकों में हाहाकार मचा दिया है। स्थानीय लोगों और बुजुर्गों का कहना है कि अगर पानी के बढ़ने की यही रफ्तार रही, तो अगले 24 घंटों में गंगा का जलस्तर अब तक के बाढ़ के इतिहास के सभी भयावह रिकॉर्ड तोड़ देगा। गंगा में आई इस प्रचंड उफान के कारण बेगूसराय के बछवाड़ा, तेघड़ा, बरौनी, मटिहानी, बलिया और साहेबपुर कमाल प्रखंड के दियारा क्षेत्र पूरी तरह से टापू बन चुके हैं। सबसे गंभीर स्थिति शाम्हो प्रखंड की है, जो चारों तरफ से बाढ़ के पानी से घिरकर जिले के मुख्य हिस्से से पूरी तरह कट चुका है। बाढ़ प्रभावित इलाके की तीन तस्वीरें देखिए अब सबसे पहले नगर निगम क्षेत्र की स्थिति जानिए बेगूसराय नगर निगम क्षेत्र के कमरुद्दीनपुर और आकाशपुर मोहल्लों में पानी प्रवेश कर गया है। बाढ़ में प्रभावित बछवाड़ा प्रखंड का चमथा दियारा, तेघरा का भगवानपुर चक्की, बरौनी का सिमरिया बिंद टोली, मटिहानी का रामदीरी (चारों पंचायत), सिहमा, छितरौर, खोरमपुर, बलहपुर (दोनों पंचायत) एवं बलिया का मकसूदपुर, शादीपुर, पहाड़पुर है। इनमें से चक्की, छितरौर, खोरमपुर, बलहपुर, सिंहपुर और महेंद्रपुर गांवों में 7 हजार से अधिक घरों के भीतर 2 से 4 फीट तक बाढ़ का पानी तैर रहा है, जिससे जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। दैनिक भास्कर की टीम जब मटिहानी प्रखंड के अति-प्रभावित छितरौर गांव पहुंची, तो वहां का दृश्य विचलित कर देने वाला था। गांव की सड़कों से लेकर लोगों के कमरों और आंगनों तक में 2 से 3 फीट तक पानी भरा हुआ है। 10-10 कमरों वाले पक्के मकानों का निचला हिस्सा पूरी तरह जलमग्न हो चुका है। लोग अपने कीमती सामान और परिजनों को लेकर घर की छतों पर शरण लिए हुए हैं। गुप्ता- लखमीनिया बांध से बलहपुर और महेंद्रपुर जाने वाली मुख्य सड़कों पर कमर भर पानी तेज बहाव के साथ बह रहा है। लोग अपनी जान जोखिम में डालकर, साइकिलों पर जरूरी सामान लादकर और मवेशियों को हांकते हुए ऊंचे स्थानों व बांधों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं। चौकी पर ईंट रखकर चूल्हा जला रहे हैं, न गैस है न राशन बाढ़ की इस विभीषिका के बीच सबसे बुरी मार महिलाओं, छोटे बच्चों और बुजुर्गों पर पड़ी है। छितरौर गांव की अनीता देवी ने रोते हुए अपनी आपबीती सुनाई। उसने बताया कि 10 दिनों से चारों तरफ पानी भरा हुआ था, लेकिन पिछले 3 दिनों से पानी सीधे घर के अंदर घुस गया है। न खाने-पीने की सुविधा है, न बच्चे के लिए दूध। खाना पकाने के लिए सूखी लकड़ी या गैस सिलेंडर तक नहीं बचा है। घर के अंदर चौकी पर ईंटें रखकर किसी तरह चूल्हा जला रहे हैं और खाना बना रहे हैं। ऊपर से बारिश हो रही है, जिससे छत पर भी त्रिपाल के सहारे वक्त काटना पड़ रहा है। बीमार पड़ने पर डॉक्टर या दवा की कोई व्यवस्था नहीं है। हमारे घर के पुरुष मवेशियों को लेकर दूर बांध पर गए हैं, हम बच्चों के साथ यहां फंसे हैं। संदीप कुमार ने बताया कि गांव के अधिकांश युवा और परिवार छतों पर त्रिपाल तानकर रातें गुजार रहे हैं। हम लोग छतों पर त्रिपाल लगाकर रह रहे हैं। मवेशियों को सड़कों और बांधों पर बांधा गया है। सरकारी मदद के नाम पर अभी तक खाना-पीना शुरू नहीं हुआ है। जब हम लोग बहुत गुहार लगाते हैं या अधिकारियों को सूचना दी जाती है, तब जाकर