विधानसभा चुनाव धीरे-धीरे नजदीक आ रहा है। ऐसे में चुनाव मैदान से दूर खड़े भाजपा नेता संगठन में सम्मानजनक जगह चाहते थे। प्रदेश की टीम घोषित हुई, जिलों की सूची आयी। जो बच गए थे, उनकी अपेक्षाएं क्षेत्रीय टीम से थीं। 2020 के बाद से क्षेत्रीय टीम का गठन भी नहीं हुआ था। इसीलिए कई ऐसे चेहरे भी थे जो लंबे समय से उम्मीद लगाए थे। सबकी उम्मीदों का भार क्षेत्रीय टीम की आने वाली सूची पर था। यही कारण है कि खूब सिफारिशें भी लगीं। अपेक्षाओं का भार ही था कि इस सूची को इतना विस्तार मिला। पहली बार कार्यसमिति में पदाधिकारियों और सदस्यों की संख्या 39 तक पहुंच गई। अभी 6 पदों पर नियुक्ति रह गई है। भाजपा में क्षेत्रीय अध्यक्ष की घोषणा होने के साथ ही क्षेत्रीय टीम में जगह पाने की कवायद शुरू हो गई थी। सभी नेता अपने ‘गॉड फादर’ के यहां डेरा डाल चुके थे। जिनके एक से अधिक नेताओं का हाथ था, वो हर हाथ का आशीर्वाद आजमाने में जुटे थे। भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के साथ ही आरएसएस के प्रचारकों और पदाधिकारियों से भी सिफारिशें लगाने के लिए दौड़ते रहे। क्षेत्रीय अध्यक्ष के लिए यह सूची फाइनल करना आसान नहीं था। हर जगह से बचे हुए लोगों को क्षेत्रीय टीम में शामिल करने का आश्वासन जो मिला था। चुनावी वर्ष है, इसलिए पार्टी किसी की नाराजगी भी नहीं लेना चाहती थी। प्रदेश टीम की तर्ज पर यहां भी पद बढ़ाए गए। क्षेत्रीय महामंत्री के लिए सर्वाधिक मारामारी थी। जिसके चलते यह पद 3 से बढ़ाकर 4 किया गया। क्षेत्रीय उपाध्यक्ष और मंत्री के 8-8 पद हुआ करते थे, इसे 10-10 कर दिया गया। क्षेत्रीय कार्यसमिति के 5 सदस्य चुने जाते थे, इस बार 15 कर दिया गया। पद बढ़ाने के पीछे एकमात्र कारण अधिक से अधिक नेताओं को समायोजित करना था। जो बच गए, उन्हें मोर्चों में जगह मिलेगी अभी भी कुछ लोग बच गए हैं। महत्वपूर्ण पदों पर बैठे नेताओं के पास उन्हें आश्वासन देने के लिए अब भी बहुत कुछ है। अभी कई मोर्चों के अध्यक्षों की घोषणा होनी है। वहां भी विभिन्न वर्ग के नेताओं को समायोजित किया जाएगा। मुख्य कार्यसमिति में भी कई लोगों को जगह मिल सकेगी। क्योंकि यहां अभी 8 पदों पर नाम की घोषणा होना बाकी है। क्षेत्रीय मीडिया प्रभारी के पद पर किसी नए चेहरे को लाने की संभावना है। इसी के साथ ही आईटी सेल को भी मजबूत किया जाएगा। वरिष्ठ नेताओं को भी संतुष्ट करने की कोशिश क्षेत्रीय टीम में कई वरिष्ठ नेता अपने चहेतों को देखना चाहते थे। इसीलिए खूब दबाव भी बनाया गया। इस सूची में इन बड़े नेताओं को संतुष्ट करने की कोशिश भी दिखी। गोरखपुर में तीन प्रदेश उपाध्यक्ष हैं। सभी को इस सूची में तवज्जो मिलती दिखी है। हालांकि भाजपा सूत्रों का कहना है कि पूर्व जिलाध्यक्षों युधिष्ठिर सिंह व राजेश गुप्ता में से किसी को क्षेत्रीय महामंत्री का पद न मिलने से एक वरिष्ठ व प्रभावशाली माने जाने वाले नेता को झटका लगा है। कई बार संशोधित हुई सूची भाजपा सूत्रों की मानें तो यह सूची कई बार संशोधित हुई। क्षेत्रीय महामंत्री के एक पद को छोड़कर 3 के लिए काफी उतार-चढ़ाव रहा। कुछ लोगों के नाम बाहर गए और कुछ के अंतिम समय पर अंदर आए। क्षेत्रीय महामंत्री के रूप में जगह पाने वाले दो नेता कायस्थ हैं और गोरखपुर महानगर से हैं। इसे गोरखपुर महानगर की ताकत के रूप में देखा जा रहा है। इसके साथ अन्य पदों पर भी अंतिम समय तक नाम इधर-उधर होते रहे।

