खगड़िया के प्राथमिक विद्यालय जयंती ग्राम, औता की शिक्षिका मधु कुमारी को इस साल 5 सितंबर को राजकीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। उन्हें शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार, समर्पण और रचनात्मक शिक्षण के लिए चुना गया है। महेशखूंट की रहने वाली मधु कुमारी के चयन से विद्यालय और पूरे खगड़िया जिले में खुशी का माहौल है। मधु कुमारी ने अपनी पढ़ाई को सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने इसे गतिविधियों, प्रयोगों, कला, खेल और नए तरीकों से जोड़ा। सीमित संसाधनों के बावजूद, उन्होंने बेकार चीजों से आकर्षक और उपयोगी शिक्षण सामग्री (टीएलएम) बनाई। इससे उन्होंने बच्चों के लिए मुश्किल विषयों को भी आसान और मजेदार बनाने की कोशिश की। उनके नए टीएलएम कामों को राज्य स्तर पर पहचान मिली है। उन्हें दो बार राज्य स्तरीय टीएलएम मेले में सम्मानित किया जा चुका है। इसके अलावा, उन्हें बिहार गौरव सम्मान भी मिल चुका है। खेल-खेल में बच्चों को सिखाना उनकी कला मधु कुमारी बच्चों में रचनात्मकता जगाने के लिए मूर्ति कला, मंजूषा कला, मधुबनी पेंटिंग और कई तरह की हाथ से बनी क्राफ्ट गतिविधियों को पढ़ाई से जोड़ती हैं। खेल-खेल में बच्चों को सिखाना उनकी पढ़ाने की खास बात है। उन्होंने नामांकन पखवाड़ा, पोषण पखवाड़ा और कला-संस्कृति से जुड़े कार्यक्रमों में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया है। शिक्षिका ने क्लास में पढ़ाने के अलावा बच्चों और स्कूल के विकास में भी अपने स्तर पर मदद की। उन्होंने अपने पैसों से बच्चों के लिए टाई, बेल्ट, टोपी, जूते, मोजे और साफ-सफाई का सामान दिया। स्कूल में जरूरी मरम्मत और सुधार के कामों में भी उन्होंने सहयोग किया। स्कूल की पुरानी छत से पानी टपकने से रोकने के लिए ढलाई और मरम्मत के काम में भी उन्होंने अपने संसाधनों से योगदान दिया। उनके प्रयासों के बाद स्कूल में बच्चों की रोज की हाजिरी में भी काफी बढ़ोतरी हुई है। मधु कुमारी के नए शैक्षणिक कामों को निपुण संवाद पत्रिका में भी जगह मिली है। उनके शैक्षणिक लेख भी उसमें छपे हैं। बिहार के शिक्षकों में उन्हें एक माह के लिए टीचर ऑफ द मंथ के रूप में भी चयनित एवं सम्मानित किया जा चुका है। बैंक की नौकरी छोड़कर चुना शिक्षण का क्षेत्र रसायन विज्ञान से स्नातक और एमबीए करने के बाद मधु कुमारी ने निजी बैंक में शाखा प्रबंधक के रूप में कार्य किया। एक दुर्घटना के बाद उन्होंने नौकरी छोड़कर शिक्षा के क्षेत्र को अपना कार्यक्षेत्र बनाया। साल 2014 में टीईटी शिक्षिका के रूप में उनकी शिक्षकीय यात्रा शुरू हुई। वर्ष 2023 में बीपीएससी टीआरई-1 के माध्यम से उनका पुनः चयन हुआ। स्थानांतरण के बाद वे पिछले करीब एक वर्ष से प्राथमिक विद्यालय जयंती ग्राम, औता में कार्यरत हैं। डीएम और डीईओ ने दी बधाई जिलाधिकारी विक्रम विरकर ने मधु कुमारी के राजकीय शिक्षक पुरस्कार के लिए चयनित होने पर बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने इसे जिले के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि बताते हुए उनके शैक्षणिक प्रयासों की सराहना की। जिला शिक्षा पदाधिकारी अमरेंद्र कुमार गोंड ने भी उन्हें बधाई देते हुए कहा कि शिक्षकों के नवाचारपूर्ण प्रयास और बच्चों के प्रति समर्पण शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। विद्यालय के प्रधान शिक्षक अविनाश कुमार कन्हैया ने कहा कि मधु कुमारी का चयन पूरे विद्यालय परिवार के लिए गर्व का क्षण है। उनके नवाचार और रचनात्मक शिक्षण से विद्यालय में सकारात्मक बदलाव आया है। शिक्षा के साथ साहित्य में भी सक्रिय मधु कुमारी शिक्षा के साथ साहित्य के क्षेत्र में भी सक्रिय हैं। उनकी प्रकाशित कृतियों में ‘प्रज्ञास्वर’ स्त्री चेतना आधारित काव्य संग्रह तथा ‘युग गाथा’ रामायण और महाभारत के महत्वपूर्ण पात्रों पर आधारित काव्यात्मक प्रस्तुति शामिल है। ‘ चॉक पेंसिल’ कहानी संग्रह में उन्होंने लेखिका के रूप में योगदान दिया है। वहीं उनकी आगामी पुस्तक ‘सीखों की उड़ान’ के संपादन का दायित्व भी उन्हें मिला है। मधु कुमारी की उपलब्धि वर्षों की मेहनत, नवाचार और शिक्षा के प्रति समर्पण का परिणाम है। सीमित संसाधनों को अवसर में बदलकर बच्चों के सीखने को आनंदमय बनाने की उनकी पहल उन्हें एक विशिष्ट पहचान देती