करनाल में एसई गीतू राम तंवर सुसाइड मामला:परिवार और समाज के नेताओं में विवाद, सुसाइड नोट में 12 नामों का जिक्र, पत्नी की शिकायत पर 7 अन्य नाम जुड़े

करनाल में एसई गीतू राम तंवर सुसाइड मामला:परिवार और समाज के नेताओं में विवाद, सुसाइड नोट में 12 नामों का जिक्र, पत्नी की शिकायत पर 7 अन्य नाम जुड़े

बिजली निगम के निलंबित एसई गीतूराम तंवर की आत्महत्या के मामले में मंगलवार को न्याय की मांग को लेकर हुई बैठक में परिवार और समाज के नेताओं के बीच अंतिम संस्कार को लेकर विवाद हो गया। एडीसी राहुल रईया और डीएसपी राजीव कुमार ने परिवार से बातचीत की थी। इसके बाद परिवार अंतिम संस्कार के लिए सहमत हो गया। परिवार की ओर से यह बात घर पहुंचे समाज के नेताओं को बताया गया कि मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित कर दी गई है, जिसमें आईपीएस रविंद्र, डीएसपी मीना और सेक्टर-9 चौकी प्रभारी संदीप कुमार को शामिल किया गया है।
परिवार की ओर से अंतिम संस्कार के लिए सहमति की बात सामने आते ही समाज के लोगों में नाराजगी फैल गई। एडवोकेट सोनिया तंवर, अमित तंवर सहित अन्य समाज के नेता वहां मौजूद थे। बैठक में समाज के लोगों ने हंगामा करते हुए कहा कि गीतूराम के मामले में पहले न्याय होना चाहिए। इस दौरान एक व्यक्ति यह कहते हुए सुनाई दिया कि वे गीतूराम के लिए न्याय मांग रहे हैं। उसने कहा कि न्याय ले लो, नहीं तो सरकार गीतूराम को चोर साबित कर देगी। उसने यह भी कहा कि अगर परिवार पहले ही बता देता कि वह संस्कार के लिए तैयार है तो पूरा समाज वहां नहीं आता। समाज के व्यक्ति ने कहा- दबाव है तो हमें बताएं
हंगामे के दौरान समाज के एक व्यक्ति ने कहा कि अगर परिवार पर किसी तरह का दबाव बनाया जा रहा है तो समाज को बताया जाए। उसने कहा कि गीतूराम लिखकर मरा है कि उसके साथ अन्याय हुआ है, इसलिए समाज को उसकी मौत के मामले में न्याय की लड़ाई लड़नी चाहिए। उसने सवाल उठाया कि जब समाज गीतूराम को न्याय दिलाने के लिए यहां पहुंचा है तो अचानक अंतिम संस्कार के लिए सहमति कैसे बन गई।
बैठक के दौरान जब कुछ लोग वहां से जाने लगे तो उनमें से एक व्यक्ति ने कहा कि गीतूराम मरने से पहले परिवार का था, लेकिन अब वह समाज का है और सभी लोगों को मिलकर फैसला लेना चाहिए। इसी हंगामे के बीच समाज नेता परिवार को यह बोल कर घर से निकल गए कि अब हमें कभी मत बुलाना गीतू को न्याय दिलाने के लिए। चार महीने से निलंबित था गीतूराम, मिल रही थी आधी सैलरी
बतादें कि अप्रैल माह में सोनीपत में एसई के पद पर तैनात गीतू राम तंवर को विभाग द्वारा निलंबत कर दिया गया था। परिवार के अनुसार, गीतूराम करीब चार महीने से निलंबित चल रहे थे और अप्रैल 2026 से उन्हें आधी सैलरी मिल रही थी। पत्नी प्रीति तंवर का आरोप है कि निलंबन और विभागीय कार्रवाई के कारण गीतूराम मानसिक दबाव में थे। शिकायत में उन्हें यूएचबीवीएन, पंचकूला में निलंबित एसई बताया गया है। वहीं मामले को लेकर सामने आई जानकारी में उन्हें बिजली निगम का जेई भी बताया गया है। प्रीति तंवर ने पुलिस को दी शिकायत में आरोप लगाया कि उनके पति मेहनती और ईमानदार अधिकारी थे। उन्होंने विभाग में अच्छा काम किया और प्रशासन तथा विभाग की ओर से कई बार सम्मानित भी किए गए। पत्नी के मुताबिक, गीतूराम हंसमुख स्वभाव के थे और दूसरों की मदद करते थे। जातिगत भेदभाव और अधिकारियों पर परेशान करने के आरोप
प्रीति ने शिकायत में आरोप लगाया कि सोनीपत में तैनाती के दौरान एक्सईएन रणबीर देशवाल, एक्सईएन अश्वनी कौशिक, एसडीओ सतीश गोयत और एसडीओ प्रदीप कुमार उनके पति के साथ जातिगत भेदभाव करते थे। आरोप है कि ये अधिकारी गीतूराम को अपना उच्च अधिकारी तक नहीं मानते थे और अपनी मनमानी करते थे। पत्नी के मुताबिक, गीतूराम ने समय-समय पर अपने उच्च अधिकारियों को इस बारे में जानकारी दी और विभागीय कार्रवाई की मांग की, लेकिन आरोपियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। शिकायत में आरोप है कि इसके बाद गीतूराम के खिलाफ विभागीय स्तर पर कार्रवाई और अन्य घटनाक्रम के कारण उनका तनाव बढ़ता गया। वीडियो बनाकर चार महीने बाद एडिट कर वायरल करने का आरोप
