शिवपुरी ढाला में 50 साल से लग रहा जन्माष्टमी मेला:सहरसा में 4 से 6 सितंबर तक होगा 3 दिवसीय आयोजन, मनोकामनाएं पूरी होने की है मान्यता

शिवपुरी ढाला में 50 साल से लग रहा जन्माष्टमी मेला:सहरसा में 4 से 6 सितंबर तक होगा 3 दिवसीय आयोजन, मनोकामनाएं पूरी होने की है मान्यता

सहरसा शहर के शिवपुरी ढाला के पास पीपल और बरगद के पेड़ के नीचे लगने वाला श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मेला इस साल 4 सितंबर से शुरू होगा। यह मेला करीब 50 सालों से लग रहा है और इस बार तीन दिनों तक चलेगा। श्रद्धालु 4, 5 और 6 सितंबर तक इसका आनंद ले सकेंगे। मेला समिति ने झूले लगाने और दुकानें सजाने जैसी तैयारियां शुरू कर दी हैं। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मेला समिति के उपाध्यक्ष पिंटू पाराशर ने बताया कि शिवपुरी ढाला के पास साल 1974 से हर साल जन्माष्टमी पर यह मेला लगता आ रहा है। इसकी शुरुआत मोहल्ले के विशेश्वर प्रसाद यादव, दिलेश्वर पोद्दार, जय नारायण यादव और कोसी प्रोजेक्ट के मणिलाल सिंह ने मिलकर की थी। पेड़ के नीचे श्रीकृष्ण की मूर्ति बनाकर की पूजा उन्होंने बताया कि उस समय विशेश्वर प्रसाद यादव, दिलेश्वर पोद्दार और जय नारायण यादव बेरोजगार थे। मणिलाल सिंह ने उन्हें सुझाव दिया कि पीपल के पेड़ के नीचे भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति बनाकर पूजा की जाए। उनका मानना था कि इससे भगवान की कृपा से उनकी इच्छाएं पूरी हो सकती हैं। इसके बाद सभी ने मिलकर चंदा इकट्ठा किया, राधा-कृष्ण की मूर्ति बनवाई और पूजा के साथ मेले की शुरुआत की। एक साल बाद मिली शिक्षक की नौकरी मेला समिति के मुताबिक, इसके अगले ही साल विशेश्वर प्रसाद यादव को शिक्षक की नौकरी मिल गई। वहीं, दिलेश्वर पोद्दार को अपने कारोबार में बहुत फायदा हुआ। इसके बाद इस जगह के प्रति लोगों की आस्था बढ़ती गई और हर साल जन्माष्टमी पर मेला लगने लगा। धीरे-धीरे आसपास के लोग भी इस आयोजन से जुड़ते गए और दान व सहयोग से मेले को आगे बढ़ाने लगे। लोगों की बढ़ती आस्था और सहयोग के बाद करीब 38 साल बाद, साल 2012 में मेला समिति ने राधा-कृष्ण मंदिर बनवाया। वहां राधा-कृष्ण की पत्थर की मूर्ति स्थापित की गई। तब से आसपास के लोग रोज मंदिर आकर पूजा करते हैं। श्रद्धालुओं का मानना है कि यहां सच्चे मन से भगवान राधा-कृष्ण की पूजा करने से उनकी सभी इच्छाएं पूरी होती हैं। 5 सितंबर को मेले का मुख्य आयोजन मेला समिति के उपाध्यक्ष पिंटू पाराशर ने बताया कि उनका जीवन भी इस स्थान की आस्था से जुड़ा है। उन्होंने बताया कि वे भी एक समय बेरोजगार थे और यहां भगवान राधा-कृष्ण से मनोकामना मांगी थी। इसके बाद उन्हें सेना में नौकरी मिल गई। सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद वे अब मेला समिति के उपाध्यक्ष के रूप में हर वर्ष आयोजन में अपनी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। इस वर्ष 4 सितंबर की रात भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जाएगा। 