औरंगाबाद के ओबरा थाना क्षेत्र के सिंहुड़ी (बेल सिंहुड़ी) गांव में गुरुवार की देर रात मिट्टी से बनी घर की दीवार और छत गिरने से बच्ची की मौत हो गई। घटना में मृत बच्ची की मां समेत तीन अन्य भाई बहन भी घायल हुए हैं। मिट्टी की दीवार और छत गिरने की जानकारी के बाद तत्काल गांव के लोगों ने मलबे में से महिला और उनके चारों बच्चों को निकाला। मृत बच्ची की पहचान 12 साल की बबली कुमारी के रूप में हुई है। बबली की अस्पताल ले जाने के दौरान डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। मृत बच्ची कन्हैया विश्वकर्मा और मां पूनम देवी की बेटी थी। पूनम देवी ने बताया कि पूनम देवी ने बताया कि मेरे पति गुड़गांव में रहकर मजदूरी करते हैं। मैं घर में अपने बच्चों के साथ रहती हूं। उन्होंने बताया कि मेरे अलावा, मेरी बेटी नंदनी कुमारी, रिमी कुमारी और बेटा कुंदन घायल हुआ है। मृत बच्ची की मां बोली- अचानक भरभरा कर गिरी छत और दीवार उन्होंने बताया कि गुरुवार की रात खाना खाने के बाद मैं अपने चारों बच्चों के साथ मिट्टी से बने पुराने मकान में सोई थी। इसी दौरान अचानक मकान की दीवार और छत भरभराकर गिर गईं। इससे पूरा कमरा मलबे में तब्दील हो गया और हम पांचों लोग मलबे में दब गए। शोर सुनकर ग्रामीणों ने शुरू किया बचाव कार्य मिट्टी के मकान गिरने और मलबे में दबे बच्चों और उनकी मां ने शोर मचाना शुरू किया। इसके बाद आसपास के लोग घटनास्थल पर पहुंचे। मौके पर पहुंचने के बाद ग्रामीणों ने देखा कि मकान के मलबे के नीचे परिवार के पांच सदस्य दबे हुए हैं। इसके बाद ग्रामीणों ने बिना देर किए राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया। ग्रामीणों ने काफी मशक्कत के बाद मलबा हटाकर सभी पांचों लोगों को बाहर निकाला। हादसे में गंभीर रूप से घायल बबली कुमारी समेत सभी घायलों को आनन-फानन में इलाज के लिए औरंगाबाद सदर अस्पताल पहुंचाया गया। अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकों ने जांच के बाद बबली कुमारी को मृत घोषित कर दिया। वहीं, उसकी मां पूनम देवी और तीनों घायल बच्चों का इलाज किया गया। ग्रामीणों के अनुसार मकान काफी पुराना और मिट्टी का था। पिछले दो दिन हुई बारिश के कारण मिट्टी के मकान की दीवार और छत ढह गई। ग्रामीणों ने प्रशासन से पीड़ित परिवार को तत्काल आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने, घायलों के बेहतर इलाज की व्यवस्था कराने की मांग की है। औरंगाबाद के ओबरा थाना क्षेत्र के सिंहुड़ी (बेल सिंहुड़ी) गांव में गुरुवार की देर रात मिट्टी से बनी घर की दीवार और छत गिरने से बच्ची की मौत हो गई। घटना में मृत बच्ची की मां समेत तीन अन्य भाई बहन भी घायल हुए हैं। मिट्टी की दीवार और छत गिरने की जानकारी के बाद तत्काल गांव के लोगों ने मलबे में से महिला और उनके चारों बच्चों को निकाला। मृत बच्ची की पहचान 12 साल की बबली कुमारी के रूप में हुई है। बबली की अस्पताल ले जाने के दौरान डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। मृत बच्ची कन्हैया विश्वकर्मा और मां पूनम देवी की बेटी थी। पूनम देवी ने बताया कि पूनम देवी ने बताया कि मेरे पति गुड़गांव में रहकर मजदूरी करते हैं। मैं घर में अपने बच्चों के साथ रहती हूं। उन्होंने बताया कि मेरे अलावा, मेरी बेटी नंदनी कुमारी, रिमी कुमारी और बेटा कुंदन घायल हुआ है। मृत बच्ची की मां बोली- अचानक भरभरा कर गिरी छत और दीवार उन्होंने बताया कि गुरुवार की रात खाना खाने के बाद मैं अपने चारों बच्चों के साथ मिट्टी से बने पुराने मकान में सोई थी। इसी दौरान अचानक मकान की दीवार और छत भरभराकर गिर गईं। इससे पूरा कमरा मलबे में तब्दील हो गया और हम पांचों लोग मलबे में दब गए। शोर सुनकर ग्रामीणों ने शुरू किया बचाव कार्य मिट्टी के मकान गिरने और मलबे में दबे बच्चों और उनकी मां ने शोर मचाना शुरू किया। इसके बाद आसपास के लोग घटनास्थल पर पहुंचे। मौके पर पहुंचने के बाद ग्रामीणों ने देखा कि मकान के मलबे के नीचे परिवार के पांच सदस्य दबे हुए हैं। इसके बाद ग्रामीणों ने बिना देर किए राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया। ग्रामीणों ने काफी मशक्कत के बाद मलबा हटाकर सभी पांचों लोगों को बाहर निकाला। हादसे में गंभीर रूप से घायल बबली कुमारी समेत सभी घायलों को आनन-फानन में इलाज के लिए औरंगाबाद सदर अस्पताल पहुंचाया गया। अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकों ने जांच के बाद बबली कुमारी को मृत घोषित कर दिया। वहीं, उसकी मां पूनम देवी और तीनों घायल बच्चों का इलाज किया गया। ग्रामीणों के अनुसार मकान काफी पुराना और मिट्टी का था। पिछले दो दिन हुई बारिश के कारण मिट्टी के मकान की दीवार और छत ढह गई। ग्रामीणों ने प्रशासन से पीड़ित परिवार को तत्काल आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने, घायलों के बेहतर इलाज की व्यवस्था कराने की मांग की है।

