जीविका दीदियों ने उठाए 20 सवाल:एजेंसी के संचालक से मांगा लिखित जवाब; मशरूम क्लस्टर कर्ज विवाद में हुई दूसरी सुनवाई

जीविका दीदियों ने उठाए 20 सवाल:एजेंसी के संचालक से मांगा लिखित जवाब; मशरूम क्लस्टर कर्ज विवाद में हुई दूसरी सुनवाई

मशरूम क्लस्टर के नाम पर कर्ज और वित्तीय अनियमितता के मामले में बुधवार, 2 सितंबर को एसडीओ पूर्वी आनंद उत्सव के न्यायालय में दूसरी बार सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों ने अपना-अपना लिखित पक्ष और साक्ष्य प्रस्तुत किए। जीविका दीदियों की ओर से मामले में 20 बिंदुओं पर सवाल उठाए गए हैं, जिनका जवाब एजेंसी के संचालक आशुतोष मंगलम से लिखित रूप में मांगा गया है। मामले की अगली सुनवाई 16 सितंबर को होगी। बुधवार की सुनवाई में एक पक्ष में 6 जीविका दीदियां थीं। वहीं, दूसरे पक्ष में ग्रेविटी एग्रो एंड एनर्जी एजेंसी, उसके निदेशक आशुतोष मंगलम, जीविका की डीपीएम अनीशा गांगुली और उत्तर बिहार ग्रामीण बैंक की बोचहां और मुशहरी शाखाओं के प्रबंधक शामिल हुए। जीविका दीदियों ने कर्ज की राशि, मशरूम क्लस्टर के संचालन और परियोजना के लिए ली गई राशि के इस्तेमाल से जुड़े सवाल न्यायालय के समक्ष रखे। बैंक ने पेश किए चेक और अन्य साक्ष्य एसडीओ पूर्वी आनंद उत्सव ने बताया कि पिछली सुनवाई में दोनों पक्षों को अपना लिखित पक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया था। बुधवार को दोनों पक्षों ने अपना पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि जीविका दीदियों की ओर से कुछ गंभीर सवाल उठाए गए थे, जिसमें ब्लैंक पेपर पर हस्ताक्षर कराने का आरोप भी शामिल था। इस संबंध में बैंक से जवाब और साक्ष्य मांगे गए थे। बुधवार को बैंक की ओर से कुछ साक्ष्य न्यायालय में प्रस्तुत किए गए। एसडीओ पूर्वी के अनुसार, बैंक द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों में जीविका दीदियों के हस्ताक्षर वाले चेक समेत अन्य दस्तावेज शामिल हैं। कुछ अन्य साक्ष्य अगली सुनवाई में प्रस्तुत करने को कहा गया है।
एजेंसी संचालक बोले- अगली सुनवाई में देंगे 20 सवालों का जवाब ग्रेविटी एग्रो एंड एनर्जी एजेंसी के संचालक आशुतोष मंगलम ने कहा कि मामले की यह दूसरी सुनवाई थी और उन्होंने अपना पक्ष न्यायालय के समक्ष रखा है। जीविका दीदियों की ओर से उठाए गए 20 बिंदुओं पर उनसे जवाब मांगा गया है, जिसे वह अगली सुनवाई में लिखित रूप से उपलब्ध कराएंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि परियोजना के दौरान बैंक की ओर से भुगतान में कथित अनियमितता और देरी हुई, जिससे प्रोजेक्ट प्रभावित हुआ। हालांकि, उनका कहना है कि अभी भी उनके तीन मशरूम क्लस्टर संचालित हो रहे हैं और वहां काम चल रहा है। पहली सुनवाई में डीपीएम से मांगा गया था बैंक स्टेटमेंट पहली सुनवाई 19 अगस्त को हुई थी। उस दौरान छह जीविका दीदियों समेत मामले से जुड़े सभी पक्षों ने अपना-अपना पक्ष रखा था। सुनवाई के दौरान जीविका की डीपीएम अनीशा गांगुली ने बैंक खाते और स्टेटमेंट की जानकारी नहीं होने की बात कही थी। इसके बाद एसडीओ पूर्वी के न्यायालय ने उन्हें संबंधित ग्रामीण बैंक से खाता संख्या और बैंक स्टेटमेंट प्राप्त कर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था। साथ ही दोनों पक्षों से लिखित जवाब और मशरूम क्लस्टर से जुड़े एग्रीमेंट की प्रति भी मांगी गई थी।
दो दिन के अनशन के बाद न्यायालय पहुंचा था मामला मशरूम क्लस्टर के नाम पर कर्ज और कथित वित्तीय गड़बड़ी का मामला पहले कलेक्ट्रेट परिसर में जीविका दीदियों के आंदोलन के बाद चर्चा में आया था। न्याय की मांग को लेकर महिलाओं ने दो दिनों तक अनशन किया था। 