है। खगड़िया के प्राथमिक विद्यालय जयंती ग्राम, औता की शिक्षिका मधु कुमारी को इस साल 5 सितंबर को राजकीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। उन्हें शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार, समर्पण और रचनात्मक शिक्षण के लिए चुना गया है। महेशखूंट की रहने वाली मधु कुमारी के चयन से विद्यालय और पूरे खगड़िया जिले में खुशी का माहौल है। मधु कुमारी ने अपनी पढ़ाई को सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने इसे गतिविधियों, प्रयोगों, कला, खेल और नए तरीकों से जोड़ा। सीमित संसाधनों के बावजूद, उन्होंने बेकार चीजों से आकर्षक और उपयोगी शिक्षण सामग्री (टीएलएम) बनाई। इससे उन्होंने बच्चों के लिए मुश्किल विषयों को भी आसान और मजेदार बनाने की कोशिश की। उनके नए टीएलएम कामों को राज्य स्तर पर पहचान मिली है। उन्हें दो बार राज्य स्तरीय टीएलएम मेले में सम्मानित किया जा चुका है। इसके अलावा, उन्हें बिहार गौरव सम्मान भी मिल चुका है। खेल-खेल में बच्चों को सिखाना उनकी कला मधु कुमारी बच्चों में रचनात्मकता जगाने के लिए मूर्ति कला, मंजूषा कला, मधुबनी पेंटिंग और कई तरह की हाथ से बनी क्राफ्ट गतिविधियों को पढ़ाई से जोड़ती हैं। खेल-खेल में बच्चों को सिखाना उनकी पढ़ाने की खास बात है। उन्होंने नामांकन पखवाड़ा, पोषण पखवाड़ा और कला-संस्कृति से जुड़े कार्यक्रमों में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया है। शिक्षिका ने क्लास में पढ़ाने के अलावा बच्चों और स्कूल के विकास में भी अपने स्तर पर मदद की। उन्होंने अपने पैसों से बच्चों के लिए टाई, बेल्ट, टोपी, जूते, मोजे और साफ-सफाई का सामान दिया। स्कूल में जरूरी मरम्मत और सुधार के कामों में भी उन्होंने सहयोग किया। स्कूल की पुरानी छत से पानी टपकने से रोकने के लिए ढलाई और मरम्मत के काम में भी उन्होंने अपने संसाधनों से योगदान दिया। उनके प्रयासों के बाद स्कूल में बच्चों की रोज की हाजिरी में भी काफी बढ़ोतरी हुई है। मधु कुमारी के नए शैक्षणिक कामों को निपुण संवाद पत्रिका में भी जगह मिली है। उनके शैक्षणिक लेख भी उसमें छपे हैं। बिहार के शिक्षकों में उन्हें एक माह के लिए टीचर ऑफ द मंथ के रूप में भी चयनित एवं सम्मानित किया जा चुका है। बैंक की नौकरी छोड़कर चुना शिक्षण का क्षेत्र रसायन विज्ञान से स्नातक और एमबीए करने के बाद मधु कुमारी ने निजी बैंक में शाखा प्रबंधक के रूप में कार्य किया। एक दुर्घटना के बाद उन्होंने नौकरी छोड़कर शिक्षा के क्षेत्र को अपना कार्यक्षेत्र बनाया। साल 2014 में टीईटी शिक्षिका के रूप में उनकी शिक्षकीय यात्रा शुरू हुई। वर्ष 2023 में बीपीएससी टीआरई-1 के माध्यम से उनका पुनः चयन हुआ। स्थानांतरण के बाद वे पिछले करीब एक वर्ष से प्राथमिक विद्यालय जयंती ग्राम, औता में कार्यरत हैं। डीएम और डीईओ ने दी बधाई जिलाधिकारी विक्रम विरकर ने मधु कुमारी के राजकीय शिक्षक पुरस्कार के लिए चयनित होने पर बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने इसे जिले के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि बताते हुए उनके शैक्षणिक प्रयासों की सराहना की। जिला शिक्षा पदाधिकारी अमरेंद्र कुमार गोंड ने भी उन्हें बधाई देते हुए कहा कि शिक्षकों के नवाचारपूर्ण प्रयास और बच्चों के प्रति समर्पण शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। विद्यालय के प्रधान शिक्षक अविनाश कुमार कन्हैया ने कहा कि मधु कुमारी का चयन पूरे विद्यालय परिवार के लिए गर्व का क्षण है। उनके नवाचार और रचनात्मक शिक्षण से विद्यालय में सकारात्मक बदलाव आया है। शिक्षा के साथ साहित्य में भी सक्रिय मधु कुमारी शिक्षा के साथ साहित्य के क्षेत्र में भी सक्रिय हैं। उनकी प्रकाशित कृतियों में ‘प्रज्ञास्वर’ स्त्री चेतना आधारित काव्य संग्रह तथा ‘युग गाथा’ रामायण और महाभारत के महत्वपूर्ण पात्रों पर आधारित काव्यात्मक प्रस्तुति शामिल है। ‘ चॉक पेंसिल’ कहानी संग्रह में उन्होंने लेखिका के रूप में योगदान दिया है। वहीं उनकी आगामी पुस्तक ‘सीखों की उड़ान’ के संपादन का दायित्व भी उन्हें मिला है। मधु कुमारी की उपलब्धि वर्षों की मेहनत, नवाचार और शिक्षा के प्रति समर्पण का परिणाम है। सीमित संसाधनों को अवसर में बदलकर बच्चों के सीखने को आनंदमय बनाने की उनकी पहल उन्हें एक विशिष्ट पहचान देती है।

