नालंदा के लहेरी थाना क्षेत्र के रामचंद्रपुर बस स्टैंड से रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हुई 18 वर्षीय युवती को पुलिस ने सकुशल बरामद कर लिया है। पुलिस ने इस मामले में संलिप्त एक महिला सहित चार आरोपियों को दबोचने में सफलता पाई है। आरोपियों ने युवती को अगवा कर 50 हजार रुपये में बेच दिया था और उसकी जबरन शादी करा दी थी। शेखपुरा जिले के बरबीघा निवासी ममता देवी 4 अगस्त को अपनी 18 वर्षीय मानसिक रूप से अस्वस्थ पुत्री का इलाज कराने रामचंद्रपुर स्थित एक मनोरोग विशेषज्ञ के पास आई थीं। इसी दौरान उनकी बेटी बस स्टैंड से अचानक लापता हो गई। ममता देवी की शिकायत पर बरबीघा थाने में शून्य प्राथमिकी दर्ज कर इसे लहेरी थाना भेजा गया, जहां 1 सितंबर को प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की गई। अपहरण से लेकर शादी तक पूरी कहानी पढ़िए… मुंह पर रुमाल रखकर किया था अगवा अनुसंधान एवं तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने युवती को इस्लामपुर थाना क्षेत्र के रघुनाथपुर सोहजना गांव से सकुशल ढूंढ निकाला। पूछताछ में खुलासा हुआ कि पटना जिले के पंडारक (मानिकपुर) निवासी 59 वर्षीय उषा देवी ने बस स्टैंड पर युवती के मुंह पर रुमाल रखकर उसे जबरन ऑटो में बैठाया और बाढ़ के उमानाथ मंदिर ले गई। 50 हजार में हुआ सौदा, आपस में बांटी रकम
वहां उषा देवी, सुधीर सिंह और बीरेंद्र सिंह उर्फ बिल्लू ने मिलकर युवती की शादी नालंदा के इस्लामपुर थाना क्षेत्र के रघुनाथपुर सोहजना निवासी 50 वर्षीय दिलीप सिंह से जबरन करा दी। इस सौदे के बदले दिलीप सिंह से 50,000 रुपये वसूले गए। इसमें से सुधीर सिंह ने 30,000 रुपये तथा उषा देवी और बीरेंद्र सिंह ने 10,000-10,000 रुपये आपस में बांट लिए। पकड़े गए अभियुक्तों में पटना जिले के पंडारक थाना अंतर्गत मानिकपुर निवासी स्वर्गीय झपसी सिंह की 59 वर्षीय पत्नी उषा देवी, नालंदा के इस्लामपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत रघुनाथ सोहजना निवासी 50 वर्षीय दिलीप सिंह, पटना के बाढ़ अंतर्गत दयालचक निवासी सुधीर सिंह तथा मानिकपुर निवासी बीरेंद्र सिंह उर्फ बिल्लू शामिल हैं। असहाय लड़कियों को निशाना बनाती थी आरोपी महिला
अगवा युवती की खरीद-फरोख्त के मामले में पुलिस अनुसंधान के दौरान कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। मामले में मुख्य भूमिका निभाने वाली आरोपी महिला उषा देवी ऐसे मामलों की आदी बताई जा रही है, जो विशेष रूप से उन असहाय लड़कियों को अपना निशाना बनाती है, जो या तो किसी पारिवारिक विवाद के कारण घर से भाग जाती हैं या अन्य मजबूरियों के चलते भटककर घर से निकलती हैं। रामचंद्रपुर बस स्टैंड पर असहाय हालत में दिखी 18 वर्षीय मानसिक रूप से अस्वस्थ युवती को भी उसने इसी रणनीति के तहत बहला-फुसलाकर अगवा कर लिया था।