कोई झांकने आता है। अभी-अभी एक सरकारी नाव मिली है, लेकिन राहत सामग्री का अब भी इंतजार है। राहत की उम्मीद के बाद दोबारा आया पानी यह इस सीजन में बेगूसराय के लोगों के लिए दोहरी मार है। कुछ दिन पहले गंगा का जलस्तर बढ़ा था, फिर धीरे-धीरे घटने लगा था। लोगों को लगा था कि अब राहत मिलेगी और जिंदगी पटरी पर लौटेगी। लेकिन गुरुवार रात से दूसरी बार आए इस उफान ने पहली बार से भी ज्यादा विकराल रूप धारण कर लिया है। लोग इसे जलालत भरी जिंदगी जीने को मजबूर बता रहे हैं। 7 हजार बांटने से बेहतर है पानी रोकने का स्थायी समाधान बलहपुर पंचायत-1 के रहने वाले रवीश कुमार ने बताया कि बलहपुर, सिंहपुर और महेंद्रपुर के लगभग सभी घरों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर चुका है। सड़क पर पानी का तेज बहाव है और गाड़ियां गुजरने से सड़कें जगह-जगह से टूट रही हैं। करीब 20 हजार की आबादी इससे सीधे प्रभावित है। रवीश ने सरकार की राहत नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि हर साल खाना-पीना और 7-7 हजार रुपये की फौरी मदद बांटने के बजाय सरकार को पानी के रुकाव और तटबंध का कोई स्थायी समाधान करना चाहिए। ​कमर भर पानी में पैदल चलने की लाचारी महेंद्रपुर के बुजुर्ग अवधेश सिंह ने बताया कि घरों में पानी भर जाने के कारण लोग घर छोड़कर भागने को मजबूर हैं। इलाके में कमर तक पानी भरा हुआ है और सड़कें पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी हैं। अवधेश सिंह के अनुसार, इतने विकट हालात के बावजूद प्रशासन की ओर से अब तक नावों की कोई व्यवस्था नहीं की गई है, जिससे लोग जान जोखिम में डालकर कमर भर पानी में पैदल ही आने-जाने को विवश हैं। फिलहाल हजारों परिवारों के पास सूखा राशन और पीने का शुद्ध पानी खत्म हो चुका है। बाढ़ के पानी में जहरीले सांप-कीड़ों का खतरा बढ़ गया है, लेकिन मेडिकल टीमें नजर नहीं आ रही है। मवेशियों के लिए हरा चारा पूरी तरह डूब चुका है, जिससे पशुपालक अपने मवेशियों को औने-पौने दाम पर बेचने या भूखा रखने को मजबूर हैं। फिलहाल अगले 24 घंटों तक जलस्तर में इसी तरह बढ़ोतरी जारी रही तो नए इलाकों में भी पानी प्रवेश कर सकता है।
सदर एसडीओ अश्वनी कुमार बोले- प्रशासन और आपदा प्रबंधन पूरी तरह तैयार हम लोग पूरी टीम के साथ अपने पूरे क्षेत्र को देख रहे हैं। अभी तक पानी का लेवल कंट्रोल में है। बांध के बाहर वाले जो इलाके हैं, उसमें कुछ जगहों पर पानी आया है, लेकिन नियंत्रण में है। नाव का परिचालन हम लोग शुरू करवा दिए हैं और आगे अगर पानी राइज होता है तो हम लोग डिसीजन लेंगे। प्रशासन आपदा प्रबंधन के लिए पूर्णतः तैयार है। हम लोग सारा इंतजाम किए हुए हैं और लोगों के साथ में हैं। हम लोग सर्वे कर रहे हैं। जिन-जिन घरों में अगर पानी गया है तो हम लोग जीआर पर भी विचार करेंगे, जो दिया जाता है वो हम लोग देंगे। अगर उससे आगे कुछ समस्या होती है तो जो नियमानुसार करना चाहिए हम लोग करेंगे। नाव का इंतज़ाम करा दिया गया है, सभी पंचायतों में नाव का निबंधन करवा दिया गया है। जहां जरूरत हो रहा है नाव का परिचालन करवा रहे हैं। पानी बढ़ेगा तो आवश्यकता के अनुसार सामुदायिक किचन चलाया जाएगा।  

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