12 अगस्त की देर रात एसडीओ पूर्वी आनंद उत्सव धरनास्थल पहुंचे थे और महिलाओं को पानी पिलाकर अनशन समाप्त कराया था। इसके बाद जीविका दीदियां अपने घर लौट गई थीं। बाद में मामले को एसडीओ पूर्वी के न्यायालय में ले जाया गया, जहां वाद दायर होने के बाद दोनों पक्षों को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया गया। एसडीओ पूर्वी आनंद उत्सव ने कहा कि दोनों पक्षों से मिले दस्तावेजों और साक्ष्यों के आधार पर मामले की सुनवाई आगे बढ़ाई जा रही है और जिन बिंदुओं पर अतिरिक्त जवाब जरूरी है, उन्हें अगली सुनवाई में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। मशरूम क्लस्टर के नाम पर कर्ज और वित्तीय अनियमितता के मामले में बुधवार, 2 सितंबर को एसडीओ पूर्वी आनंद उत्सव के न्यायालय में दूसरी बार सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों ने अपना-अपना लिखित पक्ष और साक्ष्य प्रस्तुत किए। जीविका दीदियों की ओर से मामले में 20 बिंदुओं पर सवाल उठाए गए हैं, जिनका जवाब एजेंसी के संचालक आशुतोष मंगलम से लिखित रूप में मांगा गया है। मामले की अगली सुनवाई 16 सितंबर को होगी। बुधवार की सुनवाई में एक पक्ष में 6 जीविका दीदियां थीं। वहीं, दूसरे पक्ष में ग्रेविटी एग्रो एंड एनर्जी एजेंसी, उसके निदेशक आशुतोष मंगलम, जीविका की डीपीएम अनीशा गांगुली और उत्तर बिहार ग्रामीण बैंक की बोचहां और मुशहरी शाखाओं के प्रबंधक शामिल हुए। जीविका दीदियों ने कर्ज की राशि, मशरूम क्लस्टर के संचालन और परियोजना के लिए ली गई राशि के इस्तेमाल से जुड़े सवाल न्यायालय के समक्ष रखे। बैंक ने पेश किए चेक और अन्य साक्ष्य एसडीओ पूर्वी आनंद उत्सव ने बताया कि पिछली सुनवाई में दोनों पक्षों को अपना लिखित पक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया था। बुधवार को दोनों पक्षों ने अपना पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि जीविका दीदियों की ओर से कुछ गंभीर सवाल उठाए गए थे, जिसमें ब्लैंक पेपर पर हस्ताक्षर कराने का आरोप भी शामिल था। इस संबंध में बैंक से जवाब और साक्ष्य मांगे गए थे। बुधवार को बैंक की ओर से कुछ साक्ष्य न्यायालय में प्रस्तुत किए गए। एसडीओ पूर्वी के अनुसार, बैंक द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों में जीविका दीदियों के हस्ताक्षर वाले चेक समेत अन्य दस्तावेज शामिल हैं। कुछ अन्य साक्ष्य अगली सुनवाई में प्रस्तुत करने को कहा गया है।
एजेंसी संचालक बोले- अगली सुनवाई में देंगे 20 सवालों का जवाब ग्रेविटी एग्रो एंड एनर्जी एजेंसी के संचालक आशुतोष मंगलम ने कहा कि मामले की यह दूसरी सुनवाई थी और उन्होंने अपना पक्ष न्यायालय के समक्ष रखा है। जीविका दीदियों की ओर से उठाए गए 20 बिंदुओं पर उनसे जवाब मांगा गया है, जिसे वह अगली सुनवाई में लिखित रूप से उपलब्ध कराएंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि परियोजना के दौरान बैंक की ओर से भुगतान में कथित अनियमितता और देरी हुई, जिससे प्रोजेक्ट प्रभावित हुआ। हालांकि, उनका कहना है कि अभी भी उनके तीन मशरूम क्लस्टर संचालित हो रहे हैं और वहां काम चल रहा है। पहली सुनवाई में डीपीएम से मांगा गया था बैंक स्टेटमेंट पहली सुनवाई 19 अगस्त को हुई थी। उस दौरान छह जीविका दीदियों समेत मामले से जुड़े सभी पक्षों ने अपना-अपना पक्ष रखा था। सुनवाई के दौरान जीविका की डीपीएम अनीशा गांगुली ने बैंक खाते और स्टेटमेंट की जानकारी नहीं होने की बात कही थी। इसके बाद एसडीओ पूर्वी के न्यायालय ने उन्हें संबंधित ग्रामीण बैंक से खाता संख्या और बैंक स्टेटमेंट प्राप्त कर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था। साथ ही दोनों पक्षों से लिखित जवाब और मशरूम क्लस्टर से जुड़े एग्रीमेंट की प्रति भी मांगी गई थी।
दो दिन के अनशन के बाद न्यायालय पहुंचा था मामला मशरूम क्लस्टर के नाम पर कर्ज और कथित वित्तीय गड़बड़ी का मामला पहले कलेक्ट्रेट परिसर में जीविका दीदियों के आंदोलन के बाद चर्चा में आया था। न्याय की मांग को लेकर महिलाओं ने दो दिनों तक अनशन किया था। 12 अगस्त की देर रात एसडीओ पूर्वी आनंद उत्सव धरनास्थल पहुंचे थे और महिलाओं को पानी पिलाकर अनशन समाप्त कराया था। इसके बाद जीविका दीदियां अपने घर लौट गई थीं। बाद में मामले को एसडीओ पूर्वी के न्यायालय में ले जाया गया, जहां वाद दायर होने के बाद दोनों पक्षों को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया गया। एसडीओ पूर्वी आनंद उत्सव ने कहा कि दोनों पक्षों से मिले दस्तावेजों और साक्ष्यों के आधार पर मामले की सुनवाई आगे बढ़ाई जा रही है और जिन बिंदुओं पर अतिरिक्त जवाब जरूरी है, उन्हें अगली सुनवाई में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है।  

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