कमरे में बंद रखता था दिलीप सिंह अगवा करने के बाद बीते 4 अगस्त को उमानाथ मंदिर ले जाकर उसकी जबरन 50 वर्षीय दिलीप सिंह से शादी करा दी गई थी। शादी के बाद से ही आरोपी दिलीप सिंह युवती को इस्लामपुर के रघुनाथ सोहजना स्थित अपने घर में एक कमरे में बंद रखता था और किसी से भी मिलने-जुलने नहीं देता था। पीड़िता लगातार उसके जुल्म और पहरे में घुट-घुटकर जी रही थी। फोन से परिजनों से किया संपर्क इसी बीच युवती किसी तरह हिम्मत जुटाकर दिलीप सिंह के चंगुल से बाहर निकली और फोन के जरिए अपने परिजनों से संपर्क साधा। बेटी की लोकेशन मिलते ही बदहवास माता-पिता उसे वापस लाने सीधे इस्लामपुर स्थित दिलीप सिंह के घर पहुंचे। लेकिन वहां पहुंचने पर दिलीप सिंह ने क्रूरता और दबंगई दिखाते हुए पीड़िता को उसके परिजनों को सौंपने से साफ इनकार कर दिया। उसने परिजनों से दो टूक कहा कि उसने युवती को 50 हजार रुपये नकद देकर खरीदा है, इसलिए वे उसे अपने साथ नहीं ले जा सकते। लाचार परिजनों ने इसके बाद सीधे पुलिस की शरण ली और पूरे घटनाक्रम से अवगत कराया। सूचना मिलते ही लहेरी पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए छापेमारी की और पीड़िता को सकुशल बरामद करने के साथ-साथ खरीददार दिलीप सिंह और बिचौलिया उषा देवी समेत चारों आरोपियों को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया। तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर चारों आरोपी गिरफ्तार
पुलिस की विशेष छापेमारी टीम ने गुप्त सूचना और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर घेराबंदी कर इन सभी आरोपियों को विभिन्न इलाकों से दबोचने में सफलता पाई। लहेरी थानाध्यक्ष रंजीत कुमार रजक ने बताया कि गिरफ्तार किए गए सभी चारों अभियुक्तों के विरुद्ध कानूनी शिकंजा कसते हुए उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेजने की कागजी प्रक्रिया पूरी की जा रही है। इसके साथ ही पुलिस इन सभी आरोपियों के आपराधिक नेटवर्क और पुराने मुकदमों की कुंडली भी संबंधित थानों से खंगाल रही है, ताकि गिरोह से जुड़ी अन्य कड़ियों का पर्दाफाश किया जा सके। नालंदा के लहेरी थाना क्षेत्र के रामचंद्रपुर बस स्टैंड से रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हुई 18 वर्षीय युवती को पुलिस ने सकुशल बरामद कर लिया है। पुलिस ने इस मामले में संलिप्त एक महिला सहित चार आरोपियों को दबोचने में सफलता पाई है। आरोपियों ने युवती को अगवा कर 50 हजार रुपये में बेच दिया था और उसकी जबरन शादी करा दी थी। शेखपुरा जिले के बरबीघा निवासी ममता देवी 4 अगस्त को अपनी 18 वर्षीय मानसिक रूप से अस्वस्थ पुत्री का इलाज कराने रामचंद्रपुर स्थित एक मनोरोग विशेषज्ञ के पास आई थीं। इसी दौरान उनकी बेटी बस स्टैंड से अचानक लापता हो गई। ममता देवी की शिकायत पर बरबीघा थाने में शून्य प्राथमिकी दर्ज कर इसे लहेरी थाना भेजा गया, जहां 1 सितंबर को प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की गई। अपहरण से लेकर शादी तक पूरी कहानी पढ़िए… मुंह पर रुमाल रखकर किया था अगवा अनुसंधान एवं तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने युवती को इस्लामपुर थाना क्षेत्र के रघुनाथपुर सोहजना गांव से सकुशल ढूंढ निकाला। पूछताछ में खुलासा हुआ कि पटना जिले के पंडारक (मानिकपुर) निवासी 59 वर्षीय उषा देवी ने बस स्टैंड पर युवती के मुंह पर रुमाल रखकर उसे जबरन ऑटो में बैठाया और बाढ़ के उमानाथ मंदिर ले गई। 50 हजार में हुआ सौदा, आपस में बांटी रकम
