दतिया के इंदरगढ़ क्षेत्र के कंजौली गांव में गुरुवार शाम 75 साल के मुलायम सिंह बघेल का अंतिम संस्कार तिरपाल तानकर करना पड़ा। सुबह से हो रही बारिश के बीच परिवार और ग्रामीण शव लेकर श्मशान घाट पहुंचे थे। वहां बारिश से बचने के लिए न टिन शेड था, न कोई दूसरी व्यवस्था। आखिरकार ग्रामीणों ने तिरपाल ताना और उसी के नीचे अंतिम संस्कार किया। घटना का वीडियो देर रात सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। वीडियो में बारिश के बीच तिरपाल के नीचे अंतिम संस्कार होता दिखाई दे रहा है। परिजनों के अनुसार, मुलायम सिंह बघेल का गुरुवार दोपहर बीमारी के चलते निधन हुआ था। सुबह से ही बारिश हो रही थी। परिवार कुछ देर बारिश रुकने का इंतजार करता रहा। बारिश नहीं रुकी तो शाम को शव लेकर श्मशान घाट पहुंचे। श्मशान घाट खुले में होने के कारण अंतिम संस्कार करना मुश्किल था। ग्रामीणों ने तिरपाल ताना और उसके नीचे दाह संस्कार किया। कीचड़ भरे रास्ते से शव लेकर पहुंचे मृतक के बेटे खेमराज बघेल ने बताया कि उनके पिता बीमार थे। बारिश के कारण अंतिम संस्कार के लिए तिरपाल का सहारा लेना पड़ा। उन्होंने बताया कि श्मशान घाट पर टिन शेड नहीं है। वहां तक जाने के लिए पक्का रास्ता भी नहीं है। बारिश के बाद कच्चा रास्ता कीचड़ में बदल गया था। ऐसे में ग्रामीणों को इसी रास्ते से शव लेकर जाना पड़ा। नेताओं के विकास के दावों पर सवाल कागजों और भाषणों में गांवों तक विकास पहुंचने की बातें होती हैं। लेकिन कंजौली में एक बुजुर्ग को आखिरी विदाई भी बारिश से बचाकर नहीं दी जा सकी।बारिश आई तो श्मशान घाट की व्यवस्था सामने आ गई। न शेड मिला, न पक्का रास्ता। ग्रामीणों को तिरपाल के सहारे अंतिम संस्कार करना पड़ा। यह तस्वीर सिर्फ एक परिवार की परेशानी नहीं दिखाती। यह गांव के उस श्मशान की हालत भी दिखाती है, जहां लोगों को अपने परिजनों को अंतिम विदाई देनी होती है। श्मशान की जमीन पर कब्जे का आरोप ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि गांव के मुक्तिधाम की जमीन पर कुछ लोगों ने कब्जा कर रखा है। उनका कहना है कि श्मशान घाट पर न बारिश से बचने के लिए शेड है और न आने-जाने के लिए पक्का रास्ता।ग्रामीणों ने प्रशासन से श्मशान घाट की जमीन की जांच कराने, रास्ता बनवाने और टिन शेड लगाने की मांग की है।

