भोपाल, तीन सितंबर मध्यप्रदेश आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) ने सरकारी ई-मार्केटप्लेस (जीईएम) पर कथित फर्जी बोली लगाकर पुराने कंप्यूटरों को नया बताकर और अन्य घटिया उपकरणों की आपूर्ति करने से जुड़े 10.99 करोड़ रुपये के खरीद घोटाले का खुलासा किया है। अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। ईओडब्ल्यू के महानिदेशक उपेंद्र जैन ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग की खरीद में कथित अनियमितताओं के संबंध में अलग-अलग कंपनियों से जुड़े चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
उन्होंने बताया कि ईओडब्ल्यू की जांच में सामने आया कि चार कंपनियों का कथित तौर पर एक ही व्यक्ति से संबंध था या उनका नियंत्रण उसी के पास था। इन कंपनियों ने जीईएम की निविदाओं में इस तरह भाग लिया कि वे एक-दूसरे की प्रतिस्पर्धी प्रतीत हों। जैन ने बताया कि इन कंपनियों ने एक ही मोबाइल नंबर का इस्तेमाल किया, जो एक साझा जीएसटी खाते के तहत पंजीकृत था।
इसके अलावा उनके ई-मेल आईडी और पते भी समान थे। उन्होंने बताया कि कंपनियों ने निविदाओं में साथ-साथ भाग लिया और बोली के लिए पात्रता हासिल करने के वास्ते निर्माताओं के प्राधिकरण पत्र भी जमा किए। ईओडब्ल्यू ने बताया कि कुछ खरीद में कंपनियों ने पुराने कंप्यूटरों को नया बताकर आपूर्ति की।
एक मामले में 22 जुलाई, 2024 को लगाए गए कंप्यूटरों को 23 सितंबर, 2024 को जारी निविदा में नया उपकरण बताया गया। जांच में आपूर्ति किए गए कंप्यूटरों के विनिर्देशों में भी विसंगतियां मिलीं। ईओडब्ल्यू ने बताया कि कंपनियों ने स्थानीय स्तर पर खरीदी गई एसएसडी और रैम वाले ऐसे उपकरणों की आपूर्ति की, जो निर्धारित विनिर्देशों के अनुरूप नहीं थे।
जैन ने बताया कि एक कंपनी ने निविदा में भाग लेने के लिए एक बहुराष्ट्रीय कंप्यूटर निर्माता कंपनी द्वारा जारी किया हुआ कथित फर्जी प्राधिकरण पत्र भी जमा किया। ईओडब्ल्यू ने बताया कि विभाग ने 6,086 रुपये अंकित मूल्य वाले एक यूपीएस की कथित तौर पर 11,247 रुपये में खरीद की, जबकि जीईएम पर इसकी कीमत 3,754 रुपये थी। जांच के अनुसार, निर्माता ने भी एजेंसी को बताया कि खरीद में उल्लिखित यूपीएस मॉडल की आपूर्ति निविदा के तहत नहीं की गई थी।
ईओडब्ल्यू ने कथित अनियमितताओं में शामिल कंपनियों के खिलाफ उन्हें काली सूची में डालने सहित अन्य कार्रवाई की सिफारिश की है। ईओडब्ल्यू ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं के तहत एक सितंबर को प्राथमिकी दर्ज की गई।