वहां उषा देवी, सुधीर सिंह और बीरेंद्र सिंह उर्फ बिल्लू ने मिलकर युवती की शादी नालंदा के इस्लामपुर थाना क्षेत्र के रघुनाथपुर सोहजना निवासी 50 वर्षीय दिलीप सिंह से जबरन करा दी। इस सौदे के बदले दिलीप सिंह से 50,000 रुपये वसूले गए। इसमें से सुधीर सिंह ने 30,000 रुपये तथा उषा देवी और बीरेंद्र सिंह ने 10,000-10,000 रुपये आपस में बांट लिए। पकड़े गए अभियुक्तों में पटना जिले के पंडारक थाना अंतर्गत मानिकपुर निवासी स्वर्गीय झपसी सिंह की 59 वर्षीय पत्नी उषा देवी, नालंदा के इस्लामपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत रघुनाथ सोहजना निवासी 50 वर्षीय दिलीप सिंह, पटना के बाढ़ अंतर्गत दयालचक निवासी सुधीर सिंह तथा मानिकपुर निवासी बीरेंद्र सिंह उर्फ बिल्लू शामिल हैं। असहाय लड़कियों को निशाना बनाती थी आरोपी महिला
अगवा युवती की खरीद-फरोख्त के मामले में पुलिस अनुसंधान के दौरान कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। मामले में मुख्य भूमिका निभाने वाली आरोपी महिला उषा देवी ऐसे मामलों की आदी बताई जा रही है, जो विशेष रूप से उन असहाय लड़कियों को अपना निशाना बनाती है, जो या तो किसी पारिवारिक विवाद के कारण घर से भाग जाती हैं या अन्य मजबूरियों के चलते भटककर घर से निकलती हैं। रामचंद्रपुर बस स्टैंड पर असहाय हालत में दिखी 18 वर्षीय मानसिक रूप से अस्वस्थ युवती को भी उसने इसी रणनीति के तहत बहला-फुसलाकर अगवा कर लिया था।
कमरे में बंद रखता था दिलीप सिंह अगवा करने के बाद बीते 4 अगस्त को उमानाथ मंदिर ले जाकर उसकी जबरन 50 वर्षीय दिलीप सिंह से शादी करा दी गई थी। शादी के बाद से ही आरोपी दिलीप सिंह युवती को इस्लामपुर के रघुनाथ सोहजना स्थित अपने घर में एक कमरे में बंद रखता था और किसी से भी मिलने-जुलने नहीं देता था। पीड़िता लगातार उसके जुल्म और पहरे में घुट-घुटकर जी रही थी। फोन से परिजनों से किया संपर्क इसी बीच युवती किसी तरह हिम्मत जुटाकर दिलीप सिंह के चंगुल से बाहर निकली और फोन के जरिए अपने परिजनों से संपर्क साधा। बेटी की लोकेशन मिलते ही बदहवास माता-पिता उसे वापस लाने सीधे इस्लामपुर स्थित दिलीप सिंह के घर पहुंचे। लेकिन वहां पहुंचने पर दिलीप सिंह ने क्रूरता और दबंगई दिखाते हुए पीड़िता को उसके परिजनों को सौंपने से साफ इनकार कर दिया। उसने परिजनों से दो टूक कहा कि उसने युवती को 50 हजार रुपये नकद देकर खरीदा है, इसलिए वे उसे अपने साथ नहीं ले जा सकते। लाचार परिजनों ने इसके बाद सीधे पुलिस की शरण ली और पूरे घटनाक्रम से अवगत कराया। सूचना मिलते ही लहेरी पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए छापेमारी की और पीड़िता को सकुशल बरामद करने के साथ-साथ खरीददार दिलीप सिंह और बिचौलिया उषा देवी समेत चारों आरोपियों को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया। तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर चारों आरोपी गिरफ्तार
पुलिस की विशेष छापेमारी टीम ने गुप्त सूचना और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर घेराबंदी कर इन सभी आरोपियों को विभिन्न इलाकों से दबोचने में सफलता पाई। लहेरी थानाध्यक्ष रंजीत कुमार रजक ने बताया कि गिरफ्तार किए गए सभी चारों अभियुक्तों के विरुद्ध कानूनी शिकंजा कसते हुए उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेजने की कागजी प्रक्रिया पूरी की जा रही है। इसके साथ ही पुलिस इन सभी आरोपियों के आपराधिक नेटवर्क और पुराने मुकदमों की कुंडली भी संबंधित थानों से खंगाल रही है, ताकि गिरोह से जुड़ी अन्य कड़ियों का पर्दाफाश किया जा सके।

