IAS Tukaram Mundhe: सीनियर आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंडे अपने बेबाक और सख्त काम करने के तरीके की वजह से पूरे देश में चर्चा का विषय बन गए हैं। महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग (FDA) की जिम्मेदारी संभालने के बाद मिलावटखोरों और स्वच्छता नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ उनकी कार्रवाई की हर तरफ सराहना हो रही है। तुकाराम मुंढे की गिनती उन अधिकारियों में होती है, जो अपनी स्पष्ट और कड़े फैसले लेने वाली कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं। वह खुद भी समय-समय पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर FDA की कार्रवाई की जानकारी देते हैं। इसके अलावा हाल के कुछ इंटरव्यू में वे अपने निजी जीवन और संघर्ष से जुड़े अनुभव भी साझा करते नजर आए हैं। ऐसे ही एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) परीक्षा पास करने के बाद उनके माता-पिता की पहली प्रतिक्रिया क्या थी और उन्होंने बेटे को क्या सलाह दी थी।
UPSC पास करने के बाद माता-पिता ने दी थी ये सलाह
इंटरव्यू में तुकाराम मुंडे से पूछा गया कि जब उन्होंने UPSC परीक्षा पास की, तब उनके माता-पिता की पहली प्रतिक्रिया क्या थी? इस पर उन्होंने बताया कि उनके माता-पिता ने उनसे कहा था कि “तुमसे जितना लोगों का भला हो सके, उतना भला करना।” मुंडे के मुताबिक, उनके माता-पिता ने उनसे कभी यह नहीं कहा कि उन्हें अपने बेटे से कुछ चाहिए या वह उनके लिए कुछ खास करे। इसके बजाय उन्होंने हमेशा समाज के लिए काम करने और लोगों की मदद करने की सीख दी।
‘मैं चकित हो गया था…’
अपने माता-पिता की प्रतिक्रिया को याद करते हुए तुकाराम मुंडे ने कहा कि वह खुद यह सुनकर सोच में पड़ गए थे। उनके मन में यह विचार आया कि जिस वातावरण में वे पले-बढ़े हैं, वह वास्तव में एक खास तरह की विचारधारा और संस्कारों वाला है। उन्होंने यह भी माना कि परिवार के समर्थन के बिना उनके लिए इतना कुछ हासिल करना संभव नहीं होता।
‘मेरी सफलता का श्रेय परिवार और दोस्तों को’
तुकाराम मुंडे ने अपनी सफलता का श्रेय केवल अपनी मेहनत को नहीं दिया। उन्होंने कहा कि उनके परिवार और दोस्तों ने हर कदम पर उनका साथ दिया। उन्होंने कहा कि अगर लोग आज उनके काम की तारीफ करते हैं, तो इसका पूरा श्रेय उनके परिवार और उन दोस्तों को जाता है, जो लगातार उनके साथ खड़े रहे। उन्होंने कहा, “यह केवल मेरी व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि एक पूरी टीम का प्रयास है। यदि आज लोग मेरे काम की सराहना करते हैं, तो इसका सारा श्रेय मेरे परिवार और उन दोस्तों को जाता है जो हर समय में मेरे साथ मजबूती से खड़े रहे।”
आईएएस अधिकारी का यह बयान बताता है कि उनके प्रशासनिक करियर के पीछे उनकी व्यक्तिगत मेहनत के साथ-साथ परिवार के संस्कार और दोस्तों का सहयोग भी अहम रहा है।