5 सितंबर को मेले का मुख्य आयोजन होगा, जबकि 6 सितंबर की रात 12 बजे के बाद मेले का समापन किया जाएगा। तीन दिवसीय आयोजन को लेकर शिवपुरी ढाला और आसपास के इलाकों में उत्साह है। मेले में बच्चों और आम लोगों के मनोरंजन के लिए झूले लगाए जाएंगे तथा रंग-बिरंगी दुकानों से मेला परिसर सजाया जाएगा। मेला समिति श्रद्धालुओं के स्वागत और सफल आयोजन को लेकर तैयारियों में जुटी हुई है। सहरसा शहर के शिवपुरी ढाला के पास पीपल और बरगद के पेड़ के नीचे लगने वाला श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मेला इस साल 4 सितंबर से शुरू होगा। यह मेला करीब 50 सालों से लग रहा है और इस बार तीन दिनों तक चलेगा। श्रद्धालु 4, 5 और 6 सितंबर तक इसका आनंद ले सकेंगे। मेला समिति ने झूले लगाने और दुकानें सजाने जैसी तैयारियां शुरू कर दी हैं। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मेला समिति के उपाध्यक्ष पिंटू पाराशर ने बताया कि शिवपुरी ढाला के पास साल 1974 से हर साल जन्माष्टमी पर यह मेला लगता आ रहा है। इसकी शुरुआत मोहल्ले के विशेश्वर प्रसाद यादव, दिलेश्वर पोद्दार, जय नारायण यादव और कोसी प्रोजेक्ट के मणिलाल सिंह ने मिलकर की थी। पेड़ के नीचे श्रीकृष्ण की मूर्ति बनाकर की पूजा उन्होंने बताया कि उस समय विशेश्वर प्रसाद यादव, दिलेश्वर पोद्दार और जय नारायण यादव बेरोजगार थे। मणिलाल सिंह ने उन्हें सुझाव दिया कि पीपल के पेड़ के नीचे भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति बनाकर पूजा की जाए। उनका मानना था कि इससे भगवान की कृपा से उनकी इच्छाएं पूरी हो सकती हैं। इसके बाद सभी ने मिलकर चंदा इकट्ठा किया, राधा-कृष्ण की मूर्ति बनवाई और पूजा के साथ मेले की शुरुआत की। एक साल बाद मिली शिक्षक की नौकरी मेला समिति के मुताबिक, इसके अगले ही साल विशेश्वर प्रसाद यादव को शिक्षक की नौकरी मिल गई। वहीं, दिलेश्वर पोद्दार को अपने कारोबार में बहुत फायदा हुआ। इसके बाद इस जगह के प्रति लोगों की आस्था बढ़ती गई और हर साल जन्माष्टमी पर मेला लगने लगा। धीरे-धीरे आसपास के लोग भी इस आयोजन से जुड़ते गए और दान व सहयोग से मेले को आगे बढ़ाने लगे। लोगों की बढ़ती आस्था और सहयोग के बाद करीब 38 साल बाद, साल 2012 में मेला समिति ने राधा-कृष्ण मंदिर बनवाया। वहां राधा-कृष्ण की पत्थर की मूर्ति स्थापित की गई। तब से आसपास के लोग रोज मंदिर आकर पूजा करते हैं। श्रद्धालुओं का मानना है कि यहां सच्चे मन से भगवान राधा-कृष्ण की पूजा करने से उनकी सभी इच्छाएं पूरी होती हैं। 5 सितंबर को मेले का मुख्य आयोजन मेला समिति के उपाध्यक्ष पिंटू पाराशर ने बताया कि उनका जीवन भी इस स्थान की आस्था से जुड़ा है। उन्होंने बताया कि वे भी एक समय बेरोजगार थे और यहां भगवान राधा-कृष्ण से मनोकामना मांगी थी। इसके बाद उन्हें सेना में नौकरी मिल गई। सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद वे अब मेला समिति के उपाध्यक्ष के रूप में हर वर्ष आयोजन में अपनी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। इस वर्ष 4 सितंबर की रात भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जाएगा। 5 सितंबर को मेले का मुख्य आयोजन होगा, जबकि 6 सितंबर की रात 12 बजे के बाद मेले का समापन किया जाएगा। तीन दिवसीय आयोजन को लेकर शिवपुरी ढाला और आसपास के इलाकों में उत्साह है। मेले में बच्चों और आम लोगों के मनोरंजन के लिए झूले लगाए जाएंगे तथा रंग-बिरंगी दुकानों से मेला परिसर सजाया जाएगा। मेला समिति श्रद्धालुओं के स्वागत और सफल आयोजन को लेकर तैयारियों में जुटी हुई है।  

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