पीलीभीत में उधार ली गई 26 लाख पांच हजार रुपये की रकम चुकाने के लिए बंद बैंक खाते का चेक देना नेतराम को महंगा पड़ गया। चेक बाउंस के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश (कक्ष संख्या-01) महेंद्र श्रीवास्तव की अदालत ने उसकी फौजदारी अपील खारिज कर दी। अदालत ने निचली अदालत से सुनाई गई नौ माह के साधारण कारावास और 30.50 लाख रुपये अर्थदंड की सजा को बरकरार रखा। फैसला सुनाए जाने के बाद दोषी को तत्काल जेल भेज दिया गया। जेसीबी-कंबाइन खरीदने के लिए लिए थे 26.05 लाख मामला वर्ष 2021 से जुड़ा है। ग्राम खैरौसा निवासी नेतराम ने ग्राम पंडरी खमरिया निवासी लाला राम से जेसीबी और कंबाइन मशीन खरीदने के लिए 26 लाख पांच हजार रुपये उधार लिए थे। रकम वापस मांगने पर नेतराम ने पांच दिसंबर 2022 को केनरा बैंक का 26 लाख पांच हजार रुपये का चेक लाला राम को दिया। लाला राम ने चेक भुगतान के लिए बैंक में लगाया, लेकिन 16 दिसंबर को बैंक ने इसे इस आधार पर लौटा दिया कि संबंधित खाता पहले ही बंद हो चुका था। नोटिस के बाद कोर्ट पहुंचा मामला चेक बाउंस होने के बाद लाला राम ने नेतराम को कानूनी नोटिस भेजा। इसके बावजूद रकम का भुगतान नहीं किया गया। इसके बाद उन्होंने न्यायालय में शिकायत दर्ज कराई। मामले की सुनवाई के बाद सिविल जज (जूनियर डिवीजन)/जेएम कोर्ट नंबर-1 ने 16 जनवरी 2026 को नेतराम को दोषी करार देते हुए नौ माह के साधारण कारावास और 30.50 लाख रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई थी। चेकबुक खोने और फर्जी हस्ताक्षर का दिया तर्क निचली अदालत के फैसले के खिलाफ नेतराम ने सत्र न्यायालय में अपील दाखिल की। उसने दावा किया कि उसकी चेकबुक खो गई थी और उसके हस्ताक्षर का दुरुपयोग कर फर्जी चेक तैयार किया गया। अपर सत्र न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों और कानूनी नजीरों का परीक्षण करने के बाद इस दलील को आधारहीन माना। अदालत ने कहा कि बंद खाते से चेक जारी करना भी नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट की धारा 138 के दायरे में अपराध है। सत्र अदालत ने जारी किया सजायाबी वारंट अदालत ने निचली अदालत के फैसले में कोई कानूनी त्रुटि नहीं पाई। अपील को बलहीन मानते हुए उसे खारिज कर दिया गया। दोषी को संबंधित मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश करने के लिए सजायाबी वारंट भी जारी किया गया। परिवादी लाला राम की ओर से अधिवक्ता विवेक अवस्थी ने न्यायालय में प्रभावी पैरवी की।

