कानपुर सांसद ने आईआईटी निदेशक से की मुलाकात:NTC-BIC की जमीन पर नए उद्योग और रोजगार की तैयारी, रमेश अवस्थी ने IIT से मांगा फीजिबिलिटी प्लान

कानपुर सांसद ने आईआईटी निदेशक से की मुलाकात:NTC-BIC की जमीन पर नए उद्योग और रोजगार की तैयारी, रमेश अवस्थी ने IIT से मांगा फीजिबिलिटी प्लान

कानपुर सांसद रमेश अवस्थी ने मंगलवार को IIT कानपुर के निदेशक से मुलाकात कर नेशनल टेक्सटाइल कॉरपोरेशन (NTC) और ब्रिटिश इंडिया कॉरपोरेशन (BIC) की औद्योगिक इकाइयों, जमीन और अन्य परिसंपत्तियों के बेहतर उपयोग पर विस्तृत चर्चा की। बंद मिलों की जमीन को आधुनिक उद्योगों से जोड़ने की तैयारी
सांसद ने कहा कि कानपुर कभी देश के प्रमुख औद्योगिक और टेक्सटाइल केंद्रों में शामिल था। यहां की मिलों ने हजारों परिवारों को रोजगार दिया। समय के साथ कई औद्योगिक इकाइयां बंद हो गईं या उनकी गतिविधियां सीमित हो गईं। ऐसे में उपलब्ध जमीन और परिसंपत्तियों को नई औद्योगिक गतिविधियों से जोड़ने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि पुरानी औद्योगिक परिसंपत्तियों को केवल विरासत के रूप में देखने के बजाय इन्हें भविष्य के औद्योगिक विकास का आधार बनाया जा सकता है। IIT कानपुर तैयार करेगा व्यवहार्यता अध्ययन का रोडमैप
बैठक में IIT कानपुर के विशेषज्ञों के माध्यम से ‘इंडस्ट्रियल रिवाइवल फीजिबिलिटी असेसमेंट’ तैयार करने की दिशा में विचार किया गया। इसमें औद्योगिक परिसंपत्तियों की तकनीकी और आर्थिक व्यवहार्यता, संभावित उपयोग, रोजगार सृजन और निवेश की संभावनाओं का अध्ययन किया जाएगा।
इसके आधार पर एक क्रियान्वयन योग्य रोडमैप तैयार करने पर भी चर्चा हुई। टेक्सटाइल से लेकर स्टार्टअप हब तक की संभावनाएं
सांसद ने कहा कि NTC और BIC की उपलब्ध भूमि का उपयोग आधुनिक क्षेत्रों में किया जा सकता है। इनमें तकनीकी टेक्सटाइल, मैन्युफैक्चरिंग, स्टार्टअप एवं इनोवेशन हब, स्किल डेवलपमेंट सेंटर, रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेंटर, MSME क्लस्टर और नई तकनीक आधारित औद्योगिक इकाइयां शामिल हैं। उन्होंने कहा कि IIT कानपुर की तकनीकी विशेषज्ञता, रिसर्च, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑटोमेशनऔर स्टार्टअप इकोसिस्टम का लाभ औद्योगिक परिसंपत्तियों के पुनर्विकास में लिया जा सकता है। रोजगार और निवेश बढ़ाना प्राथमिकता
रमेश अवस्थी ने कहा कि कानपुर में प्रतिभा, श्रमशक्ति, उद्यमिता और औद्योगिक अनुभव मौजूद है। जरूरत इन संसाधनों को आधुनिक तकनीक और बेहतर औद्योगिक इकोसिस्टम से जोड़ने की है। बंद या कम उपयोग में आ रही परिसंपत्तियों का वैज्ञानिक अध्ययन कर उनका उत्पादक इस्तेमाल किया जाए तो रोजगार, निवेश और नए उद्योगों के बड़े अवसर पैदा हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस पहल का उद्देश्य केवल पुरानी मिलों को दोबारा शुरू करना नहीं, बल्कि कानपुर की औद्योगिक विरासत को आधुनिक अर्थव्यवस्था से जोड़ना है। इसके लिए IIT कानपुर, केंद्र एवं प्रदेश सरकार के विभागों, NTC, BIC, उद्योग जगत, MSME, स्टार्टअप और स्थानीय उद्यमियों को साथ लेकर समन्वित मॉडल विकसित करने की जरूरत है।

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