मिर्जापुर के हलिया ब्लॉक के लहुरिया दह गांव में हीरावती का परिवार गरीबी और सरकारी सुविधाओं की कमी के बीच जिंदगी गुजार रहा है। परिवार के पास रहने के लिए पक्का मकान नहीं है। बारिश होते ही कच्ची छत से पानी टपकने लगता है। हालात ऐसे हैं कि रातभर परिवार के लोग छत से टपकते पानी को बर्तनों में भरकर बाहर फेंकते रहते हैं। बच्चों को भी इसी परेशानी के बीच रात गुजारनी पड़ती है। परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी खराब है कि मजदूरी से ही घर का खर्च चलता है। कभी अपना पक्का मकान बनाने का सपना देखने वाले परिवार ने जमीन बेचकर किसी तरह एक कमरा बनवाया था, लेकिन पैसे खत्म हो गए और कमरे की छत पक्की नहीं हो सकी। अब अधूरा मकान ही परिवार के लिए बरसात में सबसे बड़ी परेशानी बन गया है। हीरावती की परेशानी सिर्फ मकान तक सीमित नहीं है। राशन कार्ड में चार बच्चों में से केवल एक बेटे का नाम दर्ज है। करीब दो साल पहले पति की मौत के बाद तीन बच्चों के नाम राशन कार्ड से कट गए। नाम दोबारा जुड़वाने के लिए परिवार सरकारी मदद का इंतजार कर रहा है। आर्थिक तंगी के बीच राशन की कमी होने पर कई बार परिवार को खाली पेट भी सोना पड़ता है। जमीन बेचकर बनवाया कमरा, छत के लिए नहीं बचे पैसे हीरावती के परिवार ने आर्थिक तंगी के बावजूद पक्का घर बनाने की कोशिश की थी। उनके पति ने अपनी जमीन बेचकर किसी तरह एक कमरा बनवाया था। लेकिन सीमित आमदनी के कारण कमरे की छत भी पक्की नहीं हो सकी। अब बरसात में इसी अधूरे घर में परिवार को रहने में परेशानी हो रही है। छत से पानी टपकने के कारण घर का सामान बचाना भी मुश्किल हो जाता है। रात में परिवार के लोग जगह-जगह बर्तन रखकर पानी भरते हैं और फिर उसे बाहर फेंकते रहते हैं। बच्चों को भी टपकती छत के नीचे रात बितानी पड़ती है। पति की मौत के बाद तीन बच्चों के नाम राशन कार्ड से कटे हीरावती ने बताया कि पति के जीवित रहने के दौरान राशन कार्ड में परिवार के सभी सदस्यों के नाम दर्ज थे। करीब दो साल पहले पति की मौत के बाद राशन कार्ड से तीन बच्चों के नाम कट गए। अब राशन कार्ड उनके नाम पर है, लेकिन उसमें सिर्फ एक बेटे का नाम दर्ज है। चार बच्चों की मां हीरावती का कहना है कि बच्चों के नाम राशन कार्ड में दोबारा जुड़ जाएं तो परिवार को नियमित रूप से सरकारी अनाज मिल सकेगा। मौजूदा स्थिति में राशन की कमी परिवार की मुश्किलें और बढ़ा देती है। मजदूरी मिले तो चूल्हा जलता है, काम न मिले तो खाली पेट सोना पड़ता है परिवार के मौजी लाल ने बताया कि मजदूरी मिलने पर ही घर के खाने का इंतजाम हो पाता है। काम नहीं मिलने या राशन खत्म होने पर परिवार के सामने भोजन का संकट खड़ा हो जाता है। कई बार ऐसी स्थिति आती है जब घर में चूल्हा तक नहीं जल पाता और परिवार को खाली पेट सोना पड़ता है। गरीबी के कारण बच्चों की जरूरतें पूरी करना भी परिवार के लिए मुश्किल है। एक तरफ घर की छत की चिंता है तो दूसरी ओर नियमित राशन नहीं मिलने से खाने का संकट बना रहता है। हीरावती की मांग- बच्चों के नाम राशन कार्ड में जुड़ें, मिले पक्का घर हीरावती ने प्रशासन से बच्चों के नाम राशन कार्ड में दोबारा जोड़ने की मांग की है। उनका कहना है कि राशन कार्ड में सभी बच्चों के नाम दर्ज होने से परिवार को नियमित अनाज मिल सकेगा। उन्होंने परिवार के लिए पक्के मकान की भी मांग की है। उनका कहना है कि बारिश के मौसम में टपकती छत के नीचे बच्चों को सुरक्षित रखना मुश्किल हो जाता है। गरीबी में जिंदगी गुजार रहा यह परिवार अब सरकारी मदद की उम्मीद लगाए बैठा है।