शिकायत के अनुसार, रणबीर देशवाल, अश्वनी कौशिक, सतीश गोयत और प्रदीप कुमार ने कथित तौर पर मिलीभगत कर सोनीपत के डीसी कैंप कार्यालय में गीतूराम के साथ बातचीत का एक वीडियो बनवाया। पत्नी का आरोप है कि इस वीडियो को करीब चार महीने बाद एडिट करके सोशल मीडिया पर वायरल किया गया। इसके बाद गीतूराम के खिलाफ थाना शहर सोनीपत में मामला दर्ज कराया गया। शिकायत में इस मुकदमे को झूठा बताया गया है। परिवार का आरोप है कि वीडियो वायरल होने और मुकदमा दर्ज होने के बाद गीतूराम पर दबाव और बढ़ गया। सोशल मीडिया पर धमकियां मिलने का भी आरोप
प्रीति तंवर ने शिकायत में नवीन दलाल, ओमबीर धनखड़ और टोनू कोहाड़ सहित अन्य लोगों पर सोशल मीडिया के माध्यम से गीतूराम को परेशान करने और धमकी देने के आरोप लगाए हैं। शिकायत में कहा गया है कि उन्हें जातिसूचक गालियां दी जाती थीं और जान से मारने की धमकियां मिलती थीं। पत्नी के अनुसार, गीतूराम बार-बार कहते थे कि आरोपी उन्हें या उनके परिवार को नुकसान पहुंचाने की धमकी देते हैं। शिकायत में यह भी आरोप है कि उन्हें कहा जाता था कि या तो वे खुद मर जाएं या उन्हें और उनके परिवार को मार दिया जाएगा। प्रीति ने कहा कि गीतूराम और उनका परिवार अनुसूचित जाति से संबंध रखता है, जबकि शिकायत में नामजद कई लोगों को सामान्य वर्ग से बताया गया है। पत्नी की शिकायत पर 31 अगस्त को एफआईआर
प्रीति तंवर ने 31 अगस्त को थाना सेक्टर-32/33, करनाल में लिखित शिकायत दी। लेकिन पुलिस ने सुसाइड नोट के आधार पर ही मामला दर्ज किया था। परिवार ने जब शव उठाने से इंकार किया तो पुलिस ने मंगलवार को उनकी पत्नी के शिकायत पर मामला दर्ज किया। जिसमें 7 नए नामों को जोड़ गया। उनकी शिकायत के आधार पर मुकदमा दर्ज किया गया। इसमें भारतीय न्याय संहिता की धारा 108, 351(3) और अनुसूचित जाति/जनजाति अधिनियम की धारा 3(1)(एस) लगाई गई है।
एफआईआर में एक्सईएन रणबीर देशवाल, एक्सईएन अश्वनी कौशिक, एसडीओ सतीश गोयत, एसडीओ प्रदीप कुमार, एसई मनिंदर सिंह, यूएचबीवीएन प्रशासन कार्यालय के अधिकारी मोहित भटनागर, एक्सईएन राज सिंह, एसडीओ आशीष मेहल, एसडीओ रूपेश, यूएचबीवीएन के एमडी एवं आईएएस अधिकारी विक्रम सिंह, नवीन दलाल, ओमबीर धनखड़, टोनू कोहाड़ और हरियाणा भाईचारा मीडिया के खिलाफ शिकायत दर्ज होने की बात सामने आई है। सुसाइड नोट में दो नामों का जिक्र, बाकी नामों को लेकर अंतर
गीतू राम द्वारा छोड़े गए सुसाइड नोट 12 लोगों के नाम लिखे थे। इनमें एसई धर्म सुहाग और अजय कोहाड़ के नाम का भी जिक्र था। वहीं पत्नी ने जो पुलिस को शिकायत दी है उसमें इन दोनों के नाम नहीं है। सुसाइड नोट और पत्नी की शिकायत में कई नए नामों को जोड़ा गया है। उनकी शिकायत में विभागीय अधिकारियों के साथ नवीन दलाल, ओमबीर धनखड़, टोनू कोहाड़ और हरियाणा भाईचारा मीडिया का नाम शामिल है। पुलिस अब सुसाइड नोट, पत्नी की शिकायत और एफआईआर में दर्ज सभी नामों की भूमिका की अलग-अलग जांच करेगी। एसआईटी बनने के बाद भी समाज में नाराजगी
परिवार और प्रशासन के बीच बातचीत के बाद जांच के लिए एसआईटी गठित की गई है। इसमें आईपीएस रविंद्र, डीएसपी मीना और सेक्टर-9 चौकी प्रभारी संदीप कुमार को शामिल किया गया है। प्रशासन की ओर से परिवार को जांच आगे बढ़ाने का भरोसा दिए जाने के बाद परिवार अंतिम संस्कार के लिए तैयार हुआ। वहीं समाज के नेताओं का आरोप लगाया कि परिवार के लोगों ने ही गीतू राम को चार साबित कर दिया। हम गीतू राम को न्याय दिलाने के लिए आए थे। जबतक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होती तबतक हम पिछे हटने वाले नहीं थे